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हारे इमरान के जिहादी नारे! दी दुहाई, कहा- 'कश्मीर पर साथ नहीं दुनिया'

न्यूयॉर्क में इमरान खान ने तुर्की के राष्ट्रपति और मलेशिया के प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी. इमरान ने ट्वीट कर कहा कि तीनों मुल्कों ने बीबीसी की तर्ज पर अंग्रेजी भाषा का टीवी न्यूज चैनल खोलने का फैसला लिया है.

हारे इमरान के जिहादी नारे! दी दुहाई, कहा- 'कश्मीर पर साथ नहीं दुनिया'

नई दिल्ली: न्यूयॉर्क में दुनिया के तमाम मुल्कों के महा-जुटान में कश्मीर राग अलापते हुए और मुस्लिम कार्ड खेलकर खून-खराबे की धमकी देने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान जब अपने वतन लौटे तब भी उनकी जुबां पर बस जेहाद-जेहाद का ही नारा था.

इमरान की बातों से ऐसा लग ही नहीं रहा था कि किसी मुल्क का प्रधानमंत्री बोल रहा हो. ऐसा आभास हो रहा था कि कोई आतंकी आका जहर उगल रहा है. अमेरिका में यूनाइटेड नेशन्स की जनरल एसेंबली में लुट-पिट कर इमरान खान को मालूम हो गया था कि उसे दुनिया के सबसे बड़े मंच पर कोई भाव नहीं मिला इसलिए इस्लामाबाद पहुंचते ही वो छाती पीटने लगे. इस्लामाबाद एयरपोर्ट अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच इमरान खान ने अपनी बेबसी को बयां करना शुरू किया. इमरान खान ने माना कि कश्मीर को लेकर दुनिया के तमाम देश पाकिस्तान के साथ खड़े नहीं हैं.

इमरान ने बातों ही बातों में बोल दिया कि 'ये जो हम कश्मीरियों के साथ खड़े हैं, दुनिया उनके साथ खड़ी हो या न हो. पाकिस्तान उनके साथ खड़ा है.'

ये इमरान खान का वो इकबालिया बयान है, जिससे जाहिर होता है कि कश्मीर मामले को लेकर उनकी झूठी कहानियों और प्रोपगैंडा को दुनिया ने खारिज कर दिया है. इमरान हर जगह कश्मीर का राग अलापते हुए कह रहे हैं कि वो कश्मीर के साथ खड़े हैं जबकि अपना मुल्क ही उनसे संभला नहीं जा रहा है. कर्ज में गर्दन तक धंसे और आर्थिक बदहाली के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे पाकिस्तान की चिंता करने की जगह प्रधानमंत्री इमरान खान आतंकी सरगना हाफिज सईद और मसूद अजहर की तरह जेहाद-जेहाद अलाप रहे हैं.

पाकिस्तानी पीएम इमरान खान ने कहा कि 'ये जिहाद है, उनके ऊपर जो जुल्म हो रहा है. इसलिए हम उनके साथ खड़े हैं. हम अपने अल्लाह को खुश करना चाहते हैं.'

इमरान खान ने इसी तरह की बात संयुक्त राष्ट्र में भी की थी, एक राष्ट्रप्रमुख के मुंह से इस तरह की बात सुनकर पूरी दुनिया हैरान रह गई थी कि कैसे एक प्रधानमंत्री खून-खराबे की वकालत कर सकता है वो भी धर्म की आड़ में.

इमरान खान ने उस वक्त अंतराष्ट्रीय मंच से बोला था कि ''1.3 बिलियन मुसलमानों में से कुछ हथियार उठाएंगे. एक हॉलीवुड की फिल्म देखी थी जिसमें एक आदमी था जिसको इंसाफ नहीं मिला. तो उसने बंदूक उठा ली और फायरिंग शुरू कर दी. उस सीन पर पूरे सिनेमा हॉल में तालियां बजने लगी. आप क्या सोचते हैं अभी मुस्लिम के मन में क्या चल रहा है? अगर खून-खराब होगा तो मुस्लिम ऐसा इस्लामिक कट्टरपंथ की वजह से नहीं करेंगे बल्कि इंसाफ नहीं मिलने के चलते मुस्लिम ऐसा कदम उठाएंगे.''

संयुक्त राष्ट्र संघ के मंच से इमरान खान ने न सिर्फ जेहाद बल्कि परमाणु युद्ध तक की चेतावनी दे डाली थी. पाकिस्तान ने ये कहकर डराने की कोशिश की थी कि अगर कश्मीर पर उसे तमाम मुल्कों ने समर्थन नहीं दिया तो भारत के साथ परमाणु युद्ध तक की नौबत आ सकती है और इसका खामियाजा सरहदों से परे पूरी दुनिया को उठानी पड़ेगी.

कश्मीर को लेकर इमरान खान और पाकिस्तान ने तमाम प्रोपगैंडा फैलाया, हर तरह की गीदड़भभकी देने की कोशिश की लेकिन इक्के-दुक्के देशों के अलावा उसे किसी का साथ नहीं मिला. और इस बात को दिल कड़ा करके इमरान खान को कबूल करना भी पड़ा. तभी तो जब इमरान इस्लामाबाद लौटे तो उन्हें मानना पड़ा कि अभी हमारा बेहद बुरा दौर चल रहा है.

जब हर तरह से इमरान खान हार गए तो वो अब कश्मीर को लेकर वैश्विक प्रोपगैंडा फैलाने के लिए टीवी चैनल का सहारा लेना चाह रहे हैं. न्यूयॉर्क में इस बाबत इमरान खान ने तुर्की के राष्ट्रपति और मलेशिया के प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी. इमरान ने ट्वीट कर कहा कि तीनों मुल्कों ने बीबीसी की तर्ज पर अंग्रेजी भाषा का टीवी न्यूज चैनल खोलने का फैसला लिया है.

ऐसा पहली बार नहीं है कि इमरान खान ने पहली बार ऐसी तिकड़मबाजी की आजमाइश ही हो. हर मौके पर पाकिस्तानी पीएम इमरान अपने बयानबाजी और हरकतों से अपनी बेइज़्ज़ती कराने का काम करते हैं.