अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट के गठन में जुटी केंद्र सरकार

अयोध्या राम मंदिर जो 491 सालों के लंबे इतिहास से जुड़ा मामला है, उस पर सुप्रीम कोर्ट ने आखिरकार अपना फैसला सुनाया और मंदिर निर्माण के पक्ष में फैसला सुनाया. सुप्रीम कोर्ट ने इसका जिम्मा ट्रस्ट को दिया है जिसका गठन केंद्र सरकार करेगी. जिसके बाद सरकार ने इसके लिए कदम उठाना शुरु कर दिया. 

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट के गठन में जुटी केंद्र सरकार

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को हरी झंडी दिखा दी है. केंद्र सरकार ने अब उस फैसले से आगे जाने की राह बनानी शुरू कर दी और ट्रस्ट के गठन करने की प्रक्रिया शुरू कर दी. सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कहा गया था कि मंदिर निर्माण की प्रक्रिया का जिम्मा केंद्र सरकार की ओर से गठित एक ट्रस्ट के माध्यम से की जाएगी. उस ट्रस्ट के गठन के लिए केंद्र सरकार ने अदालत के फैसले को बेहतर समझने के लिए एक टीम बनाई है. उस टीम को भारत सरकार के अटॉर्नी जनरल और विधि मंत्रालय से राय-मशवरा करने की हिदायत भी दी गई है. 

अधिकारियों की टीम कर रही है फैसले की समीक्षा 

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या राम मंदिर विवाद पर जो फैसला सुनाया था, वह एक 1045 पेज के रिपोर्ट में लिखी हुई है. उस फैसले के विषय में कुछ तकनीकी चीजें भी हैं जिसके लिए केंद्र सरकार ने अधिकारियों की टीम बिठाई है. टीम पूरे फैसले को विस्तार से समझेगी और तब ट्रस्ट से जुड़े नियमन को तैयार किया जाएगा. हालांकि, ट्रस्ट की नोडल ईकाई का जिम्मा किस मंत्रालय के अंदर होगा, इसकी भी कोई जानकारी मिल नहीं पाई है. अधिकारी ने बताया कि संभवतः इसका जिम्मा भारत सरकार के गृह या संस्कृति मंत्रालय में से किसी एक के पास होगा. ये सारी प्रक्रियाएं केंद्र सरकार को तीन महीने के अंदर ही पूरी करनी है. 

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क्या था पूरा मामला ?

मालूम हो कि शनिवार को बहुप्रतीक्षित अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया जिसमें रामजन्मभूमि न्यास की विवादित भूमि पर दावे को सही ठहराया गया. इसके अलावा सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में ही उस जगह से अलग जमीन देने की हिदायत भी दी. उच्चतम न्यायालय ने इस फैसले में कहा था कि मंदिर निर्माण की प्रक्रिया सरकार किसी ट्रस्ट के माध्यम से कराए और यह प्रक्रिया तीन महीने के भीतर ही पूरी हो. 2.77 एकड़ की विवादित भूमि पर अब रामलला विराजमान को पूजा करने की भी अनुमति दे दी गई है. कोई इसे आजादी के बाद से सुप्रीम कोर्ट का सबसे बड़ा फैसला बता रहा है तो कोई इसे हिंदू पक्ष की जीत. लेकिन अब देखना यह है कि मंदिर निर्माण की प्रक्रिया में कितने दिन निकल जाते हैं.