सेना को जल्द मिलेगा नया चीफ, सरकार के पास भेजे गए तीन नाम

बिपिन रावत की सेवानिवृत्ति से दो सप्ताह पहले नए आर्मी चीफ के नाम की घोषणा कर दी जाएगी. COAS पद के लिए जिन तीन अधिकारियों पर विचार किया जा रहा है, उनमें उप प्रमुख, लेफ्टिनेंट जनरल मनोज मुकुंद नरवने, उत्तरी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह और दक्षिणी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल सतिंदर कुमार सैनी शामिल हैं. 

सेना को जल्द मिलेगा नया चीफ, सरकार के पास भेजे गए तीन नाम

नई दिल्लीः वर्तमान आर्मी चीफ बिपिन रावत 31 दिसंबर को रिटायर होने वाले हैं. ऐसे में सरकार जल्द ही नए सेना प्रमुख का एलान करने जा रही है. नए सेना प्रमुख के लिए प्रधानमंत्री के पास तीन नाम भेजे गए हैं. बिपिन रावत की सेवानिवृत्ति से दो सप्ताह पहले नए आर्मी चीफ के नाम की घोषणा कर दी जाएगी. COAS पद के लिए जिन तीन अधिकारियों पर विचार किया जा रहा है, उनमें उप प्रमुख, लेफ्टिनेंट जनरल मनोज मुकुंद नरवने, उत्तरी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह और दक्षिणी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल सतिंदर कुमार सैनी शामिल हैं. 

जानिए कौन हैं लेफ्टिनेंट जनरल नरवने 
सितंबर में उप-प्रमुख बनने से पहले पूर्वी कमान और सेना प्रशिक्षण कमान (ARTRAC) का नेतृत्व कर चुके लेफ्टिनेंट जनरल नरवने, बाकी दोनों उम्मीवारों से वरिष्ठ हैं और इस पद के लिए पसंदीदा हैं. नरवने को कश्मीर और उत्तर-पूर्व दोनों में आतंकवाद रोधी अभियानों में व्यापक अनुभव है.

उन्होंने राष्ट्रीय राइफल्स की एक बटालियन की भी कमान संभाली है, जो जम्मू-कश्मीर में सेना की आतंकवाद-रोधी सेना है. सबसे खास कि वह नारायण भारतीय शांति रक्षा बल का हिस्सा थे, जब इसे गृह युद्ध के दौरान श्रीलंका में तैनात किया गया था. 2017 में उन्हें आर्मी के ट्रेनिंग कमांड का हेड बनाया गया था. उन्‍हें ऑपरेशन के लिहाज से संवेदनशील ईस्टर्न कमांड भी भेजा गया था. इस कमांड से पहले भी कई सेना प्रमुख हुए हैं.

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लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह
लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह पंजाब के जालंधर से हैं. उनका परिवार मूल रूप से होशियारपुर के अंबाला जट्टन का है. रणबीर सिंह सैनिक वीरता विरासत में मिली है. उनके पिता आर्मी मैन थे, लेकिन युवावस्था में ही उनकी मृत्यु हो गई थी. इसके बाद उनके चाचा तीन साल की उम्र में उन्हें गोद ले लिया. चाचा भी आर्मी से सेवानिवृत्त कर्नल रहे हें. 13 दिसंबर 1980 को सिहं ने डोगरा रेजिमेंट की नौवीं बटालियन से देश सेवा की शुरुआत की थी.

सेवा में रहते हुए उन्होंने विभिन्न पदों पर कार्य किया. इस दौरान उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल, युद्ध सेवा मेडल, सेना मेडल से सम्मानित किया जा चुका है. लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह का नाम म्यांमार और पाक अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक्स से जुड़ा है. साथ ही आतंकवाद के खिलाफ अभियानों में भी इनका ट्रैक रेकॉर्ड अच्छा रहा है. 

लेफ्टिनेंट जनरल सतिंदर कुमार सैनी
दक्षिणी सैन्‍य कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल सतिंदर कुमार सैनी 1 अक्‍टूबर, 2018 से इस कमांड की जिम्‍मेदारी संभाल रहे हैं. वह जून, 1981 में जाट रेजीमेंट की 7वीं बटालियन में नियुक्‍त हुए थे. वह 7वीं जाट रेजीमेंट के अलावा कश्‍मीर घाटी में माउंटेन ब्रिगेड के कमांडर रह चुके हैं. उनके पास काउंटर इनसर्जेंसी फोर्स के नेतृत्‍व का भी अनुभव है. इसके अलावा वह एक इंफेंट्री ब्रिगेड के ब्रिगेड मेजर, एक इंफेंट्री डिविजन के जनरल स्‍टाफ ऑफिसर (ऑपरेशंस), सेना मुख्‍यालय में सैन्‍य अभियान निदेशक, मैनपावर प्‍लानिंग एंड पर्सनल सर्विसेज के महानिदेशक भी रह चुके हैं.

वह देहरादून की इंडियन मिलिट्री एकेडमी के कमांडेंट भी रहे हैं. उन्‍हें विदेश में भी सैन्‍य अभियानों का अनुभव है. अपने 36 साल के करियर में 2018 में अतिविशिष्‍ट सेवा पदक, युद्ध सेवा पदक, विशिष्‍ट सेवा पदक से भी सम्‍मानित किया जा चुका है.

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मौजूदा आर्मी चीफ बिपिन रावत 
लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत 1978 दिसंबर में सेना में शामिल हुए थे. तब उन्हें गोरखा राइफल्स की पांचवीं बटैलियन में कमिशन मिला था. बिपिन रावत ने देश के 26वें आर्मी चीफ के तौर पर कार्यभार संभाला था. इससे पहले सितंबर 2016 में वह वाइस चीफ बने थे. वाइस चीफ बनने से पहले रावत पुणे में सदर्न कमांड के जीओसी इन कमांड थे. रावत ने लंबे समय तक अशांत इलाकों में काम किया है. तीन दशकों में उन्होंने भारतीय सेना में अगम पदों पर काम किया हैं.

उन्होंने 1986 में चीन से लगे लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर इन्फेन्ट्री बटैलियन की कमान संभाली. उन्होंने ब्रिगेडियर के तौर पर कॉन्गो में यूएम पीसकीपिंग मिशन के मल्टीनैशनल ब्रिगेड की अगुआई की थी. इसके अलावा रावत 5 सेक्टर राष्ट्रीय राइफल्स और कश्मीर घाटी में 19 इन्फेन्ट्री डिविजन की अगुआई भी कर चुके हैं. 

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