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इसरो चीफ बोले-चंद्रयान की सॉफ्ट लैंडिंग करा कर दिखाएगा इसरो

इसरो चीफ के.सिवन शनिवार को आईआईटी-दिल्ली के 50वें दीक्षांत समारोह में पहुंचे थे. यहां उन्होंने छात्रों से अपना अनुभव साझा किया साथ ही उन्हें आज की जटिलताओं से निपटने में अधिक सक्षम बताया. इस मौके पर उन्होंने चंद्रयान-2 की भी बात की और कहा कि यह कहानी का अंत नहीं है. इसरो भविष्य में चंद्रयान की सॉफ्ट लैंडिंग करके दिखाएगा. 

इसरो चीफ बोले-चंद्रयान की सॉफ्ट लैंडिंग करा कर दिखाएगा इसरो

नई दिल्लीः इसरो चीफ के. सिवन ने शनिवार को कहा कि चंद्रयान-2 कोई अंत नहीं है. इसरो भविष्य में चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग जरूर कर दिखाएगा. इसके लिए संस्थान अपना पूरा अनुभव, ज्ञान व कौशल लगा देगा और आने वाले समय में सॉफ्ट लैंडिंग करेगा. इसरो चीफ के. सिवन आईआईटी-दिल्ली के 50वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे. उन्होंने कहा, 'आप सभी लोग चंद्रयान-2 मिशन के बारे में जानते हैं. तकनीकी पक्ष की बात करें तो यह सच है कि हम विक्रम लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग नहीं करा पाए, लेकिन पूरा सिस्टम चांद की सतह से 300 मीटर दूर तक पूरी तरह काम कर रहा था.'

69 सेकंड पहले टूटा था संपर्क
इसरो चीफ ने कहा कि मानव स्पेसफ्लाइट कार्यक्रम एल-1 सोलर मिशन पर हमारी योजनाएं ट्रैक पर हैं. आने वाले महीनों में कई एडवांस सैटेलाइट लॉन्च करने की योजना है. चंद्रयान-2 का लैंडर विक्रम 6 सितंबर को चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला था, लेकिन तय समय से 69 सेकंड पहले उसका पृथ्वी से संपर्क टूट गया था. सिवन ने आईआईटी छात्रों से कहा, मैं अपने अनुभव से कह सकता हूं कि आईआईटी भारत का ऐसा संस्थान है जिसमें सभी पढ़ना चाहते हैं. मैं इस बात को लेकर आश्वस्त हूं कि आप सभी दिल्ली और आईआईटी की श्रेष्ठ विरासत को आगे बढाएंगे. आईआईटी के छात्रों ने जिस किसी भी क्षेत्र में काम किया, उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है. उन्होंने बताया कि चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग भले ही न हो पाई हो, लेकिन ऑर्बिटर ने चांद पर सोडियम, कैल्शियम, एल्यूमीनियम, सिलिकॉन, टाइटेनियम और आयरन ढूंढ निकाले हैं. इसरो ने 5 अक्टूबर को बताया था कि ऑर्बिटर में मौजूद 8 पेलोड ने आवेशित कणों और इसकी तीव्रता का पता लगाया है. चंद्रयान-2 के सभी पेलोड अपना काम बेहतरीन तरीके से कर रहे हैं.

छात्रों से बांटा अपना अनुभव
भारत में तकनीकी शिक्षा के लिए आईआईटी को बेहद महत्वपूर्ण करार देते हुए के. सिवन ने कहा कि मैं तीन दशक पहले आईआईटी बॉम्बे से ग्रैजुएशन किया था. तब जॉब की स्थिति आज जैसी नहीं थी. उन्होंने कहा कि उस दौर में स्पेशलाइजेशन के क्षेत्र में सीमित ही विकल्प थे, लेकिन आज काफी अवसर हैं. इसके अलावा आज के दौर में अस्थिरता, अनिश्चितता और जटिलता बढ़ी है. हालांकि उन्होंने आईआईटी के छात्रों से कहा कि आप सभी लोग इन सभी स्थितियों से निपटने में पिछली पीढ़ी के मुकाबले ज्यादा सक्षम हैं.