close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

जिस राफेल पर राहुल ने खड़ा किया था बखेड़ा, उसे भारत लाने स्वयं पहुंचे राजनाथ

लड़ाकू विमान राफेल पर हिंदुस्तान में बड़े-बड़े सियासी ड्रामे देखने को मिले हैं. कांग्रेस पार्टी ने इस मसले को लोकसभा चुनाव में खूब भुनाया था. कभी राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बहस की खुली चेतावनी दे दी. तो कभी पीएम मोदी को 'चौकीदार चोर है' कहकर पुकारा था. फ्रांस में विजयादमशी के दिन भारत के हाथों में राफेल को सौंप दिया जाएगा. हालांकि हिंदुस्तान की जमीन पर राफेल को लैंड होने में अभी कई महीने का और वक्त लगेगा. तो चलिए जानते हैं कि कैसे राफेल पर सियासी तांडव की हद हो गई.

जिस राफेल पर राहुल ने खड़ा किया था बखेड़ा, उसे भारत लाने स्वयं पहुंचे राजनाथ
फाइल फोटो

नई दिल्ली: हाल के दिनों में देश की सुरक्षा से जुड़े मसले पर जबरदस्त सियासी उठापटक का नजारा देखने को मिला, राफेल का मुद्दा कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों ने लोकसभा चुनाव में जमकर भुनाया. बयानबाजी का सिलसिला जब शुरू हुआ तो सारी सीमाएं लांघ दी गई. कोई आपत्तिजनक टिप्पणी करने लगा, तो कोई वायुसेना अध्यक्ष को ही सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया. लेकिन अब महज कुछ घंटों बाद पहला राफेल विमान भारत को मिल जाएगा. हालांकि इसके भारत आने के लिए मई 2020 तक इंतजार करना पड़ेगा.

विजयदशमी के मौके पर राफेल भारत के हाथों में सुपुर्द कर दिया जाएगा. हालांकि भारत की जमीन पर पहला 4 राफेल मई 2020 को लैंड होगा. 8 अक्टूबर को फ्रांसी की कंपनी डैसो के प्रोडक्शन प्लांट बोर्दू में भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह राफेल का शस्त्र पूजन करेंगे. इसके बाद वो राफेल की उड़ान भी भरेंगे.

भारत के 10 पायलट, 40 टेक्नीशियन फ्रांस में करेंगे ट्रेनिंग 

पहला 4 राफेल मई 2020 तक भारत आएगा, तबतक 10 हिंदुस्तानी पायलट फ्रांस की जमीन पर ही राफेल के साथ ट्रेनिंग करेंगे. जानकारी के मुताबिक भारत से इंजीनियर और 40 टेक्नीशियन की टीम फ्रांस पहुंची है. ये टीम भारत लौटकर इतने ही वायुसैनिकों को ट्रेनिंग देगी.

राफेल की तैनाती का प्लान

  • 18 राफेल - अंबाला एयरबेस पर होंगे तैनात (पाकिस्तान पर होगी नजर)
  • 18 राफेल - हाशीमारा बेस पर होंगे तैनात (चीन पर होगी नजर)

2022 तक सभी 36 विमान आ जाएंगे भारत

  • पहले चार राफेल मई के अंत तक भारत आएंगे
  • 4-4 के ग्रुप में अगले 32 विमान भारत आएंगे
  • 2022 तक सभी 36 रफाल भारत में तैनात हो जाएंगे

'चौकीदार चोर है' से किसे हुआ नुकसान

2019 लोकसभा चुनाव में अपनी रैलियों की शुरुआत राहुल इस नारे के साथ किया करते थे. कांग्रेस पार्टी समेत पूरे विरोधी खेमे ने राफेल को घोटाला करार देते हुए ये दावा किया था कि अगर उनकी सरकार बनेगी तो राफेल डील में हुए घोटाले की वो जांच कराएंगे. हालांकि उनकी ये ख्वाहिश पूरी नहीं हो पाई. इस बीच सुप्रीम कोर्ट से राहुल गांधी को जबरदस्त झटका भी लगा था, जब उन्हें 'चौकीदार चोर है' कहने के लिए माफी भी मांगनी पड़ी थी.

तीन रक्षामंत्रियों ने दिया जवाब

जब राफेल डील पर हस्ताक्षर हुए थे तो उस वक्त मनोहर पर्रिकर देश के रक्षामंत्री हुआ करते थे. उसके बाद इसकी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में अरुण जेटली और निर्मला सीतारमण ने भी बतौर रक्षामंत्री अपनी-अपनी भूमिका अदा की. संसद में जबरदस्त बहस हुई, बार-बार सरकार ने तथ्यात्मक जवाब दिए, लेकिन विपक्ष आंख मूंद कर घोटाले का राग अलापता रहा. इस बीच मनोहर पर्रिकर की तबीयत खराब होने के बावजूद राहुल गांधी ने राफेल पर पर्रिकर कार्ड खेल दिया था. जिसके बाद खुद पर्रिकर ने राहुल के बयान को झूठा करार दिया था. और इसे लेकर भाजपा ने उनकी खटिया खड़ी कर दी थी.

जब वायुसेना अध्यक्ष पर उठा दिया सवाल

उस वक्त राजनीति का स्तर इतना नीचे गिर गया था, कि चुनावी फायदे के लिए कांग्रेसी नेता मनीष तिवारी ने तत्कालीन बीएस धनोआ तक को घेर लिया. धनोआ ने राफेल की तारीफ कर दी तो तिवारी ने उनके बयान को चुनावी करार दे दिया. जिसके बाद भाजपा ने उनकी राजनीति को ओछी करार दिया. इसके अलावा कर्नाटक के पूर्व सीएम वीरप्पा मोइली ने राफेल पर तत्कालीन वायुसेना प्रमुख को झूठा तक बोल दिया था.

इसे भी पढ़ें: महाराष्ट्र के सियासी दंगल में भाजपा-शिवसेना की 'राह नहीं आसान'

राहुल गांधी ने राफेल को घोटाला साबित करने के लिए जितने दावे किए, सब के सब बेकार हो गए. लेकिन, राहुल गांधी को इससे कोई लेना देना नहीं है. सुप्रीम कोर्ट, कैग (CAG) हर किसी के दरवाजे से राहुल गांधी को निराशा हाथ लगी. लेकिन शायद 2019 के लोकसभा चुनाव में राहुल के पास इससे बड़ा कोई मुद्दा नहीं था. क्योंकि अगस्टा वेस्टलैंड, मनी लॉन्ड्रिंग और न जाने कितने मसलों पर कांग्रेस पहले से ही बुरी तरीके से घिरी हुई थी. इसके अलावा 5 साल तक विपक्ष ने किसी दूसरे मुद्दे को तूल पकड़ाने में कामयाब नहीं हो पाई. ऐसे में राहुल गांधी का सबसे बड़ा चुनावी हथियार राफेल... राफेल... और सिर्फ राफेल था. जिसका राग वो तब तक अलापने रहें, जबतक चुनावी नतीजे नहीं आ गए. चुनावी नतीजों के बाद तो मानो, राहुल गांधी की सिट्टी पिट्टी गुम हो गई. और राफेल के साथ साथ उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष के पद को भी त्याग दिया.