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मंत्री सदानंद गौड़ा बोले, 'एकल उपयोग प्लास्टिक पर जल्द ही अंतिम रिपोर्ट सौंपेगी समिति'

मंत्री ने बताया कि इस मुद्दे पर गठित विशेषज्ञ समिति की अंतिम रिपोर्ट 30 सितंबर या एक अक्टूबर तक तैयार हो जाएगी और वह इसपर पर्यावरण मंत्रालय के साथ विस्तृत चर्चा करेंगे ताकि उचित योजना बनाई जा सके.

मंत्री सदानंद गौड़ा बोले, 'एकल उपयोग प्लास्टिक पर जल्द ही अंतिम रिपोर्ट सौंपेगी समिति'
फोटो साभार: ANI

नई दिल्ली: केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने गुरुवार को कहा कि एक बार इस्तेमाल किए जाने वाले प्लास्टिक पर प्रतिबंध के मुद्दे पर गौर करने के लिए गठित विशेषज्ञ समिति जल्द ही अपनी अंतिम रिपोर्ट देगी.

उन्होंने बताया कि समिति ने अंतरिम रिपोर्ट सौंप दी है.

मंत्री ने बताया कि इस मुद्दे पर गठित विशेषज्ञ समिति की अंतिम रिपोर्ट 30 सितंबर या एक अक्टूबर तक तैयार हो जाएगी और वह इसपर पर्यावरण मंत्रालय के साथ विस्तृत चर्चा करेंगे ताकि उचित योजना बनाई जा सके.

सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लास्टिक्स इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी (सिपेट) में छात्रों के लिए बने छात्रावास का उद्घाटन करने के बाद गौड़ा ने कहा कि एकल उपयोग प्लास्टिक हर जगह बिखरे रहते हैं और पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं, इसलिए इसे प्रतिबंधित करने की जरूरत है. लेकिन इसका अभिप्राय यह नहीं है कि पॉलिमर या प्लास्टिक को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा.

गौड़ा ने कहा कि पॉलिमर उद्योग हमारे दैनिक इस्तेमाल के प्रत्येक क्षेत्र में है. इसलिए प्लास्टिक का इस्तेमाल पूरी तरह से प्रतिबंधित करना संभव नहीं है, लेकिन एकल उपयोग प्लास्टिक के इस्तेमाल के प्रति जागरूकता पैदा किया जाना चाहिए ताकि इन्हें इधर-उधर नहीं फेंका जाए.

उन्होंने कहा कि एकल उपयोग प्लास्टिक के इस्तेमाल और प्रतिबंध से पड़ने वाले असर का आकलन करने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित की गई है जिसमें नीति निर्माता, उद्योगपतियों, शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं के प्रतिनिधि शामिल हैं.

मंत्री ने कहा, ''समिति ने मसौदा रिपोर्ट पहले ही प्रस्तुत कर दी है और मेरे समक्ष एक प्रस्तुति दी है. मैं दो अक्टूबर से पहले अंतिम रिपोर्ट प्राप्त करने जा रहा हूं ताकि हम पूरे समाज को एक नया विचार दे सकें कि वास्तव में एकल उपयोग वाले प्लास्टिक पर प्रतिबंध क्या है.''

उन्होंने कहा, ''दो अक्टूबर को, हम एकल-उपयोग प्लास्टिक के खिलाफ एक युद्ध छेड़ेंगे, और हम यह देखना चाहते हैं कि पूरा देश इसे एक आंदोलन के रूप में ले.''

मंत्री ने सिपेट को पुनर्चक्रण, लागत प्रभावी सामग्री विकास, पर्यावरण के अनुकूल वैकल्पिक सामग्री विकास के लिए नई प्रौद्योगिकी में अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) की पहल करने की सलाह दी.

गौड़ा ने कहा कि देश में सेट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लास्टिक इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी (सिपेट) के 36 केंद्र हैं और पांच और केंद्र स्थापित करने की प्रक्रिया जारी है.