करतारपुर कॉरिडोर में 'लव जेहाद'

सिखों के पवित्र धार्मिक स्थल पर दर्शन करने के बहाने एक लड़की फेसबुक पर बने पाकिस्तानी दोस्त से मिलने पहुंची, जिसके बाद वो अपने पाकिस्तानी दोस्त के साथ फैसलाबाद जाने को राजी हो गई. लेकिन, वक्त रहते...

करतारपुर कॉरिडोर में 'लव जेहाद'

नई दिल्ली: करतारपुर साहिब गुरुद्वारे के आड़ में 'लव जेहाद' का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. दरअसल, सिखों के पवित्र धार्मिक स्थल पर दर्शन के लिए जाने के बहाने से एक भारतीय सिख महिला अपने पाकिस्तानी दोस्त के पास फैसलाबाद जा रही थी. लेकिन उसे रास्ते में ही रोक लिया गया.

फेसबुक से शुरू हुई दोस्ती का अंजाम

एक सिख लड़की करतारपुर साहिब गुरुद्वारे में दर्शन करने के बहाने से अपने एक पाकिस्तानी फेसबुक दोस्त से मुलाकात करने पहुंची थी. अधिकारियों के मुताबिक 20 साल की मंजीत कौर नवंबर के आखिरी सप्ताह में करतारपुर कॉरिडोर से गुरुद्वारा साहिब पहुंच गई थी. दरअसल, वो शख्स जिससे वो फेसबुक के जरिए संपर्क में थी, उससे वहां उसने मुलाकात की.

फैसलाबाद जाने की कोशिश

गुरुद्वारे में मंजीत ने अपने पाकिस्तानी फेसबुक दोस्त से मुलाकात की और फिर 'खिचड़ी पकाई' गई. करतारपुर साहिब से वो लड़की पाकिस्तानी महिला का परमिट दिखाकर अपने फेसबुक मित्र के साथ फैसलाबाद जाने लगी. वो दोनों वहां से पाकिस्तान के फैसलाबाद के लिए रवाना भी हो गए, लेकिन रास्ते में भी सुरक्षाबलों ने उन्हें रोक लिया.

दरअसल, करतारपुर साहिब में दर्शन करने के लिए जाने वाले भारतीय श्रद्धालु सिर्फ गुरुद्वारे तक जा सकते हैं, लेकिन पाकिस्तान के अन्य इलाकों में नहीं जा सकते हैं. इवैक्यू ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड के एक अधिकारी ने इस बात की जानकारी दी और बताया कि 'एक भारतीय सिख लड़की ने करतारपुर कॉरिडोर खुलने के बाद से इस सीमित क्षेत्र से बाहर निकलने की कोशिश की है'

लिहाजा अधिकारी ने मंजीत को पाकिस्तान के उस शख्से के साथ नहीं जाने दिया, जिसके साथ वो फैसलाबाद जाना चाहती थी. आपको बता दें कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने कहा है कि वो लड़की पंजाब के अमृतसर की है, जबकि भारतीय मीडिया ये दावा कर रही है कि मंजीत हरियाणा के रोहतक की रहने वाली है.

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सुरक्षाबलों ने कई घंटे पूछताछ के बाद दोनों को घर जाने दिया लेकिन, इस घटना से ये समझना मुश्किल नहीं है कि फेसबुक के जरिए पाकिस्तान से लव जेहाद का गंदा खेल खेला जा रहा है. और भारतीय महिलाओं को इसका शिकार बनाने की कोशिश की जा रही है. तभी तो करतारपुर साहिब के जरिए मंजीत कौर को पाकिस्तान ले जाने की कोशिश हुई. लेकिन अगर मंजीत पाकिस्तान चली जाती तो उसके लिए वहां रह पाना कितना मुश्किल होता, इसका अंदाजा पाकिस्तान की हालत देखकर लगाया जा सकता है.

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