AMCA Fighter Jet India: भारत अब अपनी रक्षा क्षमता को एक नए स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रहा है. भारतीय वायुसेना (IAF) ने अपने खुद के बने फिफ्थ जनरेशन लड़ाकू विमान AMCA के लिए बड़ी योजना बनाई है. जहां पहले सिर्फ 120 विमानों की खरीद की बात थी, अब वायुसेना का टारगेट इसे बढ़ाकर 250 से ज्यादा विमानों तक करने का है. यह जानकारी भारतीय वायुसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी है. उन्होंने बताया कि आने वाले समय में AMCA न सिर्फ भारत की हवाई ताकत को बढ़ाएगा, बल्कि इसे भविष्य की तकनीकों से भी लैस किया जाएगा.
क्या है AMCA प्रोजेक्ट?
AMCA एक स्टेल्थ फाइटर जेट है, जिसे भारत की एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) मिलकर बना रहे हैं. इसका निर्माण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) करेगी. यह विमान दो इंजन वाला, मल्टी-रोल यानी कई तरह के मिशन करने वाला जेट होगा, जिसकी वजन क्षमता करीब 25 टन होगी, साथ ही AMCA को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह दुश्मन के रडार पकड़ ना सके. इसमें इंटरनल वेपन बे, सुपरक्रूज क्षमता और सेंसर फ्यूजन जैसी तकनीकें होंगी, जिससे यह किसी भी एडवांस फाइटर जेट से मुकाबला कर सकेगा.
MkI और MkII वर्जन
वायुसेना पहले चरण में MkI और MkII वर्जन के 120 विमान खरीदेगी. MkI की बात करें तो इसमें फिफ्थ जनरेशन तकनीक जैसे स्टील्थ, Network-centric warfare capabilities और तेज रफ्तार उड़ान की ताकत होगी. MkII में इससे भी आगे की टेक्नोलॉजी जोड़ी जाएगी, जिसमें मानव रहित विमानों (UCAV) के साथ मिलकर ऑपरेशन करने की क्षमता शामिल होगी. इसका मतलब है कि AMCA भविष्य में ड्रोन के साथ मिलकर टीम में उड़ान भर सकेगा और मिशन को अंजाम देगा.
भविष्य का MkIII वर्जन
वायुसेना की योजना MkIII वर्जन को भी विकसित करने की है, जो सिक्स्थ जनरेशन की टेक्नोलॉजी पर आधारित होगा. इस वर्जन में ऐसी तकनीकें शामिल की जाएंगी जो आने वाले समय में युद्ध का तरीका ही बदल देंगी, इसको डायरेक्ट एनर्जी वेपन (लेजर गन), हाइपरसोनिक मिसाइल, और एडैप्टिव स्टेल्थ कोटिंग तैयार किया जाएगा. यह वर्जन 2035 के बाद आने की उम्मीद है और इससे भारत की वायुसेना की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी.
कितना बड़ा होगा निवेश?
AMCA प्रोजेक्ट का शुरुआती निवेश लगभग 1.2 लाख करोड़ रुपये का है. इसे 2032 के बाद बड़े पैमाने पर उत्पादन में लाया जाएगा. इस प्रोजेक्ट में HAL के साथ-साथ L&T जैसी निजी कंपनियां भी भाग ले सकती हैं. अगर भारत 250 से ज्यादा AMCA जेट बनाता है, तो यह न सिर्फ वायुसेना की जरूरत पूरी करेगा बल्कि रक्षा निर्यात के नए अवसर भी खोलेगा. इससे भारत का एयरोस्पेस सेक्टर मजबूत होगा और देश विदेशी तकनीक पर कम निर्भर रहेगा.
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