सीएम जगन मोहन का बड़ा फैसला, आंध्र प्रदेश में खत्म होगी विधानपरिषद

आंध्र प्रदेश मंत्रिमंडल की सोमवार को अहम बैठक में सीएम जगनमोहन ने बड़ा फैसला करते हुए ऐलान किया कि प्रदेश में विधानपरिषद खत्म कर दी जाएगी. 

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Jan 27, 2020, 10:53 AM IST
    • सीएम जगन मोहन का बड़ा फैसला
    • आंध्र प्रदेश में खत्म होगी विधानपरिषद
    • विधानपरिषद में जगन की पार्टी को बहुमत नहीं
सीएम जगन मोहन का बड़ा फैसला, आंध्र प्रदेश में खत्म होगी विधानपरिषद

अमरावती: आंध्र प्रदेश मंत्रिमंडल की सोमवार को अहम बैठक में सीएम जगनमोहन ने बड़ा फैसला करते हुए ऐलान किया कि प्रदेश में विधानपरिषद खत्म कर दी जाएगी. कैबिनेट ने इस पर मुहर भी लगा दी है. उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी पहले ही उच्च सदन की जरूरत पर सवाल उठा चुके हैं. राज्य विधानसभा का विस्तारित शीत कालीन सत्र सोमवार को दोबारा शुरू हो रहा है.

विधानपरिषद में जगन की पार्टी को बहुमत नहीं

 

जगन की पार्टी YSR कांग्रेस को आंध्रप्रदेश की विधानपरिषद में बहुमत नहीं है. उनकी पार्टी पहले ही तेदेपा के दो विधान पार्षदों को तोड़ चुकी है. अगर यथास्थिति बनी रही तो वाईएसआर कांग्रेस विधान परिषद में 2021 में ही बहुमत हासिल कर सकती है जब विपक्ष के कई सदस्य छह वर्षीय कार्यकाल के बाद सेवानिवृत्त होंगे. 

विधान परिषद ने रोक दिया था तीन राजधानियों वाला प्रस्ताव

बता दें कि पहले से अनुमान लगाया जा रहा था कि आंध्र प्रदेश की जगन मोहन रेड्डी सरकार विधान परिषद को भंग करने के कदम उठा सकती है. राज्य सरकार ऐसा इसलिए कर सकती है क्योंकि पिछले दिनों तीन राजधानियां बनाने वाले बिल को विधान परिषद में  पारित होने में अड़चन आई थी. तेलुगू देशम पार्टी के बहुमत वाली विधानपरिषद में इस बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेज दिया गया था.

जगन ने पहले ही दिया था संकेत

उच्च सदन ने विशाखापत्तनम में कार्यकारी राजधानी के साथ राज्य के लिए तीन राजधानियां बनाने के उद्देश्य से दो महत्वपूर्ण विधेयकों के पारित होने पर रोक लगा दी थी और बुधवार को सेलेक्ट कमेटी के पास भेज दिया था. जगन मोहन रेड्डी ने संकेत दिए कि एक बार फिर से विधानसभा सोमवार को बैठेगी और विधान परिषद की निरंतरता पर चर्चा होगी और फैसला लिया जाएगा. मुख्यमंत्री का मानना है कि विधान परिषद से सरकार के महत्वपूर्ण फैसलों पर सरकार को सलाह देने की अपेक्षा होती है,लेकिन यह एक राजनीतिक मंच में बदल गई है. सरकार जो भी बिल पेश करती है उसे विधान परिषद में रोका जाता है.

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