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मध्य प्रदेश में भाजपा को और झटके देने की तैयारी में हैं सीएम कमलनाथ

मध्य प्रदेश में बेहद मामूली बहुमत से सत्ता पर काबिज कांग्रेस पार्टी मजबूत होती हुई दिख रही है. उसने देश के अधिकतर राज्यों में सरकार चला रही भाजपा को कई झटके दिए हैं. हालत ये है कि भाजपा विधायकों को तोड़कर कांग्रेस पार्टी एमपी में बहुमत में आ चुकी है. 

मध्य प्रदेश में भाजपा को और झटके देने की तैयारी में हैं सीएम कमलनाथ
भाजपा पर भारी कमलनाथ

भोपाल: भारतीय जनता पार्टी पूरे देश में जगह जगह अपनी पार्टी की सरकारें बनवा रही है. जहां विधायक कम हैं वहां विरोधीदलों के विधायकों पर डोरे डालकर या फिर सहयोगी दलों को दबाव में लेकर देश के हर राज्य में भाजपा आगे बढ़ रही है. लेकिन मध्य प्रदेश में उसकी एक नहीं चल रही है. यहां मुख्यमंत्री कमलनाथ के दांव पेंच के आगे भाजपा विवश हो गई है. हालत ये है कि मध्य प्रदेश की मामूली बहुमत वाली कमलनाथ सरकार, जिसके गिरने की भविष्यवाणी कई बार की जा चुकी है, धीरे धीरे मजबूत होती जा रही है. वहीं पूरे देश में भगवा परचम लहराने वाली पार्टी धीरे धीरे कमजोर होती जा रही है. 

हाल ही में एक भाजपा विधायक की सदस्यता हुई खत्म
मध्य प्रदेश विधानसभा ने पन्ना जिले के पवई विधानसभा क्षेत्र के विधायक प्रह्लाद लोधी की सदस्यता समाप्त कर दी है. लोधी पर आरोप था कि उन्होंने अवैध खनन रोकने पहुंचे तहसीलदार और दूसरे सरकारी कर्मचारियों पर हमला किया और मारपीट की. इस मामले में दो साल की सुनवाई के बाद पिछले सप्ताह गुरुवार को फैसला आया था. जिसके बाद विशेष अदालत ने प्रह्लाद लोधी को इस मामले में दोषी मानते हुए 2 साल की सजा सुना दी. 


जिसके बाद मध्य प्रदेश विधानसभा ने तुरंत कार्रवाई करते हुए प्रह्लाद लोधी की सदस्यता समाप्त करने का फैसला किया. 

कांग्रेस-भाजपा में हो रही है तकरार
अपने विधायक की सदस्यता समाप्त होने से भाजपा स्वाभाविक रुप से रोष में है. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने बयान दिया कि किसी भी व्यक्ति को उसका पक्ष रखने का अधिकार है. देश में कसाब और अफजल जैसे खूंखार आतंकवादी तक को सुनवाई का मौका दिया गया, लेकिन जनता की सेवा में लगे रहने वाले एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि से जुड़े मामले पर विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति द्वारा जल्दबाजी में कार्रवाई की गई. 
इसका जवाब देने खुद मुख्यमंत्री कमलनाथ सामने आए. उन्होंने कहा कि पंद्रह साल से भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं के कारनामे सामने आ रहे हैं, अभी और सामने आएंगे. अभी तो यह पहला मामला सामने आया है. ऐसे मामले हर हफ्ते आएंगे, हर महीने सामने आएंगे. 
मुख्यमंत्री कमलनाथ के इस रुख से साफ लगता है कि वह भाजपा से दो दो हाथ करने का पूरा मन बना चुके हैं. कमलनाथ ने ये भी बयान दिया कि अभी इंतजार करिए कांग्रेस के पाले में अभी 2 से तीन सीटें और आएंगी. 

पहले भी भाजपा को तोड़ चुकी है कांग्रेस
मद्य प्रदेश के अलावा देश के दूसरे राज्यों में कांग्रेस पार्टी बेहद कमजोर दिखती है. लेकिन मुख्यमंत्री कमलनाथ भाजपा के विधायकों को तोड़ने में किसी तरह का संकोच नहीं करते. जुलाई के महीने में उन्होंने भाजपा को झटका देते हुए उसके दो विधायकों शरद कोल और नारायण त्रिपाठी को तोड़ लिया था. इन दोनों ने अपना पाला बदलकर कांग्रेस के लिए वोटिंग की थी. जिसके बाद अल्पमत के नाम पर कांग्रेस को लगातार आंखे दिखाने वाली भाजपा दहशत में आ गई.

हालत ये हो गई है कि भाजपा अपने विधायकों की लगातार निगरानी करती रहती है. जिससे कांग्रेस कहीं उन्हें तोड़ ना ले. 

मध्य प्रदेश में सत्ता का गणित
मध्य प्रदेश में विधानसभा की 230 सीटें हैं. यहां सरकार बनाने के लिए किसी भी पार्टी को 116 सीटें चाहिए. पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 114 जबकि भाजपा ने 109 सीटें जीती थीं. लेकिन भाजपा अब तक इसमें से 3 विधायक गंवा चुकी है. उसके एक विधायक की सदस्यता चली गई है. जबकि दो विधायक कांग्रेस के खेमे में चले गए हैं. 
वहीं निर्दलीयों और छोटे दलों की सहायता से सरकार चला रहे मुख्यमंत्री कमलनाथ की कांग्रेस सरकार विधानसभा में लगातार अपना बहुमत बनाए रखने में सफल रही है.