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केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, दिल्ली की 1197 कॉलोनियां होंगी नियमित

हरियाणा-महाराष्ट्र विधानसभा की चुनावी जंग के बाद अब राजनीतिक दलों के कदम दिल्ली की राजगद्दी की ओर मुड़ गए हैं. सभी ने आने वाले दिल्ली विधानसभा चुनावों की तैयारियां शुरू कर दी हैं. एक तरफ जहां अलग-अलग राजनीतिक दल कार्यकर्ताओं को संगठित करने में जुट गए हैं तो वहीं कुछ चुनावी मुद्दों को उठाकर उन्हें भुनाना शुरू कर चुके हैं. 

केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, दिल्ली की 1197 कॉलोनियां होंगी नियमित

नई दिल्लीः दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी और भाजपा में एक अलग ही होड़ शुरू हो चुकी है. दिल्ली की गद्दी पर काबिज आम आदमी पार्टी चुनाव नजदीक आते-आते कई लुभावनी योजनाएं लेकर आ रही है तो दूसरी ओर केंद्र में बैठी भाजपा सरकार भी कई तरह की योजनाओं का दावा कर रही है. मोदी सरकार ने बुधवार को बड़ा फैसला लेते हुए कहा है कि वह दिल्ली की अनियमित कॉलोनियों को जल्द ही नियमित करेगी. 

बड़ी राहत देने की कोशिश
मोदी सरकार अगर अनियमित कॉ़लोनियों को नियमित करती है तो यह लाखों दिल्ली वासियों के लिए राहत की बात होगी. दिवाली से ठीक पहले केंद्र का इतना बड़ा फैसला लोगों के लिए दिवाली गिफ्ट जैसा होगा. दिल्ली में 1197 अनियमित कॉलोनियां हैं, जिनमें तकरीबन 40 लाख लोग रहते हैं. कॉलोनियों को नियमित करने के दौरान सर्कल रेट का कुछ प्रतिशत रेग्यूलरेजाइशेन फीस (नियमतीकरण शुल्क) के तौर पर लिया जाएगा, हालांकि अभी यह प्रतिशत तय नहीं किया गया है. दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक पहले केंद्र सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले को सियासी तौर पर मास्टर स्ट्रोक कहा जा रहा है. सूत्रों के अनुसार सैनिक फॉर्म, महेंद्रु एन्क्लेव, अनंतराम डेयरी को नियमित नहीं किया जाएगा. यह अनियमित कॉलोनियां सरकारी, खेती व ग्रामसभा की जमीन पर बनी हुई हैं. सरकार के इस फैसले को राजनीतिक पंडित मास्टर स्ट्रोक बता रहे हैं. केजरीवाल सरकार ने इससे पहले ही यहां विकास कार्यों की शुरुआत कर दी थी. 

दिल्ली सरकार ने ट्रैफिक सुधारने का किया दावा
दूसरी ओर मंगलवार को दिल्ली सरकार ने राज्य की सड़कें सुधारने और ट्रैफिक की समस्या से निपटने के लिए बड़ी योजना की घोषणा की है. आप सरकार का दावा है कि उनकी योजना से जहां जाम की समस्या खत्म होगी वहीं सड़क हादसे भी खत्म जाएंगे. उन्होंने यूरोप की सड़कों जैसी सड़क दिखने का दावा करते हुए कहा कि हमारी कोशिश है कि दिल्ली की सड़कों को विश्वस्तरीय बनाया जाए और इसके लिए इसे फिर से डिजाइन किया जाएगा. अभी ट्रायल के तौर पर 9 सड़कों को रि-डिजाइन किया जा रहा है, लगभग 45 किलोमीटर की होंगी. इन सड़कों से बॉटल नेक्स खत्म किए जाएंगे और अधिक से अधिक स्पेस का इस्तेमाल किया जाएगा. फुटपाथ भी काफी चौड़े बनाए जाएंगे.  

क्यों खास है दिल्ली की जंग
केंद्र शासित प्रदेश होने के कारण दिल्ली के सभी अधिकार मुख्यमंत्री के पास नहीं हैं. उनके पास बजट और योजनाओं को लागू करने का तो अधिकार है, लेकिन राज्य की पुलिस केंद्रीय गृहमंत्रालय के अधीन है. इसके साथ ही भूमि सुधार और भूमि के नियमित करने को लेकर भी जो अधिकार हैं वह दिल्ली व केंद्र सरकार के बीच बंटे हुए हैं. यही वजह है कि बीते सालों में दिल्ली का असली मालिक कौन, इसे लेकर केंद्र व आप सरकार के बीच काफी जंग रही है. ठीक यही टकराव मेट्रो के किराए में वृद्धि के दौरान भी मिला. हालांकि अब चुनाव दहलीज पर खड़े हैं तो दोनों ही सरकारों की जुबानी जंग बंद है. अब दोनों ही अपने-अपने अधिकार क्षेत्रों के अनुसार योजनाएं लागू कर रहे हैं. हालांकि किसकी योजना उसके लिए दिल्ली के तख्त का रास्ता बनेगी यह तो दिल्ली वाले ही बताएंगे.