चिट फंड संशोधन विधेयक को मंजूरी, अब नहीं मारा जाएगा किसी का पैसा

 चिटफंड चलाने वाले प्रबंधक फोरमैन के लिए कमीशन का हिस्सा पांच फीसद से बढ़ा कर सात फीसद किया गया है. यह भी निश्चित किया गया है कि कम से कम दो सदस्य मौजूद होने ही चाहिए वह भले ही वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए हों. चिटफंड शोधन विधेयक पर लोकसभा में जारी चर्चा का जवाब देते हुए वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि सरकार की मंशा है कि गरीबों का पैसा व उनका हक न मारा जाए

चिट फंड संशोधन विधेयक को मंजूरी, अब नहीं मारा जाएगा किसी का पैसा

नई दिल्लीः चिटफंड के क्षेत्र में पारदर्शिता व इसे नियमों के दायरे में लाने के लिए लोकसभा में बुधवार को चिटफंड संशोधन बिल-2019 पास हो गया. 2013 में पश्चिम बंगाल में हुए सारधा घोटाले के बाद से ही देश में इस क्षेत्र के काम काज को पारदर्शी तरीके से चलाने व इन पर नियमन को कसने की जरूरत महसूस की जा रही थी. अब इस विधेयक के पास होने से यह संभव हो सकेगा.  जो अब उक्त विधेयक के पारित होने से संभव हो सकेगा. नए नियम के मुताबिक इसे अब बंधुत्व फंड के तौर पर जाना जाएगा. इस विधेयक की राशि भी बढ़ाई गई है. 

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प्रबंधक फोरमैन का कमीशन बढ़ाया गया
चिटफंड संशोधन बिल-2019 के मुताबिक अब चार या इससे कम लोगों के बीच चिट फंड चलाने के लिए न्यूनतम राशि की सीमा तीन लाख रुपये की गई है. यह पहले एक लाख रुपये थी. इसी के साथ अगर चार या इससे अधिक व्यक्ति साझेदार हैं तो चिट फंड की राशि की सीमा 6 लाख रुपये से बढ़ाकर 16 लाख रुपये कर दी गई है. चिटफंड चलाने वाले प्रबंधक फोरमैन के लिए कमीशन का हिस्सा पांच फीसद से बढ़ा कर सात फीसद किया गया है. यह भी निश्चित किया गया है कि कम से कम दो सदस्य मौजूद होने ही चाहिए वह भले ही वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए हों. फोरमैन इस पूरी प्रक्रिया की रिकार्डिग करेगा.

किसी गरीब का पैसा न डूबेः अनुराग ठाकुर
शोधन विधेयक पर लोकसभा में जारी चर्चा का जवाब देते हुए वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि सरकार की मंशा है कि गरीबों का पैसा व उनका हक न मारा जाए. अगर गरीबों ने किसी स्कीम में पैसा लगाया है तो उसका एक-एक पैसा वापस मिले.

अनुराग ठाकुर ने अपने जवाब में पोंजी स्कीम और चिट फंड में अंतर बताया है. कहा कि पोंजी स्कीमों पर पूरी तरह से पाबंदी है. चिट फंड संशोधन विधेयक, 2019 का मुख्य उद्देश्य इसके काम काज को पारदर्शी बनाने के साथ ही इसके साथ जुड़े कलंक को भी खत्म करना है. यही वजह है कि विधेयक में कहा गया है कि चिट फंड व्यवस्था को बंधुत्व फंड, आवर्ती बचत योजना या ऋण संस्थान के तौर पर जाना जाएगा. तर्क रखा गया कि चिट फंड से ऐसा लगता है कि कोई धोखा (चीट) दे रहा है. 

संशोधन के जरिये हुए बदलाव, एक नजर में 

  • चिट फंड न्यूनतम राशि की सीमा 1 लाख से बढ़ा कर 3 लाख रुपये
  • फ्रैटरनिटी फंड, आवर्ती जमा के तौर पर जाना जाएगा चिट फंड
  • फोरमैन की कमीशन 5 से बढ़ा कर 7 फीसद किया गया
  • चिट फंड में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए भी हिस्सा लिया जा सकेगा 

किसने क्या-क्या कहा
इस विधेयक पर चर्चा के दौरान टीएमसी सांसद स्वागत राय ने कहा कि पोंजी स्कीमों या चिट फंड स्कीमों की लोकप्रियता की दो वजहें हैं. पहला कि देश का बैंकिंग सिस्टम आम जनता को अपने से जोड़ने में असफल रहा और दूसरा, देश की वित्तीय नियामक एजेंसियां असफल रहीं. उन्होंने इस आधार पर बैंकिंग सिस्टम को ठप बताने की कोशिश की. भाजपा सांसद प्रतिमा भौमिक ने इस विधयेक की जरूरत बताते हुए कहा कि चिट फंड ने उनके राज्य त्रिपुरा की आर्थिक स्थिति बदहाल कर रख दी है. त्रिपुरा की आबादी 37 लाख है और इसमें से 16 लाख लोगों को इससे नुकसान हुआ है. राज्य का कुल बजट 16 हजार करोड़ रुपये का है जबकि 10 हजार करोड़ रुपये की लूट चिट फंड कंपनियों ने की है. इसके साथ आप पार्टी के सांसद भगवंत मान ने कहा कि चिट फंड और पोंजी स्कीम चलाने वाली कंपनियों से हजारों परिवार बर्बाद हो चुके हैं. अपने संसदीय क्षेत्र के छाजरी गांव का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इसी तरह की एक कंपनी से धोखा खाए 10 लोगों ने आत्महत्या कर ली. उन्होंने इस तरह की धोखेबाजी करने वालों को कड़ी सजा देने की मांग रखी है. 

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