Israel offer Heron Mk II India: भारत अपनी हवाई ताकत के साथ-साथ निगरानी क्षमता को भी बरकरार रखना चाहती है. यही वजह है कि हाल ही में भारत ने, MALE UAV के लिए टेंडर जारी किया था. जिसमें इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ने एक तगड़ा ऑफर दिया है. इजरायली कंपनी ने अपने ऑफर में हेरॉन Mk II को पेश किया है. वहीं रिपोर्ट के मुताबिक, हेरॉन Mk II ड्रोन को भारत के तीनों सशस्त्र बल (थलसेना, वायुसेना और नौसेना) भी खरीदना चाहते हैं, जिससे यह टेंडर काफी बड़ा और महत्वपूर्ण हो गया है.
आपको जानकारी के लिए बता दें, IAI का हेरॉन प्लेटफॉर्म दशकों से भारतीय सेना की जासूसी और निगरानी जरूरतों को पूरा करता रहा है, खासकर लद्दाख जैसी ऊंचाई वाली सीमाओं पर. यह नया Mk II वर्जन पिछले हेरॉन ड्रोन से कहीं ज्यादा ताकतवर है.
टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का भी वादा
वहीं, इस बार IAI की रणनीति भी साफ है. वह भारत के मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के अभियान को साधते हुए यह डील जीतना चाहता है. IAI ने वादा किया है कि वह भारत में ही हेरॉन Mk II की असेंबली शुरू करेगा और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी करेगा, ताकि भारतीय कंपनियां भविष्य में इन ड्रोन के पुर्जे बना सकें और मरम्मत कर सकें. जहां IAF और अन्य सेनाओं का हेरॉन के साथ पहले से ही अच्छा अनुभव रहा है, जो IAI को इस रेस में मजबूत दावेदार बनाता है.
क्या है हेरॉन Mk II की खासियत?
यह नया ड्रोन पुराने संस्करणों से कहीं ज्यादा आधुनिक और सक्षम है. हेरॉन Mk II 45,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ सकता है और 40 घंटों से ज्यादा समय तक हवा में रह सकता है. यह इसे सीमाओं पर लगातार निगरानी के लिए एकदम सही बनाता है.
इतना ही नहीं, इसमें एडवांस रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर लगे हैं, जो दुश्मन की हर एक्टिविटी को बहुत दूर से ही पहचान सकते हैं.
साथ ही, Mk II संस्करण में हथियार ले जाने की क्षमता भी है. हालांकि, भारत मुख्य रूप से इसे निगरानी के लिए खरीद रहा है, लेकिन जरूरत पड़ने पर इसे हमलावर ड्रोन में भी बदला जा सकता है.
IAI का असेंबली का ऑफर
इजरायली कंपनी द्वारा ToT और लोकल असेंबली का वादा IAI के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है. IAI का यह ऑफर भारतीय कंपनियों को एडवांस एविएशन टेक्नोलॉजी सीखने का मौका देगा. इससे भारत में UAV इकोसिस्टम मजबूत होगा. अगर ड्रोन के पुर्जों की असेंबली भारत में होती है, तो उनकी मरम्मत और स्पेयर पार्ट्स की सप्लाई बहुत तेज और सस्ती हो जाएगी.
IAF ने पहले ही हेरॉन के पिछले मॉडल का कठिन परिस्थितियों में इस्तेमाल किया है और उसे सफल पाया है. IAI को उम्मीद है कि यह विश्वसनीयता उन्हें यह बड़ा टेंडर जीतने में मदद करेगी.
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