भारत की आधार प्रणाली से सीख ले दुनिया, होगा बड़ा फायदा: बिल गेट्स

एक कहावत है कि शेर जब एक कदम पीछे लेता है तो इसका मतलब है कि वह लंबी छलांग लगाने की जुगत में है. भारत की अर्थव्यवस्था को ले कर दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति बिल गेट्स भी कुछ ऐसी ही सोच रखते हैं. बिल गेट्स ने कहा कि 2020 के बाद से भारत विश्व में तेजी से विकसित होने वाला देश बन सकता है. 

भारत की आधार प्रणाली से सीख ले दुनिया, होगा बड़ा फायदा: बिल गेट्स

नई दिल्ली: विमुद्रीकरण और अर्थव्यवस्था के लिए केंद्र सरकार की ओर से अपनाई गईं नीतियां तात्कालिक समय में भले ही कुछ खास कमाल न दिखा पाईं हों, लेकिन लांग टर्म में इसका फायदा देखने को मिलेगा, इसकी जानकारी कई दफा अर्थशास्त्रियों ने रिपोर्टों के जरिए दे दी है. अब दुनिया के सबसे अमीर इंसान बिल गेट्स ने इस बात को दोहराया कि भारत के अंदर विकास की आपार संभावनाएं हैं. अगले एक दशक में विश्वी की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में विकास की गति भी काफी तेज होगी. इससे बड़ी संख्या में लोग गरीबी से निकल सकेंगे. शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक सबकी पहुंच होगी और इनमें निवेश का ग्राफ लगातार बढ़ता ही रहेगा. 

आधार प्रणाली से आसान योजनाओं का लाभ उठाना

बिल गेट्स हाल ही में फिर से अमेजन के फाउंडर जेफ बेसोज को पीछे छोड़ फिर ब्रह्मांड के सबसे अमीर व्यक्ति बन बैठे हैं. फिलहाल वह एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में तीन दिवसीय दौरे पर हैं. इस बीच गेट्स भारत की आर्थिक नीतियों को नजदीक से जान पा रहे हैं और उसकी समीक्षा भी कर रहे हैं. बिल गेट्स भारत सरकार की आधार प्रणाली से काफी प्रभावित नजर आए. उन्होंने इसकी तारीफ करते हुए कहा कि आधार के जरिए सबकी पहचान को निर्धारित कर उसे योजनाओं से जोड़ना लोगों के लिए काफी आसान और सुरक्षित बना देता है. भारत में आधार व्यवस्था के मुख्य जनक माने जाने वाले नंदन नीलेकणि की बिल गेट्स ने खूब तारीफ की. उन्होंने कहा कि सेवाओं का लाभ उठाने के लिए जो यह प्रयास किया गया वह काबिल-ए-तारीफ है. 

लांग टर्म में भारतीय अर्थव्यवस्था को होगा बड़ा फायदा

बिल गेट्स दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति हैं. पैसे कमाने और बनाने के तौर-तरीकों और अर्थव्यवस्था की नब्ज पहचानने में माहिर भी हैं. भारत में जो अर्थव्यवस्था सुधार के कदम उठाए गए हैं, उनमें से ज्यादातर लांग टर्म प्लान हैं. विमुद्रीकरण के बाद जो भारतीय बाजार पर प्रभाव पड़े उसकी आलोचना से परे एक पक्ष उससे हुए फायदों को भी दर्शाता है. भारत में जो कैश में पड़ा कालाधन था या पैसों की जो जमाखोरी की गई थी, उन सब पर लगाम कसने में यह काफी लाभकारी भी रहा. भारत फिलहाल 5.3 फीसदी की रियल जीडीपी के साथ विकास की राह पर है. हालांकि, यह पिछले 5 सालों में सबसे कम है. बाजार में आई आर्थिक मंदी ने कई क्षेत्रों को रेंगने को मजबूर कर दिया है. लेकिन सरकार की ओर से उठाए गए कदम अगले 5-7 सालों में अर्थव्यवस्था के लिए कैप्सूल का काम करने जा रहे हैं. 

मंदी से निपटने को ये अपनाए गए हैं कदम

भारत सरकार ने बाजार में पैसों की आवाजाही को प्रभावित न होने देन के लिए एक रोडमैप तैयार किया है. बैंक दरों में कटौती कर बाजार में लेन-देन को प्रभावित होने से बचाने की भी कोशिश की जा रही है. इसके अलावा भारत सरकार का सबसे बड़ा कदम जिसमें भारत के टॉप और अनुभवी अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों की एक पैनल तैयार की गई है. इस पैनल का काम भारत की आर्थिक नीतियों की समीक्षा करना और बेहतर परिणाम के लिए उन्हें ढ़ालना भी है. भारत की पूरी अर्थव्यवस्था फिलहाल 2.73 ट्रिलियन की है जिसे 2022 तक पांच ट्रिलियन तक पहुंचाने की रणनीति पर मोदी सरकार काम कर रही है. 

भारत की आर्थिक नीतियों की कर रहे समीक्षा

बिल गेट्स अपने तीन दिनों के भारत यात्रा पर आर्थिक नीतियों को समझ पा रहे हैं. आधार प्रणाली के बारे में बात करते हुए उन्होंने नंदन नीलेकणि की भी जमकर तारीफ की. दूसरे देशों को भारत की इस प्रणाली को समझने और अपनाने की भी हिदायत दी. उन्होंने कहा कि भारत में वित्तीय सेवाओं से लेकर दवा क्षेत्र में काफी अच्छे प्रयास किए जा रहे हैं. इसके अलावा टीकाकरण और विनिर्माण क्षेत्र में भी बेहतर और सबकी पहुंच संभव हो सके, उस पैटर्न पर काम किया जा रहा है, जो काबिल-ए-तारीफ है. 

गरीबी से लड़ने को बिहार की तारीफ की

बिल गेट्स इस दौरान भारत के विभिन्न शहरों और क्षेत्रों में जाएंगे. बिहार की राजधानी पटना में भी बिल गेट्स का एक कार्यक्रम था. इस दौरान वे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री से भी मिले. बिहार सरकार के गरीबी को मिटाने और सात निश्चय योजना की भी उन्होंने खासी तारीफ की. पिछले 20 सालों में बिहार ने बीमारियों से लड़ने और मोर्टलिटी रेट पर काफी प्रगति हासिल की है. गरीबी को कम करने के लिए राज्य सरकार की योजनाओं से काफी सहयोग मिला है.