यमन में जंग: शिविरों में कराह रही है ज़िंदगी

यमन में सेना और हूती विद्रोहियों के बीच हुए भीषण संघर्ष में अब तक 23 लोग मारे गए हैं, यमन के मारिब प्रांत और होदेइदा में पिछले कई दिनों से सरकारी सुरक्षा बलों और हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष जारी है.

यमन में जंग: शिविरों में कराह रही है ज़िंदगी

नई दिल्ली: यमन में विद्रोहियों और सरकारी बलों के बीच चल रहे संघर्ष के चलते लाखों लोग बेघर हो गए, जिन्हें शरणार्थी शिविरों में दिन काटने पड़ रहे हैं. ऐसे में ये कहना गलत नहीं है कि शिविरों में जिंदगी कराह रही है.

संघर्ष बढ़ा तो इनकी जान की जोखिम

यमन में तैनात यूएन मानवाधिकार समन्वयक, लिसे ग्रांड ने कहा ''हमारे लिए सबसे ज्यादा चिंता का विषय मारिब है, क्योंकि जंग के कारण अपने घरों से विस्थापित लगभग दस लाख लोग मारिब में हैं, वो बेहद असुरक्षित हैं. हम जानते हैं कि संघर्ष बढ़ा तो इनकी जान तो जोखिम में होगी ही, मारिब के लोग भी विस्थापित हो जाएंगे."

हूती विद्रोहियों ने मारिब में अतिरिक्त लड़ाकों को तैनात किया है, लेकिन फिलहाल उन्हें कोई सफलता नहीं मिली है. पिछले कुछ सालों में इस जंग के कारण अब तक 1 लाख 12 हज़ार लड़ाके और आम लोगों की जान जा चुकी है. यमन में 2014 में जंग शुरू हुई थी जब ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने राजधानी और देश के उत्तरी भूभाग पर कब्जा कर लिया था. बाद में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले यूनाइटेड फोर्स ने राष्ट्रपति आबेद रब्बो मंसूर हादी की सरकार को स्थापित करने के लिए सैन्य अभियान शुरू कर दिया था.

यूएन की देखरेख में भी सीज फायर की कई कोशिशें की गईं पर परिणाम नहीं निकला. ईरान समर्थित विद्रोही गुट पूरे क्षेत्र पर कब्जा करना चाहता है. तेल संपदा से संपन्न मारिब प्रांत में हालिया झड़प से आस पास मौजूद कई शरणार्थी शिविरों में खौफ़ है.

एक शरणार्थी मोहम्मद अब्दुल्ला क़ासिम कहते हैं ''मेरी एक पत्नी और पांच बच्चे हैं. हम अल-खानिक शिविर में रह रहे थे जब वहां जंग होने लगी तो हमें यहां अल-सोवेदा शिविर आना पड़ा. अब हमारे पास टेंट के अलावा कुछ भी नहीं है. ना हमारे पास बिजली है ना अस्पताल ना स्कूल''

वहीं शिविरों में तमाम परेशानियों को दूर करने के लिए मानवाधिकार से जुड़े कार्यकर्ता लगातार प्रयास कर रहे हैं,.

यमन में तैनात यूएन मानवाधिकार समन्वयक लिसे ग्रांड कहती हैं, ''फिलहाल हम मारिब में हालात देख रहे हैं, वहां हमारी टीम मौजूद है इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM), हमारी प्रमुख एजेंसी है, जो स्वास्थ्य सेवाएं दे रही है, शेल्टर, पानी और स्वच्छता से जुड़ी सेवाएं भी दे रही है."

गंभीर मानवीय संकट झेल रहे यमन में फिर शुरु हुए इस संघर्ष ने हालात जटिल बना दिए हैं. लाखों लोग खाद्यान्न और इलाज -दवा से महरूम हैं. अब राहत शिविरों में भी जिंदगी महफूज नहीं.

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