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45 साल बाद पटना में क्यों बने ऐसे हालात? बारिश ने लोगों को बनाया 'जलकैदी'

प्रचंड बारिश से पटना में चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह से ठप पड़ गई है. पटना के सबसे बड़े अस्पताल पीएमसीएच में घुटनों तक पानी भर गया तो राजधानी का दूसरे बड़े अस्पताल NMCH का परिसर भी तालाब में तब्दील हो गया है.

45 साल बाद पटना में क्यों बने ऐसे हालात? बारिश ने लोगों को बनाया 'जलकैदी'

नई दिल्ली: बिहार पर मौसम की मार जारी है. और ताजा अपडेट के मुताबिक जिंदगी पर आफत के अगले 24 घंटे भारी है. राजधानी पटना को समंदर रूपी बारिश ने अपने आगोश में ले लिया है. राजधानी पटना में ऐसा 45 साल बाद हुआ है कि बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं.पूरे शहर का आलम ये है कि आफत की बारिश के पानी ने लोगो को जल कैदी बनने पर मजबूर कर दिया है.

चौक-चौराहे पानी में गायब हो गए हैं. रिहायशी इलाकों समेत सारी सड़कें डूबी हुई हैं. घरों में पानी घुस गया है. अस्पतालों का हाल देखकर हर कोई खौफ के साए में जीने को मजबूर हो गया है. जलजमाव के चलते स्कूलों की छुट्टियां करनी पड़ीं.

सितंबर के जाते-जाते बारिश ने पटना में ऐसी तबाही मचाई कि नगर निगम के तमाम दावे हवा हो गए. पटनावासियों के सिर पर जलसमाधि लेने का खतरा मंडरा रहा है. बारिश का पानी कंधे से ऊपर तक पहुंच चुका है. लोग घरों से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थानों पर जा रहे हैं. लोग जुगाड़ के सहारे अपनी जिंदगी बचा रहे हैं.

लोगों में प्रशासन और सरकार के खिलाफ गुस्सा बढ़ता ही जा रहा है और आरोप है कि राहत बचाव के इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं. 

कुदरत के आफतकाल ने दी दस्तक 

प्रचंड बारिश से पटना में चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह से ठप पड़ गई है. पटना के सबसे बड़े अस्पताल पीएमसीएच में घुटनों तक पानी भर गया तो राजधानी का दूसरे बड़े अस्पताल NMCH का परिसर भी तालाब में तब्दील हो गया है. बड़ी-बड़ी मछलियां तैर रही हैं और वार्डों का हाल बेहाल है. मरीजों को बाहर लाने के लिए स्ट्रेचर का इस्तेमाल किया जा रहा है. एंबुलेंस पानी में डूबी हुई है. जुगाड़ की नाव से लोग NMCH में आते देखे जा रहे हैं.

डॉक्टर का कहना है कि वो सारे मरीजों को ऊपर शिफ्ट कर रहे हैं. नीचे का भी पूरा वार्ड खाली कराकर PICU के मरीजों को भी ऊपर रखा गया है. डॉक्टर के अनुसार जो मरीज ठीक है. अपनी मर्जी से घर जाना चाहता है उसे घर भेज रहे हैं.

विनाशलीला पर आमादा है बारिश

इसके अलावा स्टेशनरी शॉप में पानी ने कॉपी-किताबें बर्बाद कर दी है. स्टेशनरी का सारा सामान बारिश के पानी में तैर रहा है. जलभराव से पटना के बोरिंग रोड पर दुकान से पानी निकालने के लिए लोगों ने जद्दोजहद की.

विपक्ष ने राजधानी पटना में बाढ़ जैसे हालात को लेकर सीएम नीतीश कुमार को निशाने पर ले लिया है. आरजेडी नेता शिवानंद तिवारी ने जहां नीतीश सरकार को कटघटे में खड़ा किया. वहीं जनाधिकार पार्टी के अध्यक्ष पप्पू यादव ने कहा कि पटना की हालत के लिए नीतीश और लालू के 30 सालों का शासनकाल जिम्मेदार है.

खौफनाक मंजर से मचा त्राहिमाम

बिहार में जिस तरह से बारिश और बाढ़ का डबल अटैक जारी है. प्रदेश के कई इलाके जलमग्न हो गए हैं. ट्रेनों की रफ्तार पर भी ब्रेक लग गया है. स्कूलों में छुट्टी है, लोग घरों में कैद हैं. बारिश ने ऐसा बेबस किया जो किसी त्रासदी से कम नहीं है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आनेवाले 24 घंटो को बेहद चुनौतीपूर्ण करार दिया है. 

ऐसे में राज्य सरकार ने इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर जारी किया है. जो 24 घंटे काम करेगा. पटना के साथ-साथ बाढ़ प्रभावित दूसरे जिलों में रेस्क्यू के लिए NDRF की 20 और SDRF की 12 टीमें तैनात की गई हैं. इसके अलावा गुवाहाटी से भी NDRF की 4 टीमों को बुलाया गया है. वहीं पटना के पुलिस मुख्यालय में हालात की गंभीरता के मद्देनजर स्टेट इमरजेंसी आपरेशन सेंटर खोला गया है.