असम सरकार ने मुस्लिम संग्रहालय की मांग को ठुकराया, तो मचा घमासान

हेमंत बिस्व सरमा ने एक बार फिर क्रांतिकारी फैसले की जानकारी देते हुए ये बताया है कि असम सरकार ने संग्रहालय की मांग को ठुकरा दिया है. दरअसल, शेरमान अली अहमद ने की थी चार अंचल में संग्रहालय बनाने की मांग..

असम सरकार ने मुस्लिम संग्रहालय की मांग को ठुकराया, तो मचा घमासान

नई दिल्ली: असम सरकार ने म्यूजियम की मांग को ठुकरा दिया है. असम सरकार में शिक्षा मंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने ये साफ-साफ कह दिया है कि असम के चार अंचल में कोई अलग पहचान नहीं है. उन्होंने ये साफ कर दिया है कि असम में धर्म के आधार पर संग्रहालय नहीं बनेगा.

असम सरकार ने संग्रहालय की मांग को ठुकराया

दरअसल, कांग्रेस विधायक ने संग्रहालय बनाने की मांग की थी. शेरमान अली अहमद ने की थी चार अंचल में संग्रहालय बनाने की मांग की थी. जिसे असम सरकार ने खारिज कर दिया है. 

हेमंत बिस्वा ने कहा कि "असम के चार अंचल में कोई अलग पहचान नहीं है. ज्यादात्तर लोग बांग्लादेश से आकर बसे हैं, शंकरदेव कलाक्षेत्र असम की संस्कृति का केंद्र है. इसमें किसी छेड़छाड़ की इजाजत नहीं दी जा सकती है."

निश्चित तौर पर असम सरकार के इस फैसले पर भी सियासी घमासान का नजारा देखने को मिला. जब कांग्रेस सांसद अब्दुल खालिक ने इस के फैसले की निंदा की. लेकिन असम सरकार ने ये साफ कर दिया है कि वो अपने फैसले पर अडिग है.  इससे पहले असम सरकार ने फैसला लिया था कि सरकारी पैसे पर कोई धार्मिक पढ़ाई नहीं होगी.

कुरान जरूरी, गीता-बाइबल से क्यों दूरी?

असम सरकार का वो क्रांतिकारी फैसला देश में 'धर्म' की राजनीति को भड़काने वाला था. इस फैसले पर जबरदस्त सियासी कलह भी देखी गई. दरअसल, असम सरकार राज्य अधिसूचना जारी करने की तैयारी कर चुकी है कि असम में सभी मदरसे और 100 के करीब संस्कृत स्कूल बंद किए जाएंगे और ये सभी नियमित स्कूलों में बदले जाएंगे. लेकिन इस फैसले पर विवाद को असम सरकार में मंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने ये कहकर भड़का दिया कि कुरान की पढ़ाई पर सरकारी पैसा ख़र्च नहीं हो सकता, अगर ऐसा करना है, तो हमें भगवत गीता और बाइबल भी पढ़ना चाहिए.

असम में 614 सरकारी मदरसे और 900 प्राइवेट मदरसे हैं जिसमें से ज्यादातर जमीयत उलेमा-ए-हिंद चलाती है. असम सरकार 3 से 4 करोड़ रूपये सालान मदरसों पर खर्च करती है. अब असम सरकार सभी सरकारी मदरसों को स्कूल में बदलेगी और असम सरकार के इस फैसले का जबरदस्त विरोध देखा गया.

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