लखनऊ में शुरू हुआ 7वां राष्ट्रमंडल संसदीय संघ सम्मेलन

अगले दो दिनों तक यूपी की राजधानी लखनऊ में 7वें कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन इंडिया रीजन सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है. गुरुवार को लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राष्ट्रमंडल संसदीय संघ भारत क्षेत्र के सातवें सम्मेलन का उदघाटन किया.

लखनऊ में शुरू हुआ 7वां राष्ट्रमंडल संसदीय संघ सम्मेलन

लखनऊ: लखनऊ में 7वें राष्ट्रमंडल संसदीय संघ सम्मेलन का आयोजन किया गया है. यूपी विधानसभा के अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित ने स्वागत भाषण से सम्मेलन का आगाज किया. इसके बाद उत्तर प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी ने सदन को संबोधित किया और दूसरे राज्यों से आये विधानमंडल दल के सदस्यों का स्वागत किया. इस मौके पर रामगोविंद चौधरी ने कहा कि मैं इस बात से सहमत हूं कि सदन की कार्रवाई में अवरोध नहीं होना चाहिए, लेकिन साथ ही सरकारों को भी चाहिए कि सदन के सदस्यों को उनके उत्तर से परिपूर्ण करें. 

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राष्ट्रमंडल संसदीय संघ भारत क्षेत्र के सातवें सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, विधान सभा के अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित, उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति, रमेश यादव के साथ ही तमाम संसद सदस्य, उत्तर प्रदेश विधानमंडल के वर्तमान और पूर्व सदस्य तथा अन्य विशिष्ट लोग भी उदघाटन समारोह में शामिल हुए. साथ ही सीपीए के ऑस्ट्रेलिया क्षेत्र और साउथ ईस्ट एशिया क्षेत्र के क्षेत्रीय प्रतिनिधि भी सीपीए भारत क्षेत्र सम्मेलन में भाग लिया.

इस दो दिवसीय सम्मेलन में पूर्ण सत्रों के दौरान दो मुख्य विषयों पर चर्चा की जाएगी-

1. बजट प्रस्तावों की संवीक्षा के लिए जनप्रतिनिधियों की क्षमता बढ़ाना.
2. जन प्रतिनिधियों का ध्यान विधायी कार्यों की ओर बढ़ाना.

दो विषयों पर की जाएगी विशेष चर्चा
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश पहले विषय पर चर्चा के दौरान मुख्य भाषण देंगे. जबकि केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी दूसरे विषय पर मुख्य भाषण देंगे. पहले विषय यानी ‘बजट प्रस्तावों की संवीक्षा के लिए जनप्रतिनिधियों की क्षमता बढ़ाना’ से संबंध रखता है सम्मेलन में दूसरा विषय यानी ‘जन प्रतिनिधियों का ध्यान विधायी कार्यों की ओर बढ़ाना ‘ पर विचार किया जाना है, वह भी आज के समय में बहुत प्रासंगिक है .ऐसा महसूस किया गया है कि जनप्रतिनिधियों की क्षमता बढ़ाना और विधायी कार्यों की ओर उनका ध्यान बढ़ाना संसदीय लोकतन्त्र की सफलता के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. पहली बार जनप्रतिनिधि के रूप में निर्वाचित हुए सदस्यों को संसदीय प्रक्रियाओं, पद्धतियों, परिपाटियों, आचरण और परम्पराओं से परिचित कराने के लिए विधायी जानकारी दिया जाना बहुत जरूरी है. पारित किए जाने वाले कानूनों के बारे में ब्रीफिंग सत्र विधायी कार्यों की ओर जनप्रतिनिधियों का ध्यान बढ़ाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं. निरंतर बदल रही लोकनीति के सामने आने वाली चुनौतियों का सामना करने की जनप्रतिनिधियों की योग्यता बहुत हद तक आधिकारिक और विश्वसनीय जानकारी की उपलब्धता पर निर्भर करती है. जानकार और सशक्त जनप्रतिनिधि अपने निर्वाचनक्षेत्रों की जरूरतों और लोगों की इच्छाओं से अधिक परिचित होते हैं और विधानमंडलों में ये मामले उठाकर इनका समाधान कर सकते हैं.

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क्या है सीपीए?
राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) की उन राष्ट्रमंडल देशों के विधानमंडलों में 180 से अधिक शाखाएं हैं, जहां संसदीय लोकतंत्र है. ये सभी शाखाएं भौगौलिक रूप से नौ राष्ट्रमंडल क्षेत्रों में बंटी हैं, सीपीए भारत क्षेत्र, जो पहले सीपीए एशिया क्षेत्र का भाग था, 7 सितंबर 2004 से एक स्वतंत्र क्षेत्र बन गया. सीपीए भारत क्षेत्र में भारत केंद्र शाखा (भारत की संसद) और 30 राज्य/संघ राज्य क्षेत्र शाखाएं हैं. सीपीए भारत क्षेत्र के ऐसे सम्मेलनों का आयोजन दो वर्ष में एक बार किया जाता है और इसका छठा सम्मेलन वर्ष 2017 में पटना में हुआ था.