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यही रात अंतिम यही रात भारी, सुबह 10ः30 बजे राम मंदिर पर फैसला

लगातार 40 दिन तक चली सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. आठ नवंबर की शाम कोर्ट ने कहा कि वह नौ नवंबर को आयोध्या मामले में फैसला सुनाएगी. यानी कि अब से कुछ 10-12 घंटे में ढांचा गिराने के 27 साल बाद वह फैसला आने वाला है, जिसके इंतजार में पूरी एक पीढ़ी नौजवान हो गई. इस वक्त देश फैसले की ऐसी विकट घड़ी को महसूस कर पा रहा है, जहां स्थिति ऐसी है कि आगे क्या होगा.

यही रात अंतिम यही रात भारी, सुबह 10ः30 बजे राम मंदिर पर फैसला
राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनाएगा फैसला

नई दिल्लीः दूरदर्शन पर प्रसारित हुए रामायण धारावाहिक में अंतिम युद्ध से पहले का दृश्य वैचारिक स्तर की ऊंचाई की पराकाष्ठा है. राम-रावण के बीच अगली सुबह निर्णायक युद्ध होना है और दृष्य में इससे पहली की रात के माहौल का तानाबुना बुना गया है. रावण अब तक युद्ध में हुई अपनी हानि के बारे में सोच रहे हैं. राम अब तक हुए सभी युद्ध जीत चुके हैं, लेकिन फिर भी इस समय सशंकित हैं. सीता को इस निर्णायक युद्ध का बेसब्री से इंतजार है तो मंदोदरी परिणाम को लेकर उहापोह की स्थिति में है. इसी परिस्थिति को रवींद्र जैन गीत में पिरोते हैं तो सामने आता है यही रात अंतिम यही रात भारी, बस एक रात की ये कहानी है सारी.....

राम मंदिर ही नहीं, इन तीन प्रमुख मामलों पर भी आ सकता है फैसला

...और आज देशकाल में वाकई यही परिस्थिति है
आखिरकार आठ नवंबर की शाम सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया कि वह नौ नवंबर की सुबह साढ़े दस बजे अयोध्या मामले पर अपना फैसला सुनाएगा. सीजेआई रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर होने वाले हैं और तेजी से चले सुनवाई के कई दौर के बाद यह तो तय हो गया था कि फैसला इसी महीने आ जाएगा.

अब इस तरह सालों-साल तैरते इस दावे कि मंदिर वहीं बनाएंगे और सवाल कि मंदिर कहां बनेगा के बीच महज एक रात की दूरी है. यह एक रात का समय हमें उसी परिस्थिति की याद दिला रहा है, जहां आज के संदर्भ में दोनों पक्ष अब सिर्फ और सिर्फ फैसले का इंतजार कर रहे हैं. आइये समझने की कोशिश करते हैं इस गीत की पंक्तियों में आज के क्या निहितार्थ हैं.

ये बाजी अभी तक न जीती न हारी
30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाइकोर्ट की लखनऊ बेंच ने फैसला सुनाया था कि विवादित जमीन निर्मोही अखाड़े, हिंदू महासभा और सुन्नी वक्फ बोर्ड के बीच बराबर बांट दी जाए. इस फैसले के खिलाफ सुन्नी वक्फ बोर्ड 14 दिसंबर 2010 तो हिंदू महासभा 22 दिसंबर 2010 को सुप्रीम कोर्ट पहुंची. 9 मई 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने विवादित स्थल पर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश देते हुए इलाहाबाद हाइकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी और कहा कि राज्य की अदालत का यह फैसला विचित्र है. तर्क दिया गया कि किसी पक्ष ने बंटवारा नहीं मांगा था. इसके बाद कई अलग-अलग मसले आए. कई बार मुस्लिम पैरोकार ही अलग-थलग पड़ते दिखे. इस तरह अभी तक की स्थिति है कि ये बाजी अभी तक न किसी ने जीती न किसी ने हारी

अयोध्या फैसले से पहले अमन का संदेश

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20 जुलाई 2016 को बाबरी मस्जिद मामले के मुद्दई रहे हाशिम अंसारी का निधन हो गया. इलाहाबाद हाइकोर्ट से जब फैसला आने वाला था तो उन्होंने कहा था कि मैं फैसले का इंतजार कर रहा हूं और मौत का भी...लेकिन यह चाहता हूं कि मौत से पहले फैसला देख लूं. हाइकोर्ट का फैसला नहीं माना गया और दोनों पक्ष सुप्रीम कोर्ट चले गए. इसके बाद 2016 में मुद्दई रहे हाशिम अंसारी का निधन हो गया. आज तीन साल बाद जब मामले में फाइनल फैसला आने वाला है तो दुखद है कि हाशिम अंसारी की दिली इच्छा पूरी नहीं हो सकी.

इधर इसके एक साल बाद 16 सितंबर 2017 को राम मंदिर के पक्षकार व निर्मोही अखाड़ा के महंत रहे भास्कर दास का निधन हो गया. वह भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. हाशिम अंसारी और महंत भास्कर दास में अच्छी मित्रता थी. कई मौकों पर दोनों साथ ही साथ कचहरी जाया करते थे. आज फैसले की अंतिम घड़ी है और दोनों के ही मुखिया का न होना साल रहा है.

समर में सदा एक पक्ष ही तो जीता
यह तो तय है कि फैसला किसी एक ही के पक्ष में आएगा. ऐसे में देशभर में अलर्ट जारी है. क्योंकि इस समय अयोध्या मामले को लेकर देश में धार्मिक आधार पर एक गहरी खाई बनी हुई है. कई मौकों पर इसे पाटने की कोशिश की गई है, लेकिन दरार रही जाती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही कैबिनेट की बैठक में कह चुके हैं कि फैसले को लेकर किसी तरह की उकसावे वाली बयानबाजी न की जाए. उन्होंने कहा कि फैसला जो भी हो, लेकिन इससे पहले या बाद में बेवजह बयानबाजी नहीं होनी चाहिए. साथ ही उन्होंने देश में शांति और सौहार्द्र बनाए रखने में सहयोग करने की अपील भी की है. इधर मुस्लिम धर्मगुरु भी समुदाय के लोगों के साथ बैठककर सौहार्द की अपील कर रहे हैं.

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