रेगिस्तान में उठा ‘ड्रोन तूफान’! इंडियन आर्मी की Ashni Platoon ने ऐसा गेम सेट किया कि जंग में उड़ा जाए दुश्मनों पूरी फौज

indian army ashni platoon: भारत के खिलाफ अब किसी देश ने दुस्साहस किया तो जंग के मैदान में ऐसा ड्रोन का तूफान उठेगा, जो दुश्मन देश की पूरी सेना को लील जाएगा. ऐसा ही राजस्थान की रेत में इंडियन आर्मी अश्नि प्लाटून का युद्धाभ्यास देखकर महसूस होता है.  

Written by - Saurabh Pal | Last Updated : Nov 8, 2025, 04:44 PM IST
  • अश्नि प्लाटून ने रेगिस्तान में ड्रोन युद्धाभ्यास किया
  • हर सैनिक को ड्रोन स्पेशलिस्ट बनाने की तैयारी
रेगिस्तान में उठा ‘ड्रोन तूफान’! इंडियन आर्मी की Ashni Platoon ने ऐसा गेम सेट किया कि जंग में उड़ा जाए दुश्मनों पूरी फौज

Indian army ashni platoon: भारत के पश्चिमी बारूद महक रहा है. इस बारूद में इंडियन आर्मी की वीरता की खुशबू है, जिससे पाकिस्तान सहम गया है. गुजरात नीले समंदर और राजस्थान की रेत में भारत की तीनों सेनाएं त्रिशूल युद्धाभ्यास के तहत अपना युद्ध कौशल दिखा रही है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद इंडियन आर्मी का पहला युद्धाभ्यास है. जिसकी वजह से सभी की नजर भारत पर है. भारतीय सेना का यह युद्धाभ्यास कई मामलों में परांपरिक युद्धाभ्यास से अलग है. 

त्रिशूल युद्धाभ्यास से पहले आर्मी-आर्मी के साथ एयरफोर्स -एयरफोर्स के साथ युद्धाभ्यास करती थी, लेकिन इस युद्धाभ्यास में फुल फ्लेज्ड वॉर की प्रैक्टिस चल रही है. इसमें तीनों सेनाएं हर मोर्चे पर एक साथ समन्वय बनाकर युद्ध की प्रैक्टिस कर रही हैं. साथ ही इसमें इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर भी शामिल किया गया है.

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दुनिया का हर युद्ध इलेक्ट्रॉनिक होगा
ऑपरेशन सिंदूर सहित दुनिया के हर युद्ध में इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर शामिल है. रूस-यूक्रेन, इजरायल-ईरान युद्ध में ड्रोन्स ने ही मोर्चा संभाला था. क्योंकि युद्ध के मैदान में जमीन से लेकर आसमान तक दुनिया को कोई भी हथियार सुरक्षित नहीं है. इसकी झलक पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर में देखी थी. भारत के इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमता से पूरी दुनिया परिचित है, लेकिन इसे भावी युद्ध की प्रकृति को देखते हुए ओर बढ़ाने में सेना लगी हुई है. 

सेना की हर बटालियन में अश्नि प्लाटून
इस इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के लिए भारतीय सेना में अश्नि प्लाटून का गठन किया गया था, जो ऑपरेशन सिंदूर में सुपर एक्टिव है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना ने अपनी हर इंफ्रेंटी बटालियन में अश्नि प्लाटून बनाई है. इस प्लाटून में सैनिकों को ड्रोन चलाने की ट्रेनिंग दी जाती है. टार्गेट 2027 तक हर सैनिक को ड्रोन स्पेशलिस्ट बनाना है. अश्नि प्लाटून के पास कई तरह के ड्रोन हैं. जिनसे निगरानी, जानकारी जुटाने, दुश्मन पर नज़र रखने और फिर हमले यानि लॉइटरिंग म्यूनिशन  जैसी जिम्मेदारी है. 

राजस्थान के रेगिस्तान में अश्नि प्लाटून ने दिखाया जौहर
सैनिकों को उनके रोल के हिसाब से ड्रोन की ट्रेनिंग दी जा रही है. जैसे निगरानी का जिम्मा संभालने वाले सैनिकों को सर्विलांस ड्रोन को ऑपरेट करना बताया जा रहा है, उसी तरह अटैक करने वाले ड्रोन के लिए भी ट्रेनिंग हो रही है। भारतीय सेना की हर कमांड और फॉर्मेशन का अपना ट्रेनिंग मॉड्यूल बनाया गया है और उसी हिसाब से ट्रेनिंग हो रही.  राजस्थान की रेत में अश्नि प्लाटून के जवानों का जौहर देखते ही बनता है. ऐसा लगता है, जैसे ड्रोन का तूफान आ रहा है. 

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Saurabh Pal

सौरभ पाल का नाता उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से है. इन्होंने अपनी पढ़ाई देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय- इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से की है. सौरभ को लिखने-पढ़ने का शौक है. ...और पढ़ें

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