''चीन को भारत के साथ चलना ही पड़ेगा, उसके पास कोई और विकल्प नहीं''

ये बात कही है भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने जो कि वास्तविकता के धरातल की एक मजबूत सच्चाई है..  

''चीन को भारत के साथ चलना ही पड़ेगा, उसके पास कोई और विकल्प नहीं''

नई दिल्ली. चीन ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दरोगाई का काम अमेरिका से छीन कर खुद ले लिया है. अब अमेरिका तो सुधर गया है, भारत के घरेलू मामलों पर बोलता नहीं है. लेकिन दुनिया के पुराने सरगनाओं में से एक चीनी ड्रैगन मौके-बेमौके भारत के साथ अ-मैत्रीपूर्ण बयानों से पेश आता है. लेकिन इससे भी बड़ा सच ये है कि उसे भारत के साथ मिल कर ही चलना होगा क्योंकि इसमें ही चीन का हित है. 

रायसीना डायलाग के दौरान बोले जयशंकर 

भारतीय विदेश मंत्री ने उपरोक्त बात भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए रायसीना डायलाग के दौरान कही. विदेश मंत्री ने बिना शब्दों में संशोधन या सम्पादन किये सीधे-सीधे कहना पसंद किया कि चीन को भारत के साथ चलना ही होगा क्योंकि उसके पास कोई और विकल्प नहीं है. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि भारत भी चीन के साथ चलने को विवश है किन्तु भारत को किसी समझौते की संकरी गली में उतरना नहीं पड़ेगा, ये बात भी तय है.

''संबंधों में संतुलन को बनाये रखने पर ध्यान देना है''

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन दोनों को ही इस बात का ध्यान रखना है कि पारस्परिक संतुलन बना रहे क्योंकि दोनों देशों के लिए संबंधों का संतुलन बना रहना दोनों के हितों से जुड़ा हुआ है. इसके साथ ही उन्होंने एक बात और भी धमाकेदार तरीके से साफ़ कर दी जिस पर चीन का रुख हमेशा उलझा हुआ नज़र आता है, विदेश मंत्री ने कहा कि भारत आतंकवाद से किसी प्रकार का समझौता करने के मूड में नहीं है और वह इस बीमारी से सख्ती से निपटेगा.

ईरान-अमरीका तनातनी पर अपरोक्ष बयान 

विदेश मंत्री ने इस बयान के माध्यम से स्पष्ट कर दिया है कि दुनिया में जिन देशों को नहीं मालूम है उन्हें मालूम होना चाहिए कि भारत भी एक वैश्विक महाशक्ति है. जयशंकर ने कहा कि भारत बचने की कोशिश नहीं करता बल्कि फैसले लेने पर भरोसा रखता है.  विदेश मंत्री ने यह संदेश ईरान के उस हालिया बयान की पार्श्वभूमि पर दिया जिसमें ईरान ने कहा कि भारत उसके और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव को शांत करने में एक अहम भूमिका निभा सकता है.

ये भी पढ़ें. कब अकल ठिकाने आएगी मलेशिया की ?