राजस्थान के उद्योग महकमे में किया जा रहे हैं नीतिगत बदलाव

राजस्थान का उद्योग महकमा इन दिनों औद्योगिक वातावरण बनाने के लिए नीतिगत प्रयास पर जो दे रहा है. रीको की समीक्षा बैठक में भी इसका असर देखने को मिला. 

राजस्थान के उद्योग महकमे में किया जा रहे हैं नीतिगत बदलाव

जयपुर: उद्योग मंत्री परसादीलाल लाल मीणा की अध्यक्षता में उद्योग भवन में हुई बैठक में रीको से जुड़ी बजट घोषणाओं, नए प्रस्तावों, संभागवार हुई बैठकों में आई समस्याओं के निपटारे, विकास कार्यों का अपडेट, नई रियायतों के मसौदे समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई. बैठक में एसीएस उद्योग डॉ सुबोध अग्रवाल, रीको एमडी आशुतोष एटी पेडनेकर मौजूद रहे. 

आर्थिक मंदी में बनेंगे सहयोगी

उद्योग विभाग की ओर से संभागवार की गई उद्यमियों से चर्चा में सबसे अधिक शिकायतें रीको प्रबंधन को लेकर आई थी. रीको की समीक्षा बैठक में भी उद्योग मंत्री परसादीलाल मीणा के निशाने पर अधिकारियों की सुस्त, लापरवाह और कामचोर नीति रही. उद्योग मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट चेताया की प्रदेश सरकार नई नीतियों के जरिए उद्योग स्थापना और रोजगार संभावनाओं को प्रमुखता दे रही है. रीको के अधिकारी भी इसमें भागीदार बनें. 

उद्योग मंत्री ने नई योजनाओं और नीतियों के पोस्टर अभी तक क्षेत्रीय केंद्रों पर नहीं लगाने पर नाराजगी जाहिर की. साथ ही केवल जमीन की बिक्री पर फोकस रखने की भावना में बदलाव की बात कही. एसीए उद्योग डॉ सुबोध अग्रवाल ने कहा कि रीको पर प्रदेश की नई नीतियों को लागू करने की अहम जिम्मेदारी है. साथ ही नई नीतियों को लागू करने के प्रयास भी तेज करने होंगे. 

नए औद्योगिक क्षेत्रों में कितनी हुई प्रगति, इसकी होगी समीक्षा

बैठक में नए औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना की प्रगति रिपोर्ट पर भी चर्चा हुई. औद्योगिक पचपदरा में स्थापित हो रही रिफाइनरी के नजदीक एकीकृत औद्योगिक जोन की स्थापना की कार्ययोजना की भी समीक्षा हुई. बैठक में बड़ी चर्चा उद्यमियों से सालाना वसूले जाने वाले शुल्क को लेकर रही. उद्योग मंत्री ने सुझाव दिया की मंदी को देखते हुए उद्यमियों से वसूले जा रहे सुविधा शुल्कों में अगले तीन साल तक इजाफा नहीं किया जाए. अच्छा होगा अगर सालाना वसूली की बजाय इसे तीन या पांच साल में लिया जाए. इसको लेकर रीको को कार्ययोजना बनाने की जिम्मा भी दिया गया.

रीको की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए की जमीनों के सौदागर बनने की बजाय उद्योग हितैषी माहौल बनाने और नीतिगत प्रावधानों को मजबूती देने का काम अधिकारी करें. प्रदेश सरकार ने एक साल में विभिन्न रियायतें उद्यामियों को प्रदान की हैं उनके आधार पर नया निवेश बढ़ाया जाए.