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अयोध्या जमीनी विवाद मामले पर दो धड़ों में बंटी कांग्रेस, सीनियर नेताओं ने दिए बयान

लोकसभा चुनाव के बाद से ही कांग्रेस के अंदर किसी भी मुद्दे को लेकर पार्टी नेताओं में सामंजस्य नहीं दिखता. 17 नवंबर को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के सेवानिवृत्त होने से पहले अयोध्या जमीनी विवाद पर फैसला आना बाकी है. उससे पहले ही कांग्रेस दो धड़ों में बंटती नजर आ रही है. 

अयोध्या जमीनी विवाद मामले पर दो धड़ों में बंटी कांग्रेस, सीनियर नेताओं ने दिए बयान

नई दिल्ली: पार्टी के सीनियर नेताओं ने भाजपा के राजनीतिक विचारों और सिद्धांतों से सुर मिलाना शुरू कर दिया है. कांग्रेस वर्किंग कमिटी और पूर्व केंद्रीय मंत्री जतिन प्रसाद और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि वे अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होते देखना चाहते हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला ही सर्वोपरि है और वह सब के लिए मान्य होगा. 

बैठक के बाद भी नहीं संभले कांग्रेस नेता

दिलचस्प बात यह है कि शुक्रवार को दिल्ली में पार्टी अध्यक्षा सोनिया गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की बैठक हुई थी. इस बैठक में एनआरसी, अनुच्छेद 370 और अयोध्या रामजन्म भूमि मसले पर पार्टी की राय एकमत हो, इसपर चर्चा चली, लेकिन लगता है कि पार्टी नेता अब कांग्रेस के पॉलिटिकल लाइन से अलग जा कर निजी विचारों को प्राथमिकता देने का फैसला कर बैठे हैं. हालांकि, ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब नेताओं के विचार अपनी ही पार्टी के मूल विचारों से इतर हो. इससे पहले भी कांग्रेस नेता व असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरूण गोगोई ने भी अयोध्या जमीनी विवाद को लेकर अलग सुर में बयान दिया. उन्होंने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि अयोध्या जमीनी विवाद का मामला वाकई बहुत संवेदनशील है जिसपर किसी भी फैसले पर पहुंचने से पहले एक स्वस्थ बातचीत की जरूरत है. 

मंदिर निर्माण चाहते हैं कांग्रेस नेता जतिन प्रसाद

कांग्रेस के बदले तेवर लोकसभा चुनाव के बाद से ही लगातार देखे जा रहे हैं. पार्टी अनुच्छेद 370 को लेकर और एनआरसी जैसे विषयों को लेकर यू टर्न लेने से भी नहीं चूकी है. पूर्व केंद्रीय मंत्री जतिन प्रसाद ने किसी अखबार को दिए गए एक इंटरव्यू में कहा कि "एक हिंदु होने के नाते, वह चाहते हैं कि मंदिर वहां बने, लेकिन उस भूमि पर कोई भी फैसला तो कानूनी तौर पर ही निकलेगा. सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला होगा वह सभी के लिए मान्य होगा. उन्होंने कहा कि इस पर फैसला जितनी जल्दी हो सके, आ जाए ताकि सभी वाद-विवाद और बातों पर ब्रेक लग जाए. यह समय है कि सभी समुदाय एक साथ शांति से रहें." 

पूर्व सीएम भी चाहते हैं अयोध्या में राममंदिर का हो निर्माण

वहीं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी प्रसाद के बयान से इतेफाक रखते हुए सुर में सुर मिलाया. उन्होंने कहा कि "कांग्रेस का पक्ष बिल्कुल साफ है. यह एक भूमि विवाद से जुड़ा मसला है और इसपर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ही अंतिम फैसला मानना होगा. इसपर किसी भी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए. सरकार की भी जिम्मेदारी है कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ खड़ी रहे. लेकिन जब उनसे उनके निजी विचारों के बारे में पूछा गया तो रावत ने कहा कि सभी भारतीय चाहते हैं कि राम मंदिर का निर्माण अयोध्या में हो." उन्होंने हालांकि अपने बयान का बचाव करते हुए यह भी कहा कि अगर आप किसी मुस्लिम भाई से भी पूछेंगे तो वह भी अयोध्या में राम मंदिर बनाने को लेकर कहेगा कि राम मंदिर अयोध्या में नहीं बनेगा तो कहां बनेगा. 

पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने पहले अयोध्या में राम मंदिर बनवाने की कोशिश की थी, लेकिन भाजपा ने उस वक्त राजनीति करनी शुरू कर दी और मामले को उलझा डाला. कांग्रेस के बदलते तेवर अयोध्या में रामजन्म भूमि पर आने वाले फैसले की सुगबुगाहट के बाद से बदलने लगा है. पार्टी के अंदर एक ही मुद्दे पर अलग-अलग राय आए दिन देखने को मिलता है.