एक और डोकलाम की तैयारी कर रहा चीन, अरूणाचल में की फिर घुसपैठ

चीन की विस्तारवादी नीति से उसके पड़ोसी देशों में अकसर विवाद होते ही रहता है. भारत के साथ तो चीन के बहुआयामी विवादित मामले हैं. अरूणाचल प्रदेश को लेकर भी दोनों देशों में तनातनी है. भारत के इस राज्य में चीन ने अपनी मंशा को दबे-पांव अंजाम देना शुरू कर दिया है. इस खतरे को भांप कर सदन में उठाया अरूणाचल से भाजपा के सांसद तपिर गाव ने.

एक और डोकलाम की तैयारी कर रहा चीन, अरूणाचल में की फिर घुसपैठ

नई दिल्ली: पिछले दिनों शीतकालीन सत्र के दौरान अरूणाचल प्रदेश के सांसद तपिर गाव ने चीन के रवैये को सदन के सामने रखा और कहा कि ड्रैगन धीरे-धीरे प्रदेश में 50-60 किमी अंदर तक आ गया है. और अब अपने पांव पसारने की कोशिश में लगा हुआ है. तपिर गाव ने इस पर अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि यह किसी भी तरह से भारत के लिहाज से सही नहीं.

उन्होंने कहा कि चीन के इस व्यवहार पर ना ही कोई राजनीतिक दल ना ही कोई मीडिया की नजर जा पा रही है. चीन ने पिछले कुछ दिनों में प्रदेश के अंदर अपने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं और सबसे बड़ी चिंता की बात राजनयिक हिसाब से यह है कि भारत के तमाम बड़े और इज्ज्तदार पदों पर बैठे किसी भी नेता या पदाधिकारी के अरूणाचल दौरे पर जाने से अपनी आपत्ति जता रहा है. 

चगलागम में चीन धीरे-धीरे जमाता जा रहा है कब्जा

तपिर गाव ने यह भी बताया कि चीन चगलगाम में तकरीबन 50-60 किमी वर्ग की भूमि को अपने कब्जे में करने की फिराक में है. चगलागाम मैकमोहन लाइन से तकरीबन 100 किमी की दूरी पर है. वहीं मैकमोहन लाइन जो भारत और चीन के बीच का बॉर्डर है. लेकिन अगर चीन चगलागाम से 25 किमी दूरी पर पुल का निर्माण करा रहा है तो ऐसी स्थिति में इसका मतलब यह निकलता है कि वह हमारे भारतीय सीमा में तकरीबन 60-70 किमी अंदर आ चुका है. तपिर गाव का मानना है कि यह प्रदेश के हिसाब से बिल्कुल भी अच्छी खबर नहीं है. भारतीय यात्राओं पर चीन जिस तरीके से तंज कसने लगा है, इसके कुछ अच्छे परिणाम नहीं निकल सकते. 

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गृहमंत्री राजनाथ सिंह के यात्रा पर चीन ने जताया विरोध

अभी हाल ही में देश के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह अरूणाचल प्रदेश में सिसेरी नदी पुल का शिलान्यास करने पहुंचे थे. इस दौरे का चीनी राजनयिकों ने विरोध करना शुरू कर दिया. यह हाल के दिनों में भले नया न हो लेकिन देखा जाए तो इसका परिणाम कुछ अच्छा नहीं होता. शुरुआती दिनों में किसी भी भारतीय संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्ति की यात्रा पर चीनी मीडिया ही कोई आपत्तिजनक बयान या रिपोर्ट प्रकाशित करती थी.

लेकिन धीरे-धीरे चीनी राजनयिकों ने आधिकारिक तरीके से इसका विरोध करना शुरू किया और अब भारत की आलोचना करने लग गए हैं. यह एक तरीके का राजनयिक दबाव है जो किसी भी शांत क्षेत्र को विवादित क्षेत्र में बदल देता है और इसकी वजह से उसकी विकास की गति थम जाती है. 

दिबांग वैली के रास्ते अंदर घुंस रही चीनी सेना

दिलचस्प बात यह है कि चीन जिस 50-60 किमी वर्ग की भूमि को कब्जा चुका है, वह तो कई छोटे-छोटे देशों के क्षेत्रफल से भी काफी बड़ा है. दुनिया के चार सबसे छोटे देशों जैसे कि वेटिकन सिटी, मोनाको, नौरू और टुवालु को मिलाकर भी देखा जाए तो इनका पूरा क्षेत्रफल चीन के कब्जाए जा रहे भूमि से भी कम होता है. चगलगाम भारत के अरूणाचल प्रदेश के सीमा पर बसे दिबांग वैली के पास का क्षेत्र है जहां से चीनी सीमा के अंदर प्रवेश कर रहे हैं. 

मुख्यमंत्री ने कहा चीन के अड़ंगे से विकास हो रहा बाधित

पिछले दिनों अरूणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा था कि चीन के इस रवैये से राज्य विकास की दौड़ में पीछे रह गया है. न ही कोई योजनाएं ही अच्छे से लागू हो पा रही हैं और न ही कोई विदेशी पूंजी यहां निवेश करने की जुगत ही लगाता है. दरअसल, कोई भी विदेशी देश यह सोचकर इस क्षेत्र में निवेश नहीं करता कि भारत-चीन विवादों का असर उसके व्यवसाय पर भी पड़ेगा. ऐसे में संसाधनों के हिसाब से परिपूर्ण इस प्रदेश में विकास की रफ्तार अब भी धीमी ही है. 

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विवाद के चलते रद्द करने पड़े हैं कई प्रोजेक्ट

2009 में भारत ने एशिया डेवलपमेंट बैंक से अरूणाचल में जल प्रबंधन प्रोजेक्ट के लिए 2.9 बिलियन डॉलर की आर्थिक मदद लेने ही वाला था कि चीन ने अड़ंगा डाल दिया. चीन ने कहा कि यह विवादित क्षेत्र है और यहां किसी तरह के प्रोजेक्ट को मंजूरी देना सही नहीं होगा. इसके बाद बैंक ने कुछ अन्य निर्देश जारी कर दिए और किसी तरह से यह प्रोजेक्ट पास न हो सका और न ही लोन. इसके बाद कुछ सालों पहले जापान ने भारत के साथ अरूणाचल में निवेश करने की रूचि जाहिर की. चीन ने जापानी वित्तमंत्री के दिए बयान के खिलाफ शिकायत करनी शुरू कर दी और किसी तरह से भारत-जापान के साझा अरूणाचल मॉडल को पास ही न होने दिया. 

हालांकि, चीन के नेतृ्तवकर्ता बनने की भूमिका को काउंटर करने के लिहाज से अमेरिका ने भारत का साथ दिया. और कुछ मामलों में निवेश के प्रोजेक्ट यहां लागू तो किए गए हैं. भारत के लिए यह चिंता का विषय है कि चीन लगातार सीमा विवाद में फंसा रहा है जिससे विकास बाधित होता जा रहा है.