खुशी है कि भारतीय वैज्ञानिकों ने कुछ ही महीनों में बना ली कोविड वैक्सीन: CJI

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, हमें भारतीय स्वास्थ्य प्रणाली पर मधुमेह के प्रभाव को देखना चाहिए. कोविड -19 ने पहले ही हमारे अत्यधिक बोझ वाली स्वास्थ्य प्रणाली की नाजुकता को उजागर कर दिया है. 

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Nov 28, 2021, 03:26 PM IST
  • मधुमेह पर आहूजा बजाज संगोष्ठी में बोल रहे थे सीजेआई
  • कहा- राष्ट्र और उसके नागरिकों का स्वास्थ्य सर्वोपरि है

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खुशी है कि भारतीय वैज्ञानिकों ने कुछ ही महीनों में बना ली कोविड वैक्सीन: CJI

नई दिल्ली: प्रधान न्यायाधीश एन.वी. रमणा ने रविवार को भारतीय वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं की कुछ महीनों के भीतर कोविड वैक्सीन विकसित करने के लिए तारीफ की और इस बात पर भी जोर दिया कि राज्य को मधुमेह (Diabetes) की देखभाल के लिए सहायता और सब्सिडी प्रदान करना आवश्यक है.

'मेरी एक ही इच्छा- मधुमेह का इलाज मिल जाए'
मधुमेह पर आहूजा बजाज संगोष्ठी में बोलते हुए न्यायमूर्ति रमणा ने कहा, 'मुझे बहुत खुशी हुई जब भारतीय वैज्ञानिक और शोधकर्ता कुछ महीनों के भीतर एक कोविड के टीके के साथ आए, लेकिन दुर्भाग्य से हम मधुमेह के लिए एक स्थायी इलाज खोजने के करीब नहीं हैं. मेरी एकमात्र इच्छा है कि इसका इलाज मिल जाए.'

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, हमें भारतीय स्वास्थ्य प्रणाली पर मधुमेह के प्रभाव को देखना चाहिए. कोविड -19 ने पहले ही हमारे अत्यधिक बोझ वाली स्वास्थ्य प्रणाली की नाजुकता को उजागर कर दिया है. बीमारी से जुड़ा प्रमुख मुद्दा यह है कि यह शरीर के हर अंग पर हमला करता है.

न्यायमूर्ति रमणा ने कहा कि राष्ट्र और उसके नागरिकों का स्वास्थ्य सर्वोपरि है और स्वाभाविक रूप से हमारे द्वारा निर्धारित विकासात्मक आकांक्षाओं को प्राप्त करने के लिए एक पूर्व शर्त है.

'मधुमेह की देखभाल के लिए सब्सिडी दे राज्य'
उन्होंने कहा कि मधुमेह गरीब आदमी का दुश्मन है और एक महंगी बीमारी भी है. रोगी के जीवन भर के लिए एक वित्तीय बोझ है. राष्ट्र के लिए आर्थिक लागत अथाह है. इसलिए, यह आवश्यक है कि राज्य मधुमेह देखभाल के लिए सहायता और सब्सिडी प्रदान करे. सरकार को इस समस्या से निपटने के लिए अधिक स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों को प्रशिक्षित करने और पेश करने की भी आवश्यकता है. 

मधुमेह एक बहुत ही निराशाजनक बीमारी है. रोगी अपने जीवन के हर मिनट और हर दिन इस चिंता में रहता है कि शुगर को कैसे नियंत्रित किया जाए. आपका सामाजिक जीवन कम हो गया है और आपकी पूरी जिंदगी शुगर कंट्रोल करने के इर्द-गिर्द घूमती है.

सीजेआई ने साझा किया अपना अनुभव
न्यायमूर्ति रमणा ने भी बीमारी के साथ अपने अनुभव को साझा किया और उल्लेख किया कि वह वर्तमान में डॉ. अनूप मिश्रा की सक्षम देखभाल में हैं. उन्होंने कहा, 'हो सकता है, मैंने इस तनावपूर्ण कानूनी पेशे के अलावा कोई और पेशा चुना होता, तो मैं डॉ. मिश्रा को मेरे इलाज की परेशानी से बचा लेता.'

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