'आशा है शिवसेना अपनी विचारधारा से समझौता नहीं करेगी'

महाराष्ट्र से एक बड़ी टिप्पणी सामने आई है और शिवशेना के लिए जरूरी भी है. टिप्पणी की है रंजीत सावरकर ने जो कि स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर के पौत्र हैं. उन्होंने कहा उन्हें उम्मीद है कि शिवसेना अपनी हिंदुत्व की विचारधार से समझौता नहीं करेगी. उनकी यह टिप्पणी कांग्रेस की उस शर्त के बाद सामने आई है जो शिवसेना के सामने समर्थन देने के बदले में रखी गई है. कांग्रेस ने शिवसेना से कट्टर हिंदुत्व के बजाय सॉफ्ट हिंदुत्व का रुख अपनाने को कहा है.

'आशा है शिवसेना अपनी विचारधारा से समझौता नहीं करेगी'

मुंबईः महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर जारी गतिरोध अब कुछ छंटता नजर आ रहा है, लेकिन अभी तक स्थिति ठीक-ठीक स्पष्ट नहीं हो पाई है. शिवसेना के कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाने के फैसले के बाद अब कैबिनेट बनने और मुद्दों को लेकर समझौता जारी है. इसी बीच महाराष्ट्र से एक बड़ी टिप्पणी सामने आई है और शिवशेना के लिए जरूरी भी है. टिप्पणी की है रंजीत सावरकर ने जो कि स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर के पौत्र हैं. उन्होंने कहा उन्हें उम्मीद है कि शिवसेना अपनी हिंदुत्व की विचारधार से समझौता नहीं करेगी. 

क्या कहा रंजीत सावरकर ने
महाराष्ट्र में शिवसेना और कांग्रेस के मिलने को दो विपरीत धाराओं के मिलने के तौर पर लिया जा रहा है. शुक्रवार को रंजीत ने इस गठबंधन को लेकर अपने विचार रखे. सावरकर के पौत्र रंजीत सावरकर ने कहा कि मुझे भरोसा है कि उद्धव ठाकरे कभी हिंदुत्व की अपनी विचारधारा से समझौता नहीं करेंगे. यही नहीं रंजीत सावरकर ने कहा कि उन्हें यह उम्मीद भी है कि उद्धव ठाकरे सावरकर को भारत रत्न दिए जाने की अपनी मांग से पीछे नहीं हटेंगे.

दरअसल चुनाव से पहले भाजपा-शिवसेना के संयुक्त मैनिफेस्टो में सावरकर को भारत रत्न दिए जाने की मांग का भी जिक्र था. उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि शिवसेना हिंदुत्व को लेकर कांग्रेस के स्टैंड को बदलने में सफल होगी. महाराष्ट्र चुनाव से पहले बीजेपी और शिवसेना ने सत्ता में आने पर वीर सावरकर को भारत रत्न दिए जाने की बात कही थी.

क्या है इस टिप्पणी के मायने
दरअसल, शिवसेना कट्टर हिंदुत्ववाद की समर्थक पार्टी रही है. इसलिए उसका भाजपा के साथ तो गठबंधन जम रहा था, लेकिन मुख्यमंत्री पद की मांग को लेकर दोनों का गठबंधन सरकार बनाने के लिए तैयार नहीं हो सका. इसके कई दौर के बाद शिवसेना कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने जा रही है, लेकिन इससे पहले कांग्रेस ने महाराष्ट्र की इस हिंदुत्ववादी पार्टी के सामने शर्त रखी है. शर्त है कि शिवसेना को कट्टर हिंदुत्ववाद का रुख छोड़कर सॉफ्ट हिंदुत्व का पहलू अपनाना होगा. यह शिवसेना के लिए पूरी तरह अपनी पहचान बदलने जैसा है. रंजीत सावरकर इसी ओर पार्टी का ध्यान दिलाना चाह रहे हैं.

कांग्रेस का साथ पहले भी हो चुका है नुकसानदायक
शिवसेना के लिए यह पहला मौका नहीं होगा जब उसने कांग्रेस का साथ लिया है. इसके पहले भी कांग्रेस और शिवसेना सत्ता में साथ आई हैं, लेकिन चुनाव में शिवसेना को करारी हार का सामना करना पड़ा है.

यह सबक इंदिरा गांधी के समय से शिवसेना को मिलता रहा है, जिसे उद्धव को समझना चाहिए. बाला साहेब ठाकरे ने इंदिरा गांधी के आपातकाल का समर्थन किया था. उसके अगले साल महाराष्ट्र में चुनाव हुए थे, साथ ही बीएमसी में भी चुनाव हुए थे. इन दोनों ही चुनाव में शिवसेना को करारी हार मिली थी.

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