RAW और ISI की तुलना स्वाभाविक, लेकिन दोनों में अंतर जमीन आसमान का...जानें- कौन कितना प्रभावी?

Comparison of RAW and ISI: रॉ का उद्देश्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय शक्तियों के साथ-साथ पड़ोसी देशों के बारे में सैन्य और राजनीतिक जानकारी एकत्र करना है. इस उद्देश्य के लिए रॉ दुनिया के सभी हिस्सों में भेजे जाने वाले एजेंटों की भर्ती करता है और विदेशों में रहने वाले भारतीयों की भी मदद लेता है.

Written by - Nitin Arora | Last Updated : Jan 18, 2025, 10:10 AM IST
  • ISI का महानिदेशक कौन बनता है?
  • रिसर्च एंड एनालिसिस विंग कब अस्तित्व में आया?
RAW और ISI की तुलना स्वाभाविक, लेकिन दोनों में अंतर जमीन आसमान का...जानें- कौन कितना प्रभावी?

India Intelligence agency RAW efficiency: अंग्रेज जब गए तो भारत के पास एकमात्र खुफिया एजेंसी IB थी. 1962 में चीन के साथ और फिर 1965 में पाकिस्तान के साथ दो युद्धों का सामना करने के बाद, सरकार को एक अलग बाहरी खुफिया एजेंसी की आवश्यकता महसूस हुई क्योंकि उचित खुफिया जानकारी की कमी देखी गई थी. इस प्रकार रिसर्च एंड एनालिसिस विंग अस्तित्व में आया, जिसे दुनिया भर में रॉ (RAW) के नाम से जाना जाता है. RAW का गठन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कहने पर किया गया था.

दूसरी ओर, पाकिस्तान ने 1948 में एक स्वतंत्र इकाई के रूप में इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस ISI नामक अपनी बाहरी खुफिया एजेंसी का गठन किया. इससे पहले, बाहरी खुफिया इंटेलिजेंस ब्यूरो का एक हिस्सा था, जिसे मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) कहा जाता था. ISI में सशस्त्र बलों के सभी विंगों यानी सेना, नौसेना और वायु सेना के अधिकारी शामिल होते हैं. 1980 में सोवियत अफगानिस्तान युद्ध के बाद ISI की गुप्त कार्रवाई क्षमता में वृद्धि हुई थी. ISI के तीन महत्वपूर्ण उद्देश्य हैं, काउंटर इंटेलिजेंस, आंतरिक राजनीतिक मुद्दे, बाहरी खुफिया जानकारी.

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रॉ का उद्देश्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय शक्तियों के साथ-साथ पड़ोसी देशों के बारे में सैन्य और राजनीतिक जानकारी एकत्र करना है. इस उद्देश्य के लिए रॉ दुनिया के सभी हिस्सों में भेजे जाने वाले एजेंटों की भर्ती करता है और विदेशों में रहने वाले भारतीयों की भी मदद लेता है. बता दें कि 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में खुफिया विफलता के बाद ISI को भी पुनर्गठित किया गया था. ISI विदेशों में अपने राजनयिक मिशनों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया केंद्रों की आड़ में काम करती है.

ISI के महानिदेशक को पाकिस्तानी सेना का सेवारत लेफ्टिनेंट जनरल होना चाहिए. दूसरी ओर रॉ भारतीय सेना से स्वतंत्र है और सीधे प्रधानमंत्री के अधीन काम करती है.

RAW और ISI से जुड़े फैक्ट
-रॉ को किसी तरह की गिरफ्तारी करने का अधिकार नहीं है.
-रॉ आधी रात दस्तक नहीं देता. यह देश के अंदर भी जासूसी नहीं करता. हालांकि, यह सारे काम ISI करती है.
-रॉ सीधा देश के प्रधानमंत्री के प्रति जवाबदेह है जबकि ISI कहने को तो पीएम को रिपोर्ट करती है, लेकिन माना जाता है कि वह पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष के अधीन काम करती है.

बता दें कि ISI का इतिहास रॉ से कहीं पुराना है. ISI की स्थापना सन 1948 में हुई थी. ब्रिटिश सेना में काम कर रहे एक आस्ट्रेलियाई अफसर मेजर जनरल वॉल्टर जोजेफ ने इस एजेंसी को बनाया.

कौन कितना कारगर?
खुफिया एजेंसियों और उनके कामकाज के तरीके पर पूर्व रॉ प्रमुख एएस दुलत ने अपनी किताब में लिखा था कि रॉ 'काफी अच्छी है, आईएसआई से बेहतर है'. हालांकि, उन्होंने इसे यहीं छोड़ दिया, बिना यह बताए कि किस तरह से और यह जानना दिलचस्प है कि वे इस निष्कर्ष पर कैसे पहुंचे...

यह जानने के लिए कि कोई चीज अच्छी है, बुरी है या क्या है? इसमें सबसे पहले यह पूछना चाहिए कि इसका उद्देश्य क्या है. वे कौन से परिणाम हासिल करना चाहते हैं? तो ऐसे में ISI और RAW का काम करने का तरीका और लक्ष्य भिन्न हैं और कौन कितना कारगर है, ये भी उसी कार्य में सफलता और असफलता पर ही निर्भर करता है कि कौन कितना कारगर है?

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About the Author

Nitin Arora

लिखने के शौकीन हैं, पिछले 6 सालों से अधिक समय से मीडिया के कई अलग-अलग संस्थानों में काम कर चुके हैं और फिलहाल Zee News की डिजिटल टीम का हिस्सा हैं. यहां जनरल न्यूज व नेशनल, इंटरनेशनल खबरों पर एक्सप्लेनर लिखते हैं और साथ ही डिफेंस की खबरों पर भी अच्छी पकड़ है. ...और पढ़ें

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