क्यों नहीं फिल्म 'छपाक' और 'तानाजी' को कांग्रेस-भाजपा की लोकप्रियता का पैमाना माना जाए?

कांग्रेस और भाजपा की राजनीतिक जंग सिर्फ चुनाव तक ही सीमित नहीं रहती. देश के दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों को जहां मौका मिलता है वहां अपनी ताकत आजमाने से पीछे नहीं हटते. दोनों राजनीतिक दलों की ताजा टक्कर फिल्म 'छपाक' और  'तानाजी' के बहाने दिखी. जहां कांग्रेस ने 'छपाक' को हिट कराने के लिए पूरी ताकत झोंक दी. वहीं भाजपा ने 'तानाजी' का समर्थन किया. तो क्यों ना इन दोनों फिल्मों के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन को भाजपा-कांग्रेस की लोकप्रियता का पैमाना मान लिया जाए. 

क्यों नहीं फिल्म 'छपाक' और 'तानाजी' को कांग्रेस-भाजपा की लोकप्रियता का पैमाना माना जाए?

नई दिल्ली: बॉलीवुड के इतिहास में शायद पहली बार फिल्मों को राजनीतिक रंग दिया गया. हालांकि 'छपाक' का समर्थन करके इस जंग की शुरुआत कांग्रेस ने ही की. जिसके जवाब में भाजपा ने 'तानाजी' को सपोर्ट करना शुरु किया. अब दोनों फिल्मों का 

जो बॉक्स ऑफिस कलेक्शन सामने आ रहा है. उसे देखकर लगता है कि देश की जनता ने एक बार फिर लोकसभा चुनाव 2019 की तरह कांग्रेस को  बुरी तरह नकार दिया है. 

क्यों हुआ फिल्मों का राजनीतिकरण 
दरअसल फिल्म छपाक की अभिनेत्री दीपिका पादुकोण अपनी फिल्म 'छपाक'  के प्रमोशन के लिए या फिर शायद किसी गलतफहमी का शिकार होकर जेएनयू के अराजकतावादी वामपंथी छात्रों से मिलने पहुंच गईं. इसमें कांग्रेस के लिए खुश होने जैसी कोई बात नहीं थी. लेकिन इसमें केन्द्र सरकार के विरोध का एंगल था. इसलिए कांग्रेस ने इसे फौरन लपक लिया और दीपिका पादुकोण की फिल्म 'छपाक'  को हिट कराने के लिए जतन शुरु कर दिए. 

कांग्रेस ने लिया अपनी सरकारों का सहारा
देश के तीन राज्यों छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में कांग्रेस की सरकारें हैं. कांग्रेस नेताओं ने अपने अपने राज्यों में दीपिका पादुकोण की फिल्म 'छपाक'  को टैक्स फ्री कर दिया. मध्य प्रदेश में तो फिल्म रिलीज होने से पहले ही टैक्स फ्री किए जाने की घोषणा कर दी गई. इसके बाद छत्तीसगढ़ और सबसे आखिर में राजस्थान में छपाक टैक्स फ्री की गई. 

कांग्रेस नेता निजी तौर पर छपाक के प्रमोशन के लिए आगे आए

हिंसक वामपंथी अराजकतावादियों के साथ खड़ी दीपिका की फिल्म 'छपाक'  को हिट कराने के लिए कांग्रेसी नेताओं ने हर तरह के पैंतरे आजमाए. छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने खुद थिएटर में जाकर फिल्म देखी. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 'छपाक'  देखने की अपील करते हुए ट्विट किया. 

छत्तीसगढ़ में एक कांग्रेस नेता ने 'छपाक'  की 200 टिकटें फ्री में बांटी. कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI ने भोपाल के संगीत सिनेमा के पहले शो के टिकट लेकर वहां पहुंचे लोगों को मुफ्त बांट दिए. राजस्थान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने भी खुलकर 'छपाक' का समर्थन किया. पायलट ने ट्वीट कर लिखा कि लोग क्यों दीपिका पादुकोण की फिल्म 'छपाक'  को बायकॉट करने के लिए कह रहे हैं. अपनी राय जाहिर करना दीपिका का संवैधानिक अधिकार है. 

लेकिन कांग्रेस नेताओं की इतनी मेहनत के बावजूद भी नतीजा वही रहा ढाक के तीन पात.

कांग्रेस के समर्थन और दीपिका की मूर्खता से 'छपाक' हुई धपाक
दीपिका पादुकोण का वामपंथी अराजकतावादियों के साथ खड़े होना और उसपर से कांग्रेस के साथ ने देश की जनता को 'छपाक' से विमुख कर दिया. हालांकि 'छपाक'  एसिड अटैक जैसे गंभीर विषय पर बनी फिल्म है. इस तरह की फिल्मों का स्वागत किया जाना चाहिए. लेकिन जिस तरह कांग्रेस पूरे देश में बदनाम होती जा रही है. उसके समर्थन ने 'छपाक'  जैसी अच्छी फिल्म को भी बर्बाद कर दिया. 

हालत ये हो गई कि ट्विटर पर #BoycottChhapaak जैसे हैश टैग्स ट्रेंड करने लगे और इंटरनेट मूवी डाटाबेस(IMDB)पर ‘छपाक’ के खिलाफ मुहिम छिड़ गई. देश की जनता ने छपाक को मिले कांग्रेस के समर्थन और दीपिका पादुकोण की बेवकूफी के कारण इतने लोगों ने उसे नेगेटिव रिव्यू दिया कि छपाक की रेटिंग 4.4 हो गई. शायद कांग्रेस 'छपाक' का समर्थन नहीं करती तो शायद वह ज्यादा अच्छी कमाई कर पाती. 

भाजपा ने 'तानाजी' के जरिए दिया जवाब
जब कांग्रेस 'छपाक' को हिट कराने में पूरे जी जान से जुटी हुई थी. तब भाजपा ने भी बॉक्स ऑफिस को अपनी राजनीतिक जंग का हथियार बनाने का फैसला किया. भाजपा नेताओं ने खुलकर महान हिंदू महाराजा छत्रपति शिवाजी के सेनापति 'तानाजी' की जीवनी पर बनी फिल्म का समर्थन करना शुरु कर दिया. 

कांग्रेस की तर्ज पर भाजपाइयों ने भी 'तानाजी' के टिकट बांटना शुरु किया और आखिरकार रिलीज होने के तीन दिन बाद 13 जनवरी को उत्तर प्रदेश में 'तानाजी' टैक्स फ्री घोषित कर दी गई. 

कांग्रेस और भाजपा ने अपने अपने एजेन्डे के हिसाब से फिल्में बांट ली. जिसका असर बॉक्स ऑफिस कलेक्शन के जरिए दिखा. 

कांग्रेस के हाथ ने 'छपाक' को डुबाया 
कांग्रेस ने बॉक्स ऑफिस पर जिस जंग की शुरुआत की थी, उसका नतीजा उल्टा पड़ा. फिल्म 'छपाक'  अपनी लागत भी नहीं वसूल पा रही है. 'छपाक'  ने पांचवें दिन दो से सवा दो करोड़ का कलेक्शन किया. 'छपाक' ' ने शुक्रवार को 4.77 करोड़, शनिवार को 6.90 करोड़, रविवार को 7.35 करोड़ और सोमवार को 2.35 करोड़ की कमाई की थी. इस तरह फिल्म ने पांच दिन में करीब 23.50 करोड़ का ही बिजनेस किया. 

'छपाक'  के प्रचार और लागत को मिलाकर इसका बजट 45 करोड़ है. फिल्म को हिट होने के लिए 60 करोड़ की कमाई करनी होगी. जिससे अब ये बेहद दूर दिखाई दे रही है. जिसकी वजह से फिल्म की डायरेक्टर मेघना गुलजार बेहद चिंतित हैं और उन्होंने दीपिका पादुकोण के निजी विचारों को नजरअंदाज करने की अपील की है.

'छपाक'  को कुल 2,160 स्क्रीन्स मिले हैं. इनमें भारत में 1,700 स्क्रीन्स और विदेश में 460 स्क्रीन्स हैं. लेकिन कांग्रेस के समर्थन की वजह से देश की राष्ट्रवादी जनता ने इससे दूरी बना ली है. जिसकी वजह से थिएटर खाली दिखाई दे रहे हैं. 

भाजपा के समर्थन ने 'तानाजी' को हिट कराया
उधर ''तानाजी'' एक सुनिश्चित हिट की तरफ बढ़ती हुई दिख रही है. आम तौर पर वीकेंड के बाद फिल्मों की कमाई कम हो जाती है. लेकिन  'तानाजी' की कमाई में सोमवार की अपेक्षा मंगलवार को 20 फीसदी की उछाल देखी गई.  फिल्म ने मंगलवार को 16 करोड़ का कलेक्शन किया. 10 जनवरी को रिलीज़ हुई 'तानाजी' ने ने शुक्रवार को 15.10 करोड़, शनिवार को 20.57 करोड़, रविवार को 26.26 करोड़ का कलेक्शन किया था.  

इस तरह पांच दिन में इसने करीब 91.50 करोड़ जुटा लिए हैं. तानाजी का बजट 110 करोड़ है। इसके प्रचार और प्रिंट्स पर 15 करोड़ खर्च हुए हैं. कुल मिलाकर तानाजी की लागत 125 करोड़ है. इसे हिट होने के लिए 150 करोड़ रुपये कमाने होंगे. जो कि फिल्म के प्रदर्शन को देखते हुए तय माना जा रहा है. 

ये थी कांग्रेस की सोच
कांग्रेसी नेताओं ने सोचा था कि दीपिका पादुकोण का ग्लैमर और एसिड अटैक जैसा गंभीर विषय 'छपाक'  को हिट करा देगा. जिसका श्रेय वे खुद ले उड़ेंगे. 
लेकिन हमेशा की तरह कांग्रेस ने देश की जनता के मूड को समझने में गलती कर दी. वह भूल गई कि मोदी सरकार के नेतृत्व में देश राष्ट्रवाद के भाव में डूबा हुआ है. ऐसे में उनकी साजिश समझने में देश की जनता को देर नहीं लगेगी. 

इस पूरे प्रकरण में सबसे फायदे में रहे अजय देवगन. जिनके भाग्य से छींका टूट गया और बॉक्स ऑफिस कलेक्शन की पूरी मलाई उनके हिस्से में आ गई. 

कांग्रेस को लोकसभा चुनाव 2019 की तरह एक बार फिर से मुंह की खानी पड़ी.

इस पूरे प्रकरण का संदेश साफ है कि देश की जनता के मन में राष्ट्रवाद की जड़ें बड़ी गहराई से जम गई हैं और किसी तरह की देशविरोधी हरकतों को वह स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है. चाहे वह दीपिका के ग्लैमर और एसिड अटैक सर्वाइवर की चाशनी में लिपटा हुआ हो. 

ये भी पढ़ें- फिल्मों को लेकर छिड़ा सियासी संग्राम

ये भी पढ़ें- दिल्ली हाईकोर्ट ने भी दीपिका की फिल्म को दिखाने से रोका था

ये भी पढ़ें- अराजक तत्वों का समर्थन करने वाली दीपिका हो रही हैं कंगाल

ये भी पढ़ें- दीपिका की करतूत से घबरा गई हैं छपाक की डायरेक्टर