रंजन गोगोई के बाद देश के नए चीफ जस्टिस शरद अरविंद बोबडे के 7 बड़े फैसले

सुप्रीम कोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे ने अपने पद की शपथ ले ली है. उन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शपथ दिलाई, इस बीच आपको उनके 7 बड़े फैसले से रूबरू करवाते हैं. क्योंकि अयोध्या पर ऐतिहासिक फैसला सुनााने वाले CJI रंजन गोगोई रिटायर हो गए हैं.

रंजन गोगोई के बाद देश के नए चीफ जस्टिस शरद अरविंद बोबडे के 7 बड़े फैसले

नई दिल्ली: जस्टिस शरद अरविंद बोबडे ने देश के 47वें मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ ले ली है. 17 नवंबर को जस्टिस रंजन गोगोई का कार्यकाल खत्म हो गया है. अब न्यायाधीश बोबडे ने उनकी जगह ले ली है. लेकिन जस्टिस बोबडे और रंजन गोगोई के काम करने के तरीके में खासा अंतर है. माना जाता है कि जस्टिस गोगोई अपनी सख्त छवि के साथ-साथ कानूनी बिंदुवार तरीके से फैसले किया करते थे. बोबडे वकीलों के परिवार से आते हैं.

जस्टिस बोबडे का इतिहास

परंपरा के अनुसार जस्टिस शरद अरविंद बोबडे सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बन चुके हैं, लेकिन बोबडे का कानूनी सफर इतना साधारण नहीं रहा है. नए सीजेआई महाराष्ट्र के नागपुर जिले के रहने वाले हैं, जिनका जन्म 24 अप्रैल 1956 को हुआ था. लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि जस्टिस बोबडे का पारिवारिक इतिहास वकीलों का रहा है. उनके पिता महाराष्ट्र के एडवोकेट जनरल यानी महाधिवक्ता रह चुके हैं. जबकि उनके बड़े भाई भी सुप्रीम कोर्ट के मशहूर वकील थे. उनके भाई स्व. विनोद अरविंद बोबडे ने कई बड़े बड़े केस लड़े और उन्हें जीते. लेकिन परिवार के पहले सदस्य एसए बोबडे ने वकालत की नहीं बल्कि न्याय का फैसला करने वाले जस्टिस की कुर्सी पर बैठे.

उन्होंने नागपुर यूनिवर्सिटी से बीए और एलएलबी की डिग्री हासिल की और साल 1978 में पहली बार बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र में इनरोल्ड हुए. जिसके बाद साल 2000 के मार्च महीने में वो अपर न्यायाधीश के रूप में बॉम्बे हाईकोर्ट खंपीठ के सदस्य नियुक्त किए गए. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट आने पर पहले बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस का पदभार भी संभाला. जिसके बाद वो साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट के जज नियुक्त किए गए.

अब आपको देश के नए चीफ जस्टिस के 7 बड़े फैसले से रूबरू करवाते हैं, जिसके बारे में काफी कम लोगों को ही पूरी जानकारी होगी.

नए चीफ जस्टिस के 7 बड़े फैसले

फैसला नंबर 1

ऐतिहासिक फैसला देने वाले पीठ के सदस्य

जस्टिस शरद अरविंद बोबडे देश के सबसे पुराने केस पर ऐतिहासिक फैसला सुनाने वाले पीठ के सदस्य थे. हम बात अयोध्या में विवादित जमीन पर राम मंदिर के निर्माण को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र कर रहे हैं. जिसमें पांच सदस्यीय पीठ के एक सदस्य नए CJI भी थे.

फैसला नंबर 2

आधार कार्ड पर फैसला

देश के नए सीजेआई शरद अरविंद बोबडे उस पीठ के हिस्सा थे, जिसने आधार कार्ड पर बड़ा फैसला सुनाते हुए ये आदेश दिया था कि आधार कार्ड न रखने वाले भारत के नागरिकों को सरकारी फायदे से वंचित नहीं किया जा सकता है. तीन सदस्यों की इस पीठ में जस्टिस बोबड़े के अलावा जस्टिस चेलमेश्वर और जस्टिस नागप्पन भी थे.

फैसला नंबर 3

भ्रूण पर याचिका की खारिज

चीफ जस्टिस शरद अरविंद बोबडे साल 2017 में गठित उस बेंच के सदस्य थे, जिसने एक महिला के एबॉर्शन वाली याचिका को खारिज कर दी थी. दरअसल, डाउन संड्रोम से पीड़ित एक महिला ने मेडिकल बोर्ड के प्रस्ताव के आधार पर अपने गर्म में पल रहे भ्रूण को खत्म करने के लिए एक अपील  याचिका दाखिल की थी. जिसके बाद जस्टिस बोबडे और एल. नागेश्वर राव की दो सदस्यीय पीठ ने ये कहकर इस मांग को खारिज कर दिया था, कि तब तक वो नवजात शिशु 26 हफ्ते का हो गया है.

फैसला नंबर 4

दिल्ली NCR में पटाखों पर प्रतिबंध

साल 2016 में सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ ने तीन विद्यार्थियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली एनसीआई में पटाखे की बिक्री पर रोक लगा दी थी.  इस फैसले को सुनाने वाले बेंच में नए CJI एसए बोबडे के अलावा जस्टिस टीएस ठाकुर और एके सिकरी भी शामिल थे.

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फैसला नंबर 5

पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई पर आरोप

देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई पर लगे यौन उत्पीड़न के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक इन हाउस पैनल बनाया था. जिसके हिस्सा जस्टिस बोबडे भी थे. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की एक महिला अधिकारी ने तत्कालीन सीजेआई रंजन गोगोई पर गंभीर आरोप लगाए थे. जिसकी जांच तीन सदस्यीय पैनल ने की, जिसमें गोगोई को क्लीन चिट मिल गई. इस पैनल में जस्टिस बोबडे के अलावा न्यायाधीश एन वी रमन और इंदिरा बनर्जी शामिल थे.

फैसला नंबर 6

कर्नाटक के नाटक का समाधान

साल 2018 में हुए कर्नाटक विधानसभा चुनाव में सियासी नाटक शुरू हो गया था. वहां किसी को बहुमत नहीं मिला, जिसके बाद राज्यपाल ने बीएस येदियुरप्पा को सीएम पद की शपथ के लिए बुलाया था. इसके खिलाफ विरोधी पार्टी कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. रात के 2 बजजे सुनवाई शुरू हुआ और फैसला येदियुरप्पा के पक्ष में आया था. इस मामले में फैसला देने वाली पीठ में जस्टिस एसए बोबडे भी शामिल थे.

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फैसला नंबर 7

CJI दीपक मिश्रा से मतभेद का निपटारा

इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ था कि सुप्रीम कोर्ट की अंदरूनी खटास बाहर निकलकर आ गई थी. उस वक्त सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्ययायाधीश दीपक मिश्रा हुआ करते थे. जिस दौरान आपसी मतभेदों के चलते सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया. और अंदरूनी कलह पहली बार कोर्ट के बाहर आ गई. साल 2018 के जनवरी माह में, जस्टिस बोबडे ने जस्टिस गोगोई, जे चेलमेश्वर, मदन लोकुर और कुरियन जोसेफ के बीच मतभेदों को निपटाने में अहम भूमिका निभाई थी. जो सुप्रीम कोर्ट के लिए एक अहम किरदार था.

18 नवंबर को CJI नियुक्त किए गए जस्टिस शरद अरविंद बोबडे का कार्यकाल 23 अप्रैल 2021 तक होगा. जस्टिस शरद अरविंद बोबड़े चीफ जस्टिस गोगोई के बाद देश के 47वें चीफ जस्टिस के रूप में शपथ लिए हैं. उनका कार्यकाल 1 साल 5 महीने तक का रहेगा.