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नेहरू मेमोरियल के 'कांग्रेसमुक्त' होने से 'खिसिया' गए नेताजी

नेहरू मेमोरियल म्यूजियम और लाइब्रेरी सोसाइटी में बचे तीन कांग्रेसी नेताओं को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है. यानी अब नेहरू मेमोरियल कांग्रेस मुक्त हो गया है. सांस्कृतिक मंत्रालय के इस फैसले के बाद रूसे हुए नेताओं ने अपनी छाती पीटनी शुरू कर दी है.

नेहरू मेमोरियल के 'कांग्रेसमुक्त' होने से 'खिसिया' गए नेताजी

नई दिल्ली: केंद्रीय सांस्कृतिक मंत्रालय की ओर से नेहरू मेमोरियल म्यूजियम और लाइब्रेरी (NMML) सोसाइटी का दोबारा से गठन किया गया है. इस पुनर्गठन में कांग्रेस पार्टी का सफाया हो गया है, यानी अब NMML भी कांग्रेस मुक्त हो गई है. दरअसल, नेहरू मेमोरियल सोसाइटी से कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, जयराम रमेश और करण सिंह को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है.

किसने किया रिप्लेस?

इस फैसले में कांग्रेस के तीनों नेताओं के स्थान पर सांस्कृतिक मंत्रालय ने गीतकार प्रसून जोशी, पत्रकार रजत शर्मा और भाजपा नेता अनिर्बन गांगुली को जगह दी है. नेहरू मेमोरियल म्यूजियम और लाइब्रेरी सोसाइटी के अध्यक्ष देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं. आपको बता दें कि NMML को देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की याद में बनाया गया था.

सोसाइटी में किसका कौन सा रोल?

NMML सोसाइटी के अध्यक्ष नरेंद्र मोदी हैं
नेहरू मेमोरियल म्यूजियम और लाइब्रेरी सोसाइटी उपाध्यक्ष देश के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह हैं

गृहमंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण सोसाइटी के सदस्य हैं. वी मुरलीधरन, प्रहलाद सिंह पटेल, रमेश पोखरियाल, प्रकाश जावड़ेकर, साथ ही आईसीसीआर के अध्यक्ष विनय सहस्त्रबुद्धे और प्रसार भारती के अध्यक्ष ए सूर्य प्रकाश इसके सदस्य हैं.

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ऐसे में 5 नवंबर को संस्कृति मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन जारी किया, जिसके जरिए कांग्रेस के तीन नेताओं को इस सोसाइटी से बाहर का रास्ता दिखाया गया है. और तीन नए सदस्य बनाए गए हैं. जिसके बाद कांग्रेस पार्टी के अलग-अलग नेताओं ने इसपर सियासत करना शुरू कर दिया है. एक के बाद एक करके कई नेताओं ने इसे लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर जोरदार हमला बोला है.

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निकाले जाने पर खिसियाए खड़गे

इस दौरान कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे का दर्द छलक गया. खिसियाए खड़गे ने इस फैसले को राजनीतिक रूप देने की भरपूर कोशिश की. उन्होंने अपना दर्द बयां करते हुए ये कह दिया कि यह सबकुछ सरकार राजनीतिक मंशा से कर रही है. खड़गे ने ये आरोप तक मढ़ दिया कि सरकार में बैठे लोग इस पैनल में अपने लोगों को शामिल करना चाहते हैं.