येदियुरप्पा के बाद ये शख्स बन सकता है कर्नाटक का मुख्यमंत्री, जानिए क्या है वजह?

कर्नाटक में सियासी उलटफेर को देखते हुए हर किसी के जेहन में यही सवाल पनप रहा है कि आखिर अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा? रेस में सबसे आगे अरविंद बेलाड का नाम चल रहा है. अब सवाल उठ रहा है कि आखिर किसे और क्यों मिलेगी येदियुरप्पा की जगह कर्नाटक की कमान..

Written by - Ayush Sinha | Last Updated : Jul 27, 2021, 07:01 PM IST
  • कर्नाटक में किसे मिलेगी येदियुरप्पा की जगह?
  • अरविंद बेलाड का नाम रेस में सबसे आगे
येदियुरप्पा के बाद ये शख्स बन सकता है कर्नाटक का मुख्यमंत्री, जानिए क्या है वजह?

नई दिल्ली: कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री के नाम का आज ऐलान होगा. शाम 7 बजे बीजेपी विधायक दल की बैठक होनी है, जिसमें सीएम के नाम पर चर्चा होनी है. अब सवाल यही है कि किस नेता को कर्नाटक में बी.एस. येदियुरप्पा की जगह कमान मिल सकती है. केंद्रीय पर्यवेक्षक जी किशन रेड्डी और धर्मेंद्र प्रधान बेंगलुरु पहुंचे.

किसे मिलेगी येदियुरप्पा की जगह?

वैसे तो कुल 5 नेताओं का नाम रेस में चल रहा है, जिनमें केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी (Pralhad Joshi), कर्नाटक के गृह मंत्री बसवराज एस बोम्मई (Basavaraj Bommai), सीटी रवि (CT Ravi), कर्नाटक के मंत्री मुरुगेश आर निरानी (Murugesh Nirani), विधायक अरविंद बेलाड (Aravind Bellad) और बीएल संतोष (BL Santosh) शामिल हैं. लेकिन इन 5 नामों में एक शख्स के नाम को लगभग तय माना जा रहा है.

हर किसी के जेहन में यही सवाल उठ रहा है कि आखिर वो शख्स कौन हैं, जिन्हें येदियुरप्पा के रिप्लेसमेंट के तौर पर देखा जा रहा है. कर्नाटक में येदियुरप्पा की ताकत का अंदाजा हर किसी को है. लिंगायत समुदाय से आने वाले येदियुरप्पा ने अपने दम पर सरकार बदल दी थी. ऐसे में उनके इस्तीफे के बाद सवाल ये उठ रहा है कि क्या भाजपा उन्हें नजरअंदाज कर पाएगी.

येदियुरप्पा के विरोधी को मिलेगी कुर्सी?

ज़ी मीडिया के सूत्रों का कहना है कि अरविंद बेलाड का नाम कर्नाटक के मुख्यमंत्री के लिए लगभग तय कर लिया गया है. आपको यहां जानकर हैरानी होगी कि अरविंद और येदियुरप्पा एक दूसरे के विरोधी हैं. अरविंद भारतीय जनता पार्टी के ही विधायक है, लेकिन फिर भी हाल ही में एक बड़ा विवाद सामने आया था.

येदियुरप्पा के बड़े विरोधियों में से एक हुबली-धारवाड़ पश्चिम निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा विधायक अरविंद बेलाड ने हाल ही में ये आरोप लगाते हुए कहा था कि उनका ‘विश्वास’ है कि उनका फोन टैप किया जा रहा है. इतना ही नहीं बेलाड ने ये तक आरोप लगा दिया था कि उनका लगातार पीछा किया जा रहा है.

बेलाड ने मीडिया से बात करते हुए उस वक्त कहा था कि इस मामले में वो विधानसभा अध्यक्ष विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी और राज्य के गृहमंत्री बसवराज बोम्मई को पहले ही एक विस्तृत पत्र सौंप चुके हैं. उन्होंने कहा था कि 'मैंने इस संबंध में उनसे (बोम्मई और कागेरी) हस्तक्षेप की मांग की है.'

कौन हैं अरविंद बेलाड?

आपको बता अरविंद के पिता चंद्रकांत बेलाड भाजपा से पांच बार विधायक रहे हैं और वह खुद 2013 से विधायक हैं. दोनों ने सियासी सफर में एक बेदाग रिकॉर्ड बनाए रखा है. 3 अगस्त 1969 को जन्मे बेलाद चंद्रकांत बेलाद और लीलावती सी बेलाड के बेटे हैं. वो अपने पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं. उन्होंने एसडीएम कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, धारवाड़ से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है. इतना ही नहीं फ्रांस से उन्होंने व्यवसाय प्रबंधन में अपना पीजीडीएम पूरा किया है.

उन्होंने दावा किया, 'यह सब तब शुरू हुआ जब मुझे कुछ समय पहले युवराज स्वामी का फोन आया. तब से मेरा दृढ़ विश्वास है कि मेरा फोन टैप किया जा रहा है और मेरा लगातार पीछा किया जा रहा है.'

यहां ये समझने की आवश्यकता है कि अगर भाजपा ने येदियुरप्पा के विरोधी अरविंद बेलाड को सीएम बना दिया तो आने वाले वक्त में येदियुरप्पा अपनी ही पार्टी के लिए खतरा बन सकते हैं. यानि कर्नाटक में येदियुरप्पा को नजरअंदाज कर पाना बेहद मुश्किल है, या फिर ये कह सकते हैं कि अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारने के समान है.

येदियुरप्पा के बाद कर्नाटक की खान और भूविज्ञान मंत्री मुरुगेश आर निरानी को मुख्यमंत्री पद का प्रबल दावेदार माना जा रहा है. रविवार को निरानी ने दिल्ली पहुंचकर शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की थी. उसके बाद से ही उनके मुख्यमंत्री बनने के कयास तेज हो गए हैं. बीजेपी से तीन बार विधायक रहे निरानी लिंगायत समुदाय से आते हैं और यह समुदाय राज्य की राजनीति में एक बड़ा स्थान रखता है.

कौन है येदियुरप्पा की पहली पसंद

मीडिया रिपोर्ट्स का कहना हैकि कर्नाटक के गृह मंत्री बसवराज एस बोम्मई येदियुरप्पा की पहली पसंद हैं. हाल ही में येदियुरप्पा ने एक बयान में कहा था कि 'बोम्मई कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एसआर बोम्मई के बेटे हैं.' हालांकि वो अन्य सवालों से बचते नजर आए थे.

कर्नाटक की राजनीति में लिंगायत समुदाय को नजरअंदाज करके सरकार बनाना रेत से पानी निकालने के समान है. इस समुदाय पर येदियुरप्पा की अच्छी खासी पकड़ है, ऐसे में उन्हें इग्नोर करके उनके धुर विरोधी को यदि भाजपा ने कर्नाटक की कमान देती है, तो इसके पीछे जरूर कोई खास और बड़ी वजह होगी. इस वजह के बारे में तो आने वाले वक्त में ही पता चलेगा.

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