साल 2019 में विरोध प्रदर्शनों का दौर, क्यों, कब और क्या हुआ हासिल ?

साल 2019 का जब कभी इतिहास लिखा जाएगा तो यह इस दौरान हुए आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों का जिक्र जरूर किया जाएगा. 2019 एब खत्म होने को है. अब नए साल में नए रिजोल्यूशन के साथ प्रवेश करने जा रहे हैं. लेकिन जरूरी है कि उन सभी पर एक नजर डाली जाए कि आखिर ये प्रदर्शन या आंदोलन हुए किस लिए ?  

साल 2019 में विरोध प्रदर्शनों का दौर, क्यों, कब और क्या हुआ हासिल ?

नई दिल्ली: संपूर्ण क्रांति के जनक जयप्रकाश नारायण ने यह कहा था कि एक स्वस्थ लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन तो होना ही चाहिए. उसी तर्ज पर साल 2019 का दौर आंदोलनों का दौर रहा. देश के कुछ बड़े प्रतिष्ठित संस्थानों के छात्र सड़कों पर बैनर और पोस्टर लेकर उतरते नजर आए. छात्र आंदोलनों की एक लंबी चौड़ी लिस्ट को जब खोला जाएगा तो मालूम होगा कि लोकसभा चुनाव के बाद से मोदी सरकार 2.0 प्रचंड बहुमत के साथ लौट कर आ गई लेकिन उसे प्रचंड विरोध प्रदर्शनों का भी सामना करना पड़ा.

इन विरोध प्रदर्शनों के पीछे की कहानी को जब खंगाला जाएगा तो बड़े गंभीर से गंभीर और विचित्र से किस्से और कारण सामने आएंगे. एक-एक कर उन सब पर नजर डालते हैं.

1. जेएनयू फीस वृद्धि विवाद

देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक ज्वाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में इस साल नवंबर महीने में नया हॉस्टल मैनुअल लाया गया. इस नए हॉस्टल मैनुअल में हॉस्टल की फीस में बढ़ोत्तरी कर दी गई. हॉस्टल की मासिक फीस डबल सिटर की 10 रुपए से बढ़ाकर 300 रुपए और सिंगल सिटर की 20 रुपए से बढ़ाकर 600 रुपए कर दी गई थी. इसके अलावा छात्रों को 1700 रुपए का मेंटेनेंस चार्ज और सिक्यूरिटी मनी के रूप में 5500 की जगह

12,000 रुपए देने की बात कही गई थी. छात्र भड़क उठे. विवि प्रशासन से बातचीत करने के बाद भी जब बात नहीं बनी तो छात्रों ने सड़कों पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. पुलिस से झड़प भी खूब हुई. कभी पुलिस स्टेशन का घेराव किया तो कभी राष्ट्रपति भवन की ओर बढ़ने लगे. यहां तक की विश्वविद्यालय में हो रहे दीक्षांत समारोह का बहिष्कार भी किया गया. लगभग महीनों तक प्रोटेस्ट करने के बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने उनकी मांगों पर विचार तो किया लेकिन छात्रों के हिसाब से वह सिर्फ एक छलावा था.

2. बीएचयू संस्कृत प्रोफेसर विवाद

काशी नगरी वाराणसी के बीएचयू में एक अजीब तरह का ही विरोध प्रदर्शन हुआ, जिसने यह साबित किया कि पढ़े-लिखे लोग भी रूढ़िवादी सोंच के होते हैं. बीएचयू में छात्रों ने एक संस्कृत प्रोफेसर से क्लास लेने से मना कर दिया सिर्फ इसलिए कि वह प्रोफेसर मुस्लिम था. उनका मानना है कि कोई भी मुस्लिम प्रोफेसर हिंदू धर्म की प्रतीक भाषा मानी जानी वाली संस्कृत को कैसे पढ़ा सकता है जबकि वह उस कौम से है भी नहीं. हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रोफेसर का साथ दिया लेकिन आहत प्रोफेसर ने बीएचयू को बाय-बाय कह दिया.

3. रविदास मंदिर आंदोलन

कोर्ट के निर्देश पर डीडीए ने तुगलकाबाद में श्री रविदास मंदिर को गिरा दिया था. इसके बाद से बवाल शुरू हो गया था. इस विरोध प्रदर्शन में भीम आर्मी संस्थापक चंद्रशेखर की पुलिस से झड़प भी हो गई. मामला कोर्ट में गया. कोर्ट ने इससे जुड़े केंद्र के प्रस्तावों को तो स्वीकार कर लिया जिसमें मंदिर को फिर से बनाने के लिए 200 के बजाय 400 वर्गमीटर तक जमीन देने की बात कही गई थी. केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए अटॉर्नी जनरल ने कहा कि श्रद्धालुओं की भावनाओं, आस्था को ध्यान में रखते हुए फिर से मंदिर बनाने का फैसला लिया गया है. लेकिन तब तक विरोध प्रदर्शन से होने वाले नुकसान की भरपाई करनी मुश्किल थी. हालांकि, केंद्र सरकार ने कोर्ट को यह जानकारी दी कि वह मंदिर निर्माण के लिए एक कमिटी बनाएगी जो जल्द इस प्रक्रिया को पूरी करेगी.

4. CAB विरोध असम

नागरिकता संशोधन विधेयक जो अब कानून का रूप ले चुका है, उसका विरोध प्रदर्शन तो जैसे देश के लिए इस साल एक नासूर ही बन बैठा है. बिल जब सदन के पटल पर रखा जा रहा था तो असम में इसके विरोध को लेकर प्रदर्शन जोरों पर पहुंच गया. आलम यह था कि सार्वजनिक संपत्तियों का नुकसान तो आम बात हो गई थी. कई दिनों तक राज्य में धारा 144 लगा रहा और इंटरनेट सेवा को बंद ही रखा गया. कानून के पास हो जाने के बाद से तो सड़कों पर आगजनी ही शुरू हो गई. लोगों ने इस कानून के साथ-साथ NRC का भी विरोध करना शुरू कर दिया जो अभी कानून की शक्ल में आया भी नहीं.

5. जामिया CAA प्रदर्शन

दिल्ली का एक और संस्थान जो इस साल विरोध प्रदर्शनों के चलते खासा चर्चा में रहा वह जामिया मिलिया इस्लामिया है. जामिया मिलिया इस्लामिया में पिछले दिनों CAA कानून बन जाने के बाद से छात्रों ने इसका विरोध प्रदर्शन शूरू कर दिया. इस विरोध ने राष्ट्रव्यापी लहर को उकसाने में एक बड़ी भूमिका निभाई. जामिया के छात्रों के विरोध प्रदर्शन को देख दिल्ली पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और छात्रों पर लाठियों से वार किया. छात्र भी कहां कम रहने वाले थे, उन्होंने भी पुलिस पर पथराव किया. एक वाकया कुछ यूं भी हुआ जब दिल्ली पुलिस छात्रों को खदेड़ते हुए कैंपस के अंदर घुस गई और लाइब्रेरी तक में बैठे छात्रों ने शिकायत की कि उन्हें मारा गया है. खबरें तो यह भी चलीं कि पुलिस ने फायरिंग भी की है. विरोध प्रदर्शनों के इस दौर में जामिया में अब भी शांति नहीं है.

6.हैदराबाद की दिशा रेप-मर्डर के बाद उपजा विरोध

इसके अलावा देश के कई ऐसे संस्थानों में अलग-अलग कारणों से विरोध प्रदर्शन हुए. हैदराबाद में एक पशु चिकित्सक की रेप के बाद जला कर हत्या के मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था लेकिन उनको फैसला आने तक हिरासत में रखा गया था. इस दौरान देश में तो जैसे धरना प्रदर्शनों और कैंडल मार्च का दौर ही चल गया था. हर तरफ से रेप की खबरें भी तेजी से मीडिया तक पहुंचने लगीं थी और लोगों का सड़को पर उतर कर सजा देने का प्रदर्शन भी. इसी बीच यूपी के उन्नाव और राजस्थान समेत कई जगहों से महिलाओं के खिलाफ होने वाले अत्याचार की खबरें मिलती रहीं.

देश में विरोध प्रदर्शनों का दौर कब, कहां और क्यों

देश में विरोध प्रदर्शनों की लिस्ट इतनी लंबी है कि उसे एक किश्त में समेटा जाना जरा मुश्किल है. बिहार के पटना विश्वविद्यालय में रेप पीड़िता को इंसाफ दिलाने को लेकर, कोलकता के जाधवपुर विश्वविद्यालय में बाबूल सुप्रीयो का घेराव करने और नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करने को लेकर, राजस्थान यूनिवर्सिटी में परीक्षा की तिथि आगे बढ़ाने को लेकर, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में CAA को लेकर विवाद और विवादों के बीच विरोध प्रदर्शन होते ही रहे. दिल्ली के जामा मस्जिद में, जंतर मंतर पर और सीलमपुर-जाफराबाद क्षेत्र में भी विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी ही रहा. हालांकि, कईयों का निपटारा हुआ, कई अब भी उसी तरह बने हुए हैं.

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