JNU में स्वामी विवेकानंद का अपमान, 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' के पाप का एक और नजारा!

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में एक बार फिर शर्मसार कर देने वाली करतूत सामने आई है. जहां शिकागो की धर्म संसद में हिंदू धर्म का परचम लहराने वाले महापुरुष स्वामी विवेकानंद की मूर्ति के साथ जेएनयू में छेड़छाड़ की कोशिश की गई.

JNU में स्वामी विवेकानंद का अपमान, 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' के पाप का एक और नजारा!

नई दिल्ली: देश की नामचीन जवाहर लाल यूनिवर्सिटी आजकल पढ़ाई के लिए कम विवादों के लिए ज्यादा चर्चा में है. देश विरोधी नारे लगाने की बात हो या नक्सलियों से जुड़े तार जेएनयू अक्सर गलत कारणों से ही सुर्खियां बटोरता रहा है. और अब जेएनयू में देश के महापुरुषों का अपमान भी शुरू हो गया है. शिकागो की धर्म संसद में हिंदू धर्म का परचम लहराने वाले स्वामी विवेकानंद की मूर्ति के साथ जेएनयू में छेड़छाड़ की कोशिश की गई.

भारत के सबसे बड़े आदर्श से बैर क्यों?

सवाल है कि आखिर स्वामी विवेकानंद से 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' को बैर क्यों हैं. दरअसल JNU में स्वामी विवेकानंद की मूर्ति के नीचे आपत्तिजनक शब्द लिख दिए गए. प्रतिमा के चबूतरे पर भगवा, जलेगा और Fascism Will Die जैसे शब्दों के अलावा बीजेपी के लिए अपशब्द लिखे गए. जिस कपड़े से मूर्ति को ढका गया है उसे भी फाड़ा गया. 

इस गलीज हरकत को तो देखकर हर आहत दिल से यही लफ्ज निकलेगा. और ये हरकत की गई है देश की सबसे प्रतिष्ठित मानी जाने वाली यूनिवर्सिटी जेएनयू में जेएनयू के प्रशासनिक ब्लॉक की दाई ओर 19वीं सदी के महानायक, विश्व विख्यात संत स्वामी विवेकानंद की मूर्ति स्थापित की गई है. इस मूर्ति का अनावरण होना अभी बाकी है. लेकिन उससे पहले ही तंग सोच वालों ने मूर्ति के नीचे बने चबूतरे पर लिख दिया भगवा जलेगा. बातें तो बीजेपी के खिलाफ भी लिखी गई हैं. लेकिन वो इतनी आपत्तिजनक हैं कि हम आपको ना ही बता सकते हैं. किसने ये हरकत की किसी को नहीं पता है, जेएनयू के छात्र इसकी निंदा कर रहे हैं.

देश के पैसे से पढ़ेंगे, लेकिन देश से लड़ेंगे!

साफ है कि जेएनयू में हुई इस हरकत की जिम्मेदारी लेने को कोई तैयार नहीं है. किसी को नहीं पता कि इतनी गंदी हरकत की किसने है. पर जिसने भी ये किया हो चाहे वो राइट विंग के लोग हों या लेफ्ट विंग के उन्हें विवेकानंद के बारे में जानना चाहिए. और अगर नहीं जान सकें तो उनके ये वचन जरूर सुन लें. हो सकता है कि वो अपने किए पर शर्मसार हो जाए. विवेकानंद ने कहा था.

ब्रह्माण्ड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं. वो हमीं हैं जो अपनी आंखों पर हाथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अन्धकार है.

प्रतिमा का अनावरण अभी तक नहीं किया गया है. जेएनयू प्रशासन का कहना है कि बेशर्मी के साथ स्वामी विवेकानंद की मूर्ति के नीचे अपशब्द लिखने वालों की पहचान हो गई है. दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

इस करतूत से लोगों में गुस्सा

हांलाकि बाद में इन शब्दों को प्रशासन ने मूर्ति के पास से साफ करवा दिया. छात्रों ने भी इस हरकत पर गुस्सा ज़ाहिर किया है. हालांकि वो मानते हैं कि कैंपस में छात्रों का एक छोटा गुट है जो ऐसी शरारतें कर जेएनयू को बदनाम करने की कोशिश में लगा रहता है. छात्रों का एक गुट ऐसा भी है जो मानता है कि फीस बढ़ोतरी के खिलाफ जेएनयू छात्रों के आंदोलन से ध्यान भटकाने के लिए ऐसा किया गया है. लेकिन उनका ये भी कहना है कि जैसे शब्द मूर्ति के पास लिखे गए वो गलत हैं.

भाजपा ने आरोप लगाया कि जेएनयू में देशविरोधी विचारधारा को बढ़ावा दिया जा रहा है. बीजेपी ने ये भी आरोप लगाया कि महापुरुषों का अपमान ही लेफ्ट की विचारधारा है. छात्रों के एक गुट ने स्वामी विवेकानंद के सम्मान में मूर्ति के पास दिए जलाए और फूल अर्पित कर उस जगह को शुद्ध करने की कोशिश की.

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महापुरुषों की मूर्ति के साथ छेड़छाड़ या तोड़ने की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं. अक्सर राजनीतिक मकसद के चलते महान विभूतियों की मूर्तियों को टार्गेट किया जाता है. इस साल मई में लोकसभा चुनाव में प्रचार करने कोलकाता गए बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो के दौरान बीजेपी टीएमसी कार्यकर्ता भिड़ गए. इसी बीच विद्यासागर कॉलेज में स्थापित समाज सुधारक ईश्वरचंद्र विद्यासागर की 102 साल पुरानी मूर्ति तोड़ दी गई. दोनों दलों ने एक दूसरे पर मूर्ति तोड़ने का आरोप लगाया.

2018 में त्रिपुरा में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के बाद राजधानी अगरतला से महज़ 90 किलोमीटर दूर रूसी क्रांति के नायक और लेफ्ट विचारधारा के प्रतीक व्लादिमीर लेनिन की मूर्ति को भीड़ ने जेसीबी मशीन से गिरा दिया. इसके बाद कोलकाता में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मूर्ति के साथ छेड़छाड़ की गई. मेरठ में बाबा साहब आंबेडकर की मूर्ति तोड़ दी गई. तमिलनाडू से पेरियार रामास्वामी की मूर्ति के साथ छेड़छाड़ की घटना सामने आई.