कोरोना वायरस: महामारी फैलती देख धरना स्थल से भाग रही हैं शाहीन बाग की महिलाएं

कोरोना वायरस के प्रकोप के बीच अपनी जिद पर अड़ी शाहीन बाग की बुर्कानशीं महिलाओं को अब महामारी के बीच अपनी जान की फिक्र बढ़ गयी है. कल तक जो महिलाएं NRC-CAA के खिलाफ धरना देने का ड्रामा कर रही थीं उन्हें अब औकात पता चल रही है.

कोरोना वायरस: महामारी फैलती देख धरना स्थल से भाग रही हैं शाहीन बाग की महिलाएं

दिल्ली: पूरा देश एकजुट होकर कोरोना वायरस के कहर से न केवल भारत को बचाना चाहता है बल्कि इसके प्रकोप से पूरी दुनिया को बचाने में जुटा है. महामारी और संक्रमण की लाखों चेतावनियों के बीच शाहीन बाग की महिलाएं देश में महामारी फैलाने के उद्देश्य से बैठी थीं वे अब एक एक करके वहां से भाग गयी हैं. शाहीन बाग के जिस पांडाल में संविधान की दुहाई देकर संविधान की हत्या की साजिश की जा रही थी, उस पांडाल में अब गिनी चुनी महिलाएं ही दिख रहीं हैं.

धरना देने वाली महिलाओं में आपसी मतभेद

मोदी सरकार के CAA-NRC पर देश व्यापी प्रचार प्रसार से देश के लोगों को ये समझ में आ गया कि नागरिकता संशोधन कानून देश हित में है. इसलिये देश भर में शाहीन बाग की महिलाओं की आलोचना होने लगी. दिल्ली दंगों की जिस आग ने दिल्ली को जला दिया, उसकी पूरी पटकथा शाहीन बाग में ही लिखी गयी थी. ये सभी बातें देशवासियों ने समझ लीं और उनका तिरस्कार करने लगे. इससे शाहीन बाग में दो धड़े हो गये एक मोदी सरकार का समर्थक और एक इसका विरोधी. इस गुटबाजी में शाहीन बाग की बुर्कानशीं महिलाओं ने हटना ही उचित समझा.

नागरिकता के नाम पर, महामारी फैलाने के काम पर

शाहीन बाग में महिलाएं नागरिकता संशोधन कानून और NRC के विरोध में बैठी थीं. CAA से किसी भी भारतीय की नागरिकता को कोई खतरा नहीं है जबकि NRC अब तक आई भी नहीं है लेकिन ये मामूली सी बात शाहीन बाग में बैठी महिलाओं की समझ में नहीं आती. खतरे की बात ये है कि इनके धरना देने से वहां के आम नागरिकों का जीवन खतरे में पड़ गया.

जनता कर्फ्यू की सफलता से निराशा

शाहीन बाग की महिलाओं की बातों से ये हमेशा पता चलता था कि जो देश के खिलाफ क्रिया कलाप होते थे वे उन्हें बहुत पसंद आते थे. जनता कर्फ्यू की शानदार सफलता ने इन महिलाओं के मंसूबों पर पानी फेर दिया. इससे इनमें आंतरिक शर्म और बढ़ी गयी साथ ही इन्हें पता चल गया कि जो धरना ये दे रही हैं उसे आम जनमानस पसंद नहीं करता.

नाम मात्र महिलाएं धरना स्थल पर बचीं

जनता कर्फ्यू की ऐतिहासिक सफलता और पीएम मोदी के प्रति लोगों के विश्वास को देखकर शाहीन बाग की महिलाएं पानी पानी हो गयीं और नागरिकता कानून के विरोध के नाम पर चल रही सियासी दुकान से दूर हो गईं. अब शाहीन बाग में वहीं महिलाएं बचीं हैं जिनमें देश और सविंधान की जरा भी समझ नहीं है.