भतीजे के आरोपों का चाचा ने दिया करारा जवाब, चिराग को बताया तानाशाह

लोक जनशक्ति पार्टी में अधिकार को लेकर जंग जारी है.  चिराग पासवान ने लंबी लड़ाई के लिए तैयार रहने की बात कही, तो चाचा पशुपति पारस ने जवाब देते हुए कहा कि असली एलजेपी मेरा है. उन्होंने चिराग को तानाशाह बताया.

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Jun 16, 2021, 07:38 PM IST
  • चाचा ने चिराग को तानाशाह करार दिया
  • गुरुवार को अध्यक्ष पद का होगा चुनाव!

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भतीजे के आरोपों का चाचा ने दिया करारा जवाब, चिराग को बताया तानाशाह

नई दिल्ली: LJP में छिड़ी जंग के बीच चाचा-भतीजे ने एक दूसरे पर खुलकर जुबानी हमला करना शुरू कर दिया है. चिराग पासवान ने चाचा के खिलाफ हुंकार भरते हुए खुद को शेर का बेटा बताया तो चाचा पशुपति पारस ने उन्हें तानाशाह करार दे दिया.

चाचा पशुपति पारस का चिराग पर हमला

पशुपति पारस ने कहा कि 'मुझे संसदीय दल का नेता चुना गया और इसके बाद अब अध्यक्ष पद का चुनाव होगा. कल पूरे देश के नेशनल एक्सक्यूटिव की बैठक बुलाई गई है. कल नामांकन के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होगा. चुनाव के बाद चुनाव आयोग को परिणाम सौपेंगे.'

उन्होंने ये भी कहा कि 'चुनाव आयोग से मुहर लगेगी और पार्टी काम करेगी. किसी ने किसी के पीठ में छुरा नहीं घोंपा, चिराग पार्टी में तानाशाही कर रहे थे. लोकसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन में लड़े फिर ऐसी कौन सी परिस्थिति आ गई कि अकेले चुनाव लड़े, चिराग इसका जबाब दें.

पारस ने कहा कि 99 फीसदी कार्यकर्ता के भावना को दरकिनार कर चिराग अकेले चुनाव लड़ गए. उन्होंने पार्टी को बर्बाद कर दिया, अब वे क्या कहते हैं इससे फर्क नही पड़ता. लोकतांत्रिक व्यवस्था है, बहुमत का निर्णय मान्य होगा.

उन्होंने बोला कि पार्लियामेंट सर्वोच्च है उसका निर्णय मानना होगा. रामविलास पासवान के सपने को पूरा करेंगे. दूर दराज के इलाकों में जाकर पार्टी के नीति सिद्धान्त को रखते हुए जनाधार बढ़ाएंगे.

भतीजे को कोसते हुए चाचा ने बोला कि चिराग पासवान ने गलत किया, उन्हें किसी को बिना कारण बताए हटाने का अधिकार नहीं. जब वे अध्यक्ष रहे ही नहीं तो फिर उन्हें अधिकार कहां रह गया. चिराग ने पार्टी विरोधी काम किया. सबकी भावना को आहत किया और किसी का मान सम्मान नहीं रखा. पत्र जो लिखा गया है वह सरासर गलत है. होली दिन पत्र भेजने की बात भी झूठ है.

सूरजभान सिंह ने भी चिराग पर किया प्रहार

कार्यकारी अध्यक्ष होने का दावा करने वाले सूरजभान सिंह ने कहा कि 'हर दल को अपना नेता चुनने का अधिकार है. पांच सांसद एक होकर अपना नेता चुन लिए तो चिराग को अब कोई अधिकार नहीं है. चिराग पासवान को घर मे बैठकर बातचीत करनी चाहिए थी. पार्टी उनका था कल भी आज भी, वे नहीं उनके चाचा बन गए इसमें ऐसी कौन सी बात हो गई.'

उन्होंने कहा कि कोई बाहर का व्यकि तो आकर नहीं बैठ गया? और न ही किसी दल में विलय कर गया? सब कुछ उन्हीं का है, लेकिन मिल-बैठकर करते कुछ दिन पारस जी के साथ काम करके फिर आगे बढ़ते. सब कुछ उनका है, लेकिन उन्होंने बहुत कोशिश के बाद भी कोई बात नहीं सुनी.

सूरजभान ने बोला कि 'कल राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होगा. यह बात भी तय है कि परिवार भी बचेगा और पार्टी भी बचेगी. पार्टी अच्छे से चलेगी, लेकिन कुछ लोग ऐसा काम न करें जिससे बाद में बदनामी झेलनी पड़े. चिराग पासवान की यह बात कि उन्होंने पहल की यह सही नहीं है.'

चिराग पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि 'दो सौ बार उनके मामले को ईमानदारी से हल करने की मैंने कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने. चिराग पासवान को बार-बार अप्रोच किया लेकिन वे किस उम्मीद से चल रहे थे कहना मुश्किल है. आखरी भेंट तक चाहा कि सुलह हो जाये लेकिन वे नही सुने. हम एलजेपी के सिपाही हैं और सिपाही रहेंगे.'

चिराग पासवान ने स्वीकार की अपनी गलती!

वहीं बिहार चुनाव को लेकर चिराग पासवान ने अपनी गलती मानी. चिराग ने कहा कि 'LJP ने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया. कुछ कारणों से JDU के साथ गठबंधन से मना किया. BJP, JDU, LJP बिहार में साथ होती तो नतीजा एकतरफा होता. मैंने बिहार से प्यार किया इसलिए मुखर रहा, मेरे चाचा ने बिहार में प्रचार में साथ नहीं दिया.'

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