शर्मनाक: मध्यप्रदेश की एक यूनिवर्सिटी ने आजादी के नायकों को बताया आतंकी

मध्यप्रदेश में जीवाजी विश्वविद्यालय की परीक्षा में ऐसा सवाल पूछा गया जिससे बवाल हो गया. परीक्षा में आजादी के नायकों को आतंकी बताया गया. इस पर छात्र आक्रोशित हो गये हैं.

शर्मनाक: मध्यप्रदेश की एक यूनिवर्सिटी ने आजादी के नायकों को बताया आतंकी

भोपाल: मध्यप्रदेश के गुना जिले के सरकारी पीजी कॉलेज में एमए राजनीति शास्त्र के तृतीय सेमेस्टर की परीक्षा में आजादी के नायकों को आतंकवादी बताते हुए उनमें और उग्रवादियों में अंतर पूछा गया है. जीवाजी यूनिवर्सिटी के अंतर्गत आने वाले इस सरकारी कॉलेज में यह परीक्षा 20 दिसम्बर को हुई थी. इस सवाल पर छात्र आक्रोशित हैं क्योंकि ये देश के नायकों और आज के युवाओं के प्रेरणास्रोत महापुरुषों का अपमान है.

छात्र संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन से की शिकायत

छात्र संगठन डीएसओ (डेमोक्रेटिक स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन)ने आपत्ति जाहिर करते हुए कॉलेज प्रबंधन के सामने आपत्ति जाहिर की. छात्रों का मानना है कि ये देश के महापुरुषों का अपमान है. इससे आने वाली पीढ़ी के मन में गलत संदेश जाता है. छात्र संगठन डीएसओ के अध्यक्ष सुनील सेन ने कहा कि हम पाठ्यक्रम में शहीदों की वीरगाथा और उनके बलिदान को पढ़ाये जाने की मांग कर रहे हैं,लेकिन इस सरकार में उल्टा हो रहा है. यहां वीर शहीदों जिनमें भगत सिंह ,चन्द्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों को आतंकवादी बताया जा रहा है और छात्रों से ऐसे सवाल परीक्षा में पूछे जा रहे हैं. हम इस पर आपत्ति जाहिर करते हैं. ये हमारे देश के नायकों का अपमान है.

पीजी कॉलेज के प्राचार्य मौन

जिस पीजी कॉलेज में ये परीक्षा हो रही थी उसके प्राचार्य ने कहा कि हम इस मामले पर गंभीर हैं लेकिन सवाल ये उठता है कि इतने दिन होने के बावजूद मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार ने आरोपी शिक्षक को निलंबित क्यों नहीं किया. प्रचार्य ने कहा कि हमने इसकी शिकायत विश्वविद्यालय के कुलपति से कर दी है. आगे की कार्रवाई वही करेंगे.

शिक्षा व्यवस्था में भारी कमी दिखाता है ये सवाल

इस तरीके के सवालों से ये पता चलता है कि मध्यप्रदेश की सरकार शिक्षा व्यवस्था को लेकर कितनी सजग और सतर्क हैं. ऐसे बेतुके सवाल पूछने के बावजूद सरकार ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है. छात्र इस सवाल के खिलाफ प्रशासन का विरोध कर रहे हैं. छात्रों का कहना है कि जिन महापुरुषों के कारण हमें ये आजादी मिली, आज उनके सपनों का भारत बनाने के बजाय उन्हें अपमानित करने का निंदनीय प्रयास हो रहा है. 

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