जब इंदिरा सरकार से उलझ पड़े थे किशोर दा, जानिए उनके बारे में 5 दिलचस्प बातें

फिल्मी जगत की नामचीन हस्तियों में शुमार किशोर दा की पुण्य तिथि के मौके पर उनकी कुछ दिलचस्प किस्से और कहानियां जो आपने अब तक नहीं सुनी होगी, आइए आपको उनके बारे में बताते हैं..

जब इंदिरा सरकार से उलझ पड़े थे किशोर दा, जानिए उनके बारे में 5 दिलचस्प बातें

नई दिल्ली: फिल्म जगत में पर्दे के पीछे की मेहनत पर्दे पर चल रही कहानी को चार चांद लगा देती है. ये कहानी तब और भी रोमांचक हो जाती थी जब इसमें किशोर दा की मौजूदगी किसी न किसी रूप में पर्दे पर नया रंग उढ़ेल देती थी. किशोर कुमार जिनका नाम बॉलीवुड के उन चमकते सितारों में दर्ज है जो सेट पर रहते हैं तो खुशनुमा माहौल बनाए रखते थे और पर्दे पर अपनी आवाज से सबको सम्मोहित कर लेते थे. किशोर कुमार न सिर्फ एक गायक थे बल्कि कंपोजर, प्रोड्यूसर, निर्देशक स्क्रीनप्ले लेखकऔर पटकथा लेखक के रूप में भी अच्छी-खासी ख्याति हासिल कर ली थी.

लगातार हो रही फिल्मों से खीझ गए थे किशोर दा

किशोर कुमार ने फिल्मों में अभिनय की शुरूआत 1946 में शिकारी फिल्म से की. 1951 में आंदोलन फिल्म में किशोर दा को लीड रोल मिला, लेकिन शुरूआती दौर में ही फिल्मी कैरियर खत्म होने की कगार पर आ गया. दरअसल, 1946-55 तक किशोर दा  कि 22 फिल्में आई जिसमें से 16 फिल्में पीट गई. 1955 तक हालांकि किशोर दा की आवाज के कायल बहुत हो चुके थे. 1955-1966 का दौर इनके लिए यादगार रहा जब लड़की, नौकरी, चार पैसे और बाप रे बाप जैसी फिल्मेंपर्दे पर हिट रही.
 
किशोर के वो गानें जो सबके जेहन पर छा गए 

इसके बाद का दौर किशोर दा के अभिनय के लिहाज से भले खठ्ठे-मीठी यादों वाला रहा हो, पर अपनी गायकी से वे लोगों के जेहन में छा गए. फिर चाहे वो "मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू", जिंदगी  एक सफर है सुहाना, यहां कल क्या हो किसने जाना और जीना इसी का नाम है जैसे गानों से हर दिल की आवाज बन बैठे. 1968 में आई फिल्म पड़ोसन का " मेरे सामने वाली खिड़की में एक चांद का टुकड़ा रहता है" गाना तो जैसे सबकी जुबान पर ही चढ़ गया था. 

किशोर दा की इन दिलचस्प कहानियों के अलावा कुछ ऐसे भी किस्से थे जो अनसुने ही रह गए हैं. आइए आपको इनसे रूबरू कराते हैं...

1. किशोर दा ने अपने जीवन में चार शादियां की थी- पहली रूमा गुहा ठाकुरता के साथ, दूसरी सिने जगत की उस समय की सुंदरी मधुबाला से, तीसरी योगिता बालि से और चौथी लीना चंद्रवरकर से.

2. किशोर कुमार, सत्यजीत रे की इतनी इज्जत करते थे कि उन्होंने उनकी फिल्मों में काम करने के लिए कभी पैसे नहीं लिए. 

3. किशोर दा के बचपन का नाम आभास कुमार गांगुली था. वे गाना गाने के लिए कैरेक्टर के हिसाब से खुद को ढ़ालते थे, जैसे कि खाई के पान बनारस वाला गाने के लिए उन्होंने रियल में भी पान खा कर गाना गाया.

4. किशोर दा, के.एल सैगल, रविंद्रनाथ टैगोर और हॉलीवुड के डैनी के के इतने बड़े प्रशंषक थे कि हमेशा इन तीनों की तस्वीर उनके घर के दीवार पर टंगी मिलती थी. 

5. ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म आनंद की पहली पसंद किशोर कुमार और महमूद थे.

 

जब इंदिरा सरकार से भिंड़ गए थे किशोर दा

किशोर कुमार अपनी फिल्मों में भले हंसाते-गुदगुदाते नजर आते थे. लेकिन असल जीवन में बड़े सिद्धांतवादी भी थे. अपने इस जिद्दी रवैये के कारण वे इंदिरा सरकार से भी उलझ गए थे जिससे नुकसान उनका ही हुा. दरअसल, किशोर कुमार ने इंदिरा सरकार के 20-फॉर्मूले प्लान को गीत के रूप में गाने का प्रस्ताव ठुकरा दिया. जिसके बाद किशोर दा को विविध भारती और ऑल इंडिया रेडियो पर गाने से उन पर प्रतिबंध लगा दिया गया. किशोर कुमार का व्यक्तित्व सिने जगत में बड़ा प्रभावी रहा है.