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EU सदस्यों के कश्मीर दौरे पर अब प्रियंका को क्यों लगी मिर्ची?

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने यूरोपियन सांसद के कश्मीर दौरे को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा प्रहार किया है. हालांकि उनके इस सवाल से ये सवाल उठता है कि ये पूछने वाली रॉबर्ट वाड्रा की पत्नी कौन होती हैं? यहां पढ़ें, क्या है माजरा-

EU सदस्यों के कश्मीर दौरे पर अब प्रियंका को क्यों लगी मिर्ची?

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने पर झूठ का प्रोपेगेंडा चला रहे पाकिस्तान के मुंह पर यूरोपियन यूनियन के सांसदों ने करारा तमाचा जड़ दिया. जिसके बाद कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने यूरोपियन सांसदों के दौरे को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला बोला है.

प्रियंका ने क्या बोला?

प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार पर कटाक्ष करते हुए एक ट्वीट किया है. इस ट्वीट में उन्होंने लिखा है कि 'भारत के किसानों-बेरोजगार युवाओं के लिए ये सुविधा नहीं है कि PM से मुलाकात हो सके, समस्याएं सुनी जा सकें. लेकिन, हां मादी शर्मा जैसे इंटरनेशनल बिजनेस ब्रोकर बड़ी शान से लिख सकते हैं, भारत आइए हम आपका खर्चा भी उठाएंगे.'

इस ट्वीट के जरिए प्रियंका ने यह बोल दिया कि 'इंटरनेशनल ब्रोकर' की प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच है. लेकिन यहां आपका ये भी जानना जरूरी हो जाता है कि यूरोपीय यूनियन के 23 सांसदों ने अपनी आंखों से घाटी की सच्चाई देख इसे पूरी दुनिया को बताया. बता दें, ईयू के 27 सांसदों को कश्मीर जाना था, लेकिन मंगलवार को 4 दिल्ली से वापस लौट गए.

कांग्रेस को क्यों लग रही है मिर्ची?

विदेशी सांसदों ने घाटी में आतंकियों को भेजने और आतंकवाद को समर्थन करने को लेकर पाकिस्तान को जमकर कोसा. लेकिन जिस मादी शर्मा पर कांग्रेस अपनी छाती पीट रही है वह यूरोपियन सांसदों के प्रतिनिधिमंडल को भारत लाने के आयोजन का संचालन कर रही थी. खैर, मादी शर्मा जो भी हो, लेकिन यूरोपियन सांसद के कश्मीर दौरे पर कांग्रेस पार्टी को इतनी मिर्ची क्यों लग रही है? ये वाकई बड़ा सवाल है. खासकर रॉबर्ट वाड्रा की पत्नी प्रियंका गांधी वाड्रा जब अपने पति के बारे में कुछ बोल पाने में सक्षम नहीं हैं, तो भला उन्हें दूसरों पर टिप्पणी करने से पहले अपने परिवार पर उठे सवालों का जवाब भी इसी अंदाज में देना चाहिए था. लेकिन मिसेज वाड्रा की जुबान पर उस वक्त ताला लग जाता है, जब उनके पति पर सवाल उठता है. मगर कश्मीर की जमीनी हकीकत जगजाहिर होती है, पाकिस्तान की असलियत सामने आती है. तो उस वक्त उन्हें परेशानी होने लगती है. पूरी कांग्रेस हाय-तौबा मचाने लगती है.

कश्मीर पर इमरान को तमाचा

यूरोपियन यूनियन के सांसदों ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने को भारत का आंतरिक मामला बताया और आतंक के खिलाफ लड़ाई में भारत का साथ देने की बात भी कही है. विदेशी सांसदों ने बेखौफ कश्मीर की प्राकृतिक खूबसूरती का दीदार किया. घाटी से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद कश्मीर के लोगों से मुलाकात की. यूरोपियन यूनियन के 23 सांसदों के हंसते खिलखिलाते चेहरे पूरी कहानी खुद बयां कर रहे हैं. कि कश्मीर पर पाकिस्तान का प्रोपेगेंडा नाकाम हो चुका है. घाटी में अमन और शांति के नये सूरज का उदय हो चुका है.

कांग्रेस ने और भी सवाल उठाए

यूरोपीय संसद के 23 सदस्य मंगलवार को दो दिवसीय जम्मू-कश्मीर के दौरे पर पहुंचे थे. लेकिन विदेशी सांसदों के इस दौरे को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं कि जब देश के सांसदों को एयरपोर्ट से ही लौटा दिया जा रहा है तो फिर विदेशी सांसदों को कश्मीर में एंट्री क्यों दी गई. कांग्रेस ने तो आज मोदी सरकार की कश्मीर नीति को ही सवालों को घेरे में खड़ा कर दिया. 

कश्मीर पर विपक्ष और पाकिस्तान चाहे कुछ भी कहे लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि घाटी के बदलते हालात से ना सिर्फ पाकिस्तान बल्कि देश के भी कुछ नेता सकते में हैं. जिनकी राजनीति का आधार सिर्फ कश्मीर में शांति का विरोध रहा है. लेकिन यूरोपियन यूनियन के सांसदों ने जिस तरह कश्मीर में शांति की तस्दीक की है वो इनके मुंह पर करारा तमाचा है.