close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

शिवसेना के लिए इसबार का चुनाव क्यों है सबसे खास? जानिए तीन बड़ी वजह

शिवसेना के इतिहास में ये पहली दफा देखा जा रहा है कि ठाकरे परिवार का कोई सदस्य चुनावी मैदान में अपनी ताकत दिखाने के लिए जंग लड़ने जा रहा है. खानदान की इस परंपरा तोड़कर आदित्य ठाकरे विधानसभा चुनाव लड़ने के संकेत दे रहे हैं.

शिवसेना के लिए इसबार का चुनाव क्यों है सबसे खास? जानिए तीन बड़ी वजह
Photo Courtesy: Twitter

नई दिल्ली: महाराष्ट्र में होने वाले विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है. हर कोई अपनी ताकत झोंकने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है. सभी सियासी पार्टियां इस चुनाव में जीत का परचम फहराने के लिए हर संभव कोशिश करने पर उतारू हैं. लेकिन इस बार का चुनाव शिवसेना के लिए बेहद ही अहम हो गया है. इसके पीछे की वैसे तो कई वजह हैं, लेकिन तीन सबसे बड़ी वजह आपको जरूर जाननी चाहिए.

1). महाराष्ट्र की सियासत में शिवसेना का सबसे बड़ा दांव

आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 के लिए शिवसेना ने ऐतिहासिक और सबसे बड़ा दांव खेला है. करीब छह दशक के सियासी इतिहास में ठाकरे परिवार का कोई सदस्य पहली बार चुनावी मैदान में अपने नाम पर जनता से वोट मांग रहा है. पहली बार ठाकरे खानदान का सदस्य शिवसेना से विधानसभा का चुनाव लड़ने जा रहा है. और वो नाम ठाकरे परिवार के तीसरी पीढ़ी के प्रतिनिधि आदित्य ठाकरे का है. जो राजनीति में शिरकत करने जा रहे हैं और वो अपने खानदान के ऐसे पहले सदस्य हैं. आदित्य ठाकरे फिलहाल शिवसेना की युवा शाखा, युवा सेना के प्रमुख हैं. ऐसे में ये चुनाव ना सिर्फ आदित्य के लिए बल्कि पूरी शिवसेना के लिए बहुत बड़ी चुनौती है. निश्चित तौर पर चुनाव मैदान में आदित्य के सिर पर जीत का सेहरा बांधने के लिए पार्टी जमीन-आसमान एक कर देगी.

2). आदित्य ठाकरे तोड़ेंगे खानदान की परंपरा 

शिवसेना ने पार्टी मुखिया उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे को चुनावी रण में उतारने का बिगुल फूंक दिया है. आदित्य ठाकरे मुंबई में वर्ली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे. हालांकि शिवसेना की ओर से अभी इसका औपचारिक ऐलान नहीं किया गया है. लेकिन ये कदम खानदान की परंपरा को तोड़ने से वाले कदम से कतई कम नहीं है. ठाकरे परिवार के किसी भी सदस्य ने शिवसेना से कोई भी चुनाव नहीं लड़ा. ऐसे में माना जा रहा है कि वर्ली में होने वाली शिवसेना की विजय संकल्प रैली में उद्धव ठाकरे अपने बेटे आदित्य ठाकरे की दावदेरी का ऐलान करेंगे. चुनावी मैदान में उतरने की औपचारिक घोषणा अभी फिलहाल तो नहीं हुई, लेकिन आदित्य एक के बाद एक ताबड़तोड़ रैलियां कर रहे हैं. सियासी गलियारों में ये ख़बर हवा की तरह फैल चुकी है कि आदित्य इस बार वर्ली से अपनी दावेदारी पेश कर सकते हैं. ज़ाहिर है, दक्षिण मुंबई की वर्ली विधानसभा सीट से फ़िलहाल शिवसेना के ही सुनील शिंदे विधायक हैं. 2014 में शिंदे 23 हजार से ज़्यादा वोट से जीते थे. इतना ही नहीं 2014 में शिंदे के खिलाफ चुनाव लड़े एनसीपी उम्मीदवार सचिन अहीर भी शिवसेना का दामन थाम चुके है. ऐसे में वर्ली विधानसभा सीट शिवसेना के लिए बेहद सुरक्षित मानी जा रही है. लेकिन चुनावी रणभूमि पर होने वाले युद्ध के नतीजे के बारे में कोई भी कयास पहले लगा पाना बेहद ही मुश्किल है. शिवसेना के लिए ये चुनाव इसलिए भी खास है क्योंकि इस बार ठाकरे परिवार की सालों पुरानी परंपरा टूटने वाली है. और खुद आदित्य ठाकरे मैदान में खड़े होंगे.

3). नया महाराष्ट्र के नारे और उसके मायने

अपने एक चुनावी रैली में शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने नया महाराष्ट्र बनाने का नारा दिया. उन्होंने ये साफ किया कि हमें सारे भेदभाव दूर करने हैं. भाषा का भेदभाव, सामाजिक भेदभाव, धर्म का भेदभाव, जात-पात के भेदभाव... सारे भेदभाव दूर करने है. एक महाराष्ट्र बनाना है, नया महाराष्ट्र बनाना है. ऐसे में नया महाराष्ट्र बनाने के साथ-साथ ठाकरे परिवार की नई पॉलिसी भी तैयार होती दिखाई दे रही है. शिवसेना के इतिहास के पन्नों पर ये चुनाव काफी बड़े अक्षरों से दर्ज किया जाएगा. क्योंकि, इस बार सबसे बड़े पासे की आजमाइश होने जा रही है. माना जा रहा है कि आदित्य ठाकरे 3 अक्टूबर को नामांकन दाखिल कर सकते हैं. क्योंकि 4 अक्टूबर नामांकन की आखिरी तारीख है. हालांकि 25 साल के आदित्य ठाकरे की उम्मीदवारी के औपचारिक ऐलान से पहले ही शिवसेना ने विधानसभा चुनाव में उन्हे अपना चेहरा बनाने के लिए पूरी तरह कमर कस ली है. पार्टी ने आदित्य ठाकरे को लेकर एक गाना रिलीज किया है. इस गाने में नया महाराष्ट्र बनाने और महाराष्ट्र को आदित्य ठाकरे के रंग में रंगने की संकल्प है. इससे समझना और भी आसान हो जाता है कि इस बार का महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव शिवसेना के लिए सबसे ज्यादा खास है.

आदित्य ठाकरे को चुनावी रण में उतराने के पीछे भी शिवसेना की एक खास योजना है. माना जा रहा है कि शिवसेना की नजरें उपमुख्यमंत्री की कुर्सी पर है. अगर महाराष्ट्र में भगवा गठबंधन की सत्ता में वापसी हुई तो बीजेपी की ओर से देवेंद्र फड़णवीस मुख्यमंत्री और जूनियर ठाकरे उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं. लेकिन इन सभी बातों पर फाइनल मुहर तो चुनावी नतीजे आने के बाद ही लग पाएगी.