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मुलायम से दोस्ती निभाने के लिए अपनी घनघोर बेइज्जती को भुला बैठीं मायावती

उत्तर प्रदेश के मुख्य विपक्षी दलों बसपा और सपा को भाजपा का डर इतना ज्यादा सता रहा है कि वो अपने साथ हुई बदसलूकी को भी भुला बैठीं. 24 साल पुराने गेस्ट हाउस कांड में उन्होंने सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के खिलाफ मुकदमा वापस ले लिया है. आईए आपको बताते हैं कि इस जघन्य कांड के दौरान हुआ क्या था- 

मुलायम से दोस्ती निभाने के लिए अपनी घनघोर बेइज्जती को भुला बैठीं मायावती
फाइल फोटो

नई दिल्ली: बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष मायावती ने समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के साथ अपने सभी पुराने गिले शिकवे दूर करने का मन बना लिया है. उन्होंने इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में एक शपथ पत्र दाखिल किया है. जिसमें 24 साल पुराने गेस्ट हाउस कांड का मुकदमा वापस लेने की बात कही गई है. 

मायावती के इस कदम से मुलायम को बड़ी राहत
बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने इस बात की जानकारी दी है कि 26 फरवरी 2019 को सुप्रीम कोर्ट से गेस्ट हाउस कांड वाले केस को खारिज और वापस ले लिया गया. सुप्रीम कोर्ट में क्रिमिनल नंबर 126/2009 को खारिज किया गया. इस मामले में सिर्फ मुलायम सिंह के खिलाफ उन्होंने मुकदमा वापस लिया है.

पहले ही हो चुका था समझौता
खबरों के मुताबिक लोकसभा चुनाव(Loksabha election) से पहले ही सपा और बसपा के बीच हुए गठबंधन के दौरान ही यह केस वापस लिए जाने का फैसला लिया जा चुका था. मुलायम के बेटे और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने मायावती से गेस्ट हाउस केस में अपने पिता के खिलाफ मुकदमा वापस लेने का अनुरोध किया था. जिसके बाद फरवरी में ही मायावती ने मुलायम के खिलाफ केस वापस लेने का शपथ पत्र दे दिया था.

लेकिन इस बात की जानकारी किसी को भी नहीं दी गई. यह खबर अब जाकर मीडियाके सामने आई है. 

बेहद भयानक था गेस्ट हाउस कांड
लखनऊ का गेस्ट हाउस कांड पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति के उपर बेहद भद्दा दाग है. इस घटना ने मायावती और मुलायम सिंह जैसे बड़े स्तर के नेताओं के निजी रिश्तों में ऐसी तल्खी पैदा कर दी, जो कि पूरे 24 साल तक चली.

इस दौरान दोनों नेताओं ने सार्वजनिक मंचों से एक दूसरे के खिलाफ खूब जहर उगला. 

क्या हुआ था गेस्ट हाउस कांड में
गेस्ट हाउस कांड 2 जून 1995 को हुआ था. इस घटना के दौरान लखनऊ के स्टेट गेस्ट हाउस में मायावती को समाजवादी पार्टी की शह पर गुंडों ने घेर लिया था. मायावती उस दिन इस गेस्ट हाउस के कमरा नंबर -1 में ठहरी हुई थीं. उनके साथ बसपा के कई विधायक और कार्यकर्ता मौजूद थे. तभी वहां सपा समर्थित गुंडे आए और बसपा विधायकों का अपहरण करके उन्हें गाड़ियों में भर कर ले जाने लगे. इस दौरान जमकर मारपीट हुई, गेस्ट हाउस की बत्ती काट दी गई. मायावती ने खुद को बचाने के लिए कमरे के अंदर बंद कर लिया. वहां घंटों तक मारपीट और हिंसा चलती रही. इस दौरान राज्य पुलिस मूकदर्शक बनकर देखती रही.

बाद में भाजपा नेता लालजी टंडन और ब्रह्मदत्त द्विवेदी वहां पहुंचे और सपा के गुंडों के हाथों से बचाकर मायावती को वहां से निकाल कर ले गए. 

गेस्ट हाउस कांड के पीछे ये थी वजह 
गेस्ट हाउस कांड के पीछे की वजह राजनीतिक थी. दरअसल साल 1993 में उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी ने मिलकर चुनाव में जीत हासिल की थी. जिसके बाद दोनों के बीच 2.5 - ढाई साल तक सरकार चलाने का समझौता हुआ. पहले मुलायम सिंह मुख्यमंत्री बने और उन्होंने 2.5 साल बाद मुख्यमंत्री पद छोड़ने से इनकार कर दिया. जिससे नाराज होकर बहुजन समाज पार्टी ने समर्थन वापस ले लिया और मुलायम सरकार अल्पमत में आ गई. जिसके बाद सपा ने बाहुबल से अपनी सरकार बनवाने का फैसला किया.

 

मायावती समेत बसपा के विधायक लखनऊ के स्टेट गेस्ट हाउस में टिके हुए थे. जिन्हें डराने धमकाने के लिए सपा के नेताओं ने गेस्ट हाउस कांड कर डाला. इस कांड में हजरतगंज कोतवाली में तीन मुकदमे दर्ज हुए. इस मामले की तफ्तीश सीबीसीआईडी को दी गई और सीबीसीआईडी ने अरोपपत्र अदालत में दाखिल किया. 

लेकिन अब समय की नदी में बहुत पानी बह चुका है. मायावती और मुलायम को राजनीतिक मजबूरियों की वजह से रिश्ते सुधारने पड़े. जिसका नतीजा है कि मुलायम पर से गेस्ट हाउस कांड का मुकदमा वापस ले लिया गया.