दिल्ली की हवा में सांस लेना यानि 28 सिगरेट रोज पीने जैसा! देखें रिपोर्ट

दिल्ली की हवा एक बार फिर खराब हो गई है, एक बार फिर दिल्ली की हवा में जहर घुलने लगा है. एक रिपोर्ट के मुताबिक सुबह-शाम की सैर करना भी खतरनाक हो चुका है.

दिल्ली की हवा में सांस लेना यानि 28 सिगरेट रोज पीने जैसा! देखें रिपोर्ट

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली की सांसे एक बार फिर घुटने लगी है. दिल्ली में अब घरों में कैद होने के दिन आ गए है. दरअसल, पड़ोसी राज्य हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में पराली जलाने से दिल्ली में वायु प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है. दिल्ली और आसपास के इलाकों में प्रदूषण के कारण हवा काफी जहरीली हो गई है. दिल्ली विश्वविद्यालय, लोधी रोड़ और IGI एयरपोर्ट पर Air Quality Index खराब हुआ है. राजधानी में सुबह और शाम सैर नहीं करने की सलाह दी गई है.

AIIMS के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. करण मदान का कहना है कि 'अगर कोई दौड़ रहा है, खासकर छोटे बच्चों को रेस्परी रेट व्यस्क से ज्यादा होता है. तो थोड़ी मेहनत पर खाफी सांस लेते है. एक्सरसाइज में जो प्रदूषण EXPOSOR है वो बढ़ जाता है. जब आप खुले में है और दौड़ रहे है. एक्सरसाइज कर रहे है या वॉकिंग कर रहे है. तो आप जितनी ज्यादा सांसे ले रहे है तो आपका POLLUTED EXPOSOR ज्यादा बढ़ जाता है.'

पराली जलाने की तस्वीरें लगातार सामने आ रही हैं. सरकार की रोक के बावजूद किसान खुलेआम पराली जला रहे हैं. दिल्ली के पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की तस्वीरों को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने भी कड़ी नाराजगी जताई है. एनजीटी ने हरियाणा, पंजाब और यूपी सरकार को सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि अफसरों की जवाबदेही तय करे और कार्रवाई रिपोर्ट 2 नवंबर को पेश करें.

सर्दी की दस्तक के साथ दिल्ली पर जहरीली हवाओं का अटैक नई बात नहीं है.
डब्ल्यूएचओ (WHO) की रिपोर्ट के मुताबिक...

  • दिल्ली की हवा दुनिया के 1600 शहरों की हवा के मुकाबले सबसे ज्यादा जहरीली है
  • दिल्ली में 50 फीसदी बच्चों के फेफड़े प्रदूषित हवा की वजह से प्रभावित हो चुके हैं
  • आप सिगरेट पीते हो या नहीं लेकिन दिल्ली की हवा में सांस लेना यानि 28 सिगरेट रोज पीने जैसा है

आकड़ों से साफ है कि अगर दिल्ली को बचाना है तो दिल्ली की हवा को बचाना बेहद जरूरी है. इस बीच सियासी बयानबाजी का सिलसिला भी तेजी से बढ़ता जा रहा है. कभी दिल्ली भाजपा प्रमुख सीएम केजरीवाल पर निशाना साधते हैं तो कभी केजरीवाल सारा गुस्सा भाजपा पर निकालने लगते हैं. राजनीतिक बयानबाजियों के बजाय सरकार और सियासी दलों को इसके निवारण की ओर जल्द ध्यान देना होगा.