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लेडी गागाः जिन पर भारत में हुआ था विवाद, आज उसी भारतीयता की हुईं कायल

अमेरिकी सिंगर लेडी गागा ने रविवार को अपने ट्विटर हैंडल पर एक संस्कृत श्लोक ट्वीट कर दुनिया भर को आश्चर्य में डाल दिया. उन्होंने लिखा लोकाः समस्ताः सुखिनो भवंतु और इस तरह उन्होंने विश्वभर के लोगों की सुख की कामना की. भारतीय संस्कृति और इसके आध्यात्म की यह खूबी है कि यह शांति चाहने वाली हर शख्सियत को पहली बार में ही अपनी ओर खींच लाता है. लेडी गागा से पहले भी कई विदेशी भारतीय संस्कृति के कायल हो चुके हैं.

लेडी गागाः जिन पर भारत में हुआ था विवाद, आज उसी भारतीयता की हुईं कायल

नई दिल्लीः संगीत खुद में एक साधना है और जब इसके व्यापक मूल को खोजने की कोशिश की जाती है तो यह दिव्य ज्ञान भारतीयता की सनातनी परंपरा में ही मिलता है. इसी संगीत ने मीरा को अमर बना दिया, 
तन्ना को तानसेन बना दिया और आज भी घरती के कोने-कोने में अलग-अलग सुरों में इसकी ही धुन गूंज रही है. ऐसे में लाजिमी है कि संगीत को चाहने वाले आध्यात्म की ओर बढ़ चले. रविवार को लेडी गागा ने जिस तरह अपने ट्विटर हैंडल पर 
संस्कृत का श्लोक (लोकाः समस्ताः सुखिनो भवंतु) ट्वीट किया, वह इस बात को और पुख्ता करता है कि भारतीय आध्यात्म ही वह तरीका है जो युद्ध के मुहाने पर खड़े विश्व को शांति दिला सकता है.  

विवादों में आ चुकी हैं लेडी गागा
भारतीयता को इतने खुले दिल से अपनाने वाली अमेरिकी सिंगर गागा का इससे पहले भारतीयता से विवादों वाला नाता रहा है. दरअसल साल 2013 की फरवरी में बुद्धा इंटरनेशनल सर्किट में फार्मूला-1 की क्लोजिंग सेरेमनी थी. इस प्रोग्राम में
लेडी गागा अपनी धमाकेदार और खूबसूरत आवाज का जादू बिखरने आईं थीं. हालांकि वह काफी संभल-संभल कर कदम रख रही थीं लेकिन कॉसर्ट के दौरान एक गलती से बवाल मच गया. गागा ने जिस माइक का इस्तेमाल किया था वह किसी 
सेक्स टॉय जैसा लग रहा था. भारत समेत पूरी दुनिया में इसकी आलोचना हुई. भारतीय धरती पर हुए अपने इस विवाद गागा ने केवल अपनी अदा बताया था. लेकिन आज छह साल बाद वह जब शांति की कामना करते हुए ट्वीट कर रही हैं तो यह 
भारतीयता और संस्कृति को लेकर उनके बदले हुए विचारों का नतीजा है. यह उस तथ्य को और मजबूत करती है कि कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी.

यहां से आया है यह संस्कृत श्लोक
लेडी गागा ने जिस श्लोक की सूक्ति को ट्वीट किया है वह अथर्ववेद के ज्ञान से निकला है. महर्षि व्यास ने चारों वेदों को विभाजित करते हुए अथर्ववेद में आयुर्वेद और योग को भी रखा. यह दोनों उपवेद संसार के सुख की कामना करते हैं.
जब योग पद्धति की शुरुआत की जाती है तो कई सूक्तियों के साथ लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु की कामना की जाती है.