जेएनयू में आज 'स्टूडेंट्स मार्च', प्रशासन ने कहा कतई नहीं बढ़ाई जाएगी परीक्षा की तिथि

जेएनयू में प्रोटेस्ट के बीच प्रशासन ने परीक्षा तिथि की घोषणा कर दी है. छात्रों ने फीस हाइक को लेकर आज स्टूडेंट मार्च करने की ठानी है तो दूसरी ओर प्रशासन और शिक्षकों ने साथ मिलकर यह कह दिया कि चाहे कुछ भी किसी भी स्थिति में परीक्षा की तिथि आगे नहीं बढ़ाई जाएगी और न ही रिसर्च पेपर में कोई नरमी बरती जाएगी.  

जेएनयू में आज 'स्टूडेंट्स मार्च', प्रशासन ने कहा कतई नहीं बढ़ाई जाएगी परीक्षा की तिथि

नई दिल्ली: ज्वाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में आज छात्रों ने रोड मार्च कर प्रोटेस्ट को जारी रखा है. हॉस्टल फीस हाइक को लेकर 19 दिनों से जारी यह आंदोलन अब तक बहुत नुकसान पहुंचा चुका है. इसी बीच जेएनयू प्रशासन ने दिसंबर के अंत तक परीक्षा की तिथि घोषित कर दी है. जेएनयू के वीसी और कुछ शिक्षकों ने कहा कि मॉनसून के अंत में होने वाली सेमेस्टर परीक्षा 12 दिसंबर से 20 दिसंबर के बीच कराई जाएगी. इस बात की जानकारी जेएनयू प्रशासन ने पहले ही नोटिस के जरिए दे दी थी लेकिन सोमवार को जेएनयू के कुछ शिक्षकों ने कहा कि जेएनयू ससमय ही परीक्षा कराएगी. चंद छात्रों की ओर से किए जा रहे प्रोटेस्ट का पूरे परीक्षा पर असर नहीं पड़ने दिया जाएगा. 

शिक्षकों ने कहा जल्द अपने क्लास को लौटें छात्र

प्रोटेस्ट के बीच भी परीक्षा कराने को लेकर जवाब देते हुए शिक्षकों ने छात्र आंदोलन को लेकर अपने-अपने पक्ष को सामने रखा. जेएनयू शिक्षकों ने वीडियो मैसेज के जरिए छात्रों से परीक्षा को लेकर क्लास लेने की हिदायत दी और कहा कि सब अपने-अपने वर्ग लौटें और रिसर्च पेपर पूरा करें. परीक्षा तिथि को कतई आगे नहीं बढ़ाया जाएगा और ना ही रिसर्च पेपर के जमा करने की तिथि में कोई नरमी बरती जाएगी. वैसे छात्रों को जो अनुमान के मुताबिक सीजीपीए ला पाने में सफल नहीं हो सके हैं, उन्हें रॉल लिस्ट से ड्रॉप कर दिया जाएगा. पिछले दो सप्ताह से सारी अकादमिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुईं हैं. 

बीपीएल छात्रों को मिलेगी विशेष छूट

शिक्षकों ने वीडियो में कहा कि अभी हाल ही में विश्वविद्यालय डीन, सीनियर वॉर्डेन हॉस्टल अध्यक्ष के बीच बातचीत हुई थी. एग्जिक्यूटिव काउंसिल की बैठक के दौरान भी नए ड्राफ्ट में छात्रों की बहुत सारी मांगों का ख्याल रखा गया. गरीबी रेखा के नीचे वाले छात्रों को तय राशि का 50 फीसदी ही देना होगा. इसके अलावा भी बहुत सी छूटें दी जा रही है. प्रोटेस्ट कर समय बर्बाद करने से अच्छा है कि छात्र अपने क्लास को लौटें और अपना अकादमिक नुकसान न होनें दें. 
 
सिलेबस पूरा कराने में शिक्षकों को हो रही परेशानी

वीडियो के जरिए प्रेस को संबोधित करने वाले शिक्षकों में मजहर आसिफ, अश्विनी मोहापात्रा, गिरिश नाथ झा, नागेंद्र श्रीनिवास और पवन धर शामिल थे. अश्विन मोहापात्रा ने कहा कि हम छात्रों से अपील कर रहे हैं कि "वे अपनी क्लासेज पर ध्यान दें 23 दिसंबर से पहले परीक्षा की सारी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी. इससे पहले सभी शिक्षक सिलेबर पूरा कराने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं. लेकिन छात्रों के क्लास में ना होने से उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. सबसे बड़ी बात यह है कि छात्र अपना नुकसान देख नहीं पा रहे हैं." 

डीन ने कहा नहीं करेंगे हिंसक आंदोलन करने वाले छात्रों से कोई बात

डीन उमेश कदम ने कहा कि वे विरोध जताने के हक से इतफाक रखते हैं लेकिन वह विरोध लोकतांत्रिक हो तब ही. जेएनयू प्रशासन उनके साथ बात नहीं कर सकती तो जिन्होंने एक बिना सूचना के यूनियन बनाया और हिंसक तरीके से प्रोटेस्ट करने लग गए. वहीं एसोसिएट छात्र कल्याण डीन वंदना मिश्रा ने कहा कि छात्र इतने ज्यादा हिंसक हो गए हैं कि उन्होंने उन्हें तकरीबन 28 घंटे तक एक क्लासरूम के अंदर बंद रखा. उन्होंने पूरे विरोध को राजनीतिक पूर्वानुमान से ग्रसित और हिंसक विद्रोह वाला बताया. 

स्टूडेंट्स मार्च का किया आयोजन


मालूम हो कि पिछले तीन हफ्ते से जेएनयू के छात्र नए हॉस्टल मैनुअल में फीस की बढ़ोत्तरी को लेकर प्रोटेस्ट पर हैं. इस दौरान छात्रों ने मीडिया को भी कैंपस के अंदर काफी परेशान किया. छात्रों का कहना है कि जेएनयू कल्चर को खत्म की जाने की कोशिश की जा रही है. छात्रों के प्रोटेस्ट को देखते हुए फीस बढ़ोत्तरी में कुछ कटौती की भी सूचना मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से जारी की गई थी. लेकिन छात्रों का कहना है कि वह सिर्फ बहलाने फुसलाने और दिखावे के लिए किया गया है. उसी को लेकर अपनी मांग पुरजोर तरीके से उठाने के लिए छात्रसंघ अधिकारियों के नेतृ्त्व में आज स्टूडेंट मार्च का आयोजन किया गया है. इस दौरान जेएनयू में कर्फ्यू भी लगाया गया है.