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आखिर कब मिलेगा बिहार में रेप पीड़िता को इंसाफ?

बिहार में हुआ कानून व्यवस्था का बड़ा खुलासा. आज भी बिहार में कायम है बाहुबलियों का वर्चस्व. कब मिलेगा रेप पीड़िता को इंसाफ.

आखिर कब मिलेगा बिहार में रेप पीड़िता को इंसाफ?

पटना: कहने को तो हमारा देश कब का आजाद हो चुका है. लेकिन एक वर्ग ऐसी है जो अपने अस्तित्व की लड़ाई आज भी लड़ रही है. वो वर्ग और कोई नहीं महिला वर्ग है. आज महिलाओं के इस संर्घष में कुछ हाथ तो आगे आए है पर एक संर्घष ऐसा है जिसमें कितने भी हाथ आगे क्यों न आ जाए लेकिन यह लड़ाई महिलाओं को अकेले ही लड़नी पड़ती है. और वो लड़ाई है खुद के अस्तित्व और स्वाभिमान की. 

जब किसी महिला के साथ दुषकर्म किया जाता है तो उस पीड़िता को न र्सिफ खुद का सामना करना पड़ता है बल्कि उसे समाज के सामने भी खुद को निर्दोष साबित करना पड़ता है. कैसे भी कर के पीड़िता संभलने तो लग जाती है पर हमारी सोसाइटी उसे हीन भावना से देखने लगती है. उस समय तो यह समझ ही नहीं आता कि आखिर गलत कौन है? जिसने अपनी हवस मिटाने के लिए किसी की आत्मा को रौंद दिया या जिसका आत्मा रौंदा गया. दुष्कर्म की घटना को अंजाम देने में तो कुछ क्षण का समय लगता है लेकिन जिसके साथ यह घटना घटित होती है उसे अपने जीवन के अंतिम समय तक संर्घष करना पड़ता है. और इस संर्घष का सामना पीड़िता के परिवार को भी करना पड़ता है. क्योंकि इस घटना के बाद पीड़िता व उसके परिवार के साथ ऐसा व्यवहार किया जाता है जैसे वो इस समाज का हिस्सा है ही नहीं. 

ऐसी ही एक घटना बिहार के भोजपुर से सामने आई है. आरोप है कि छह लोगों ने एक युवती के साथ गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया. और न सिर्फ घटना को अंजाम दिया बल्कि दुष्कर्म की घटना के बाद युवती का अश्लील वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर भी वायरल किया. इस घटना के बाद पीड़िता ने कृष्णागढ़ थाना में उक्त बदमाशों के खिलाफ मामला दर्ज कराया. मामला दर्ज होने के बाद कोर्ट ने इस मामले में एक आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जबकि पांच आरोपियों को नाबालिग बता कर बेल दे दिया गया. नाबालिग होने के वजह से आरोपियों को बेल तो मिल गई लेकिन इन 5 आरोपियों की एक भी हरकत नाबालिकों वाली नहीं है. बेल मिलने के बाद ये आरोपी पीड़िता के घर पहुंच गए और उनके खिलाफ दर्ज करवाया गया मामला वापस लेने के लिए दबाव बनाया. और जब पीड़िता ने उनकी बात मानने से इनकार कर दिया तो पीड़िता के घर पर पत्थरबाजी करना शुरू कर दिया. इतना ही नहीं पीड़िता के घर वालों के साथ मारपीट भी किया. जिसमें पीड़िता और उसके परिवार वालों को चोट भी आयी. साथ ही पीड़िता के अन्य रिश्तेदार जो गांव में रहते हैं उनके साथ भी मारपीट को अंजाम दिया. 

घटना की जानकारी मिलते ही कृष्णगढ़ थानाध्यक्ष दल-बल के साथ घटना स्थल पर पहुंच गये और स्थिति को नियंत्रण किया. लेकिन यहां सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक ऐसी दुष्कर्म की घटना को अंजाम देने वाले आरोपी इस तरह खुले आम घूमेंगे और जिसने इसके खिलाफ आवाज उठायी है उसे घर में बैठना पड़ेगा. मानो या न मानो लेकिन आज भी हमारा समाज रेप पीड़िता को ओछी नजर से देखता है. कब तक नाबालिग होने के बाद ऐसी घटना को अंजाम देने वाले ऐसे ही छूट जाएंगे. 

मेरा एक सवाल बिहार सरकार से है कि क्या आज कानून व्यवस्था ठप पड़ी हुई है. आरोपी खुले आम रेप की घटना को अंजाम देते हैं, बेफ्रिक हो कर रेप की वीडियो बनाते है और फिर उसे सोशल मीडिया पर वायरल करते हैं. क्या इसी कानून व्यवस्था की बिहार के मुखयमंत्री नीतीश कुमार बात करते है. जिसमें ऐसी घटना के आरोपी खुले आम घूम सकें. चुनावी रैली में महिला सुरक्षा के नाम पर बड़े-बड़े वादे तो वोट बैंक के लिए कर दिेए गए लेकिन कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा दोनों ही एक बड़ी चुनौती है. आज ऐसी घटना के बाद कौन मां बाप अपनी बेटी को अकेली जाने देने से नहीं डरेगा ? कैसे कोई लड़की आजादी से अपने सपने को पंख देगी? रेप जैसी घटना के बाद कैसे कोई पीड़िता इसके खिलाफ अपनी आवाज उठाएगी? इस तरह की घटना बिहार की कानून व्यवस्था पर सवालिया निशान उठाती है. सवाल यह कि क्या बिहार में आज भी बाहुबलियों का वर्चस्व कायम है!