MALE drone India: भारत की सीमाओं को अभेद्य बनाने के लिए 24x7 तैनात रहने वाली भारतीय सेना की ताकत को एक बड़ा बूस्टर मिलने जा रहा है. जो न केवल आधुनिक जंग की परिस्थितियों से मेल खाता है, बल्कि सेना के पूरे बेड़े को भी आधुनिका बनाएगा. दरअसल, भारतीय रक्षा मंत्रालय ने देश के मानवरहित हवाई वाहन (UAV) विनिर्माण क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति लाने की तैयारी कर ली है. मीडियम ऑल्टिट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (MALE) ड्रोन कार्यक्रम अब अपने महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर रहा है. जिसका मकसद चीन-पाकिस्तान से लगी जमीनी और समुद्री सीमाओं पर वास्तविक समय की निगरानी और खुफिया जानकारी को बढ़ाना है. ऐसे में, रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने 87 स्वदेशी MALE ड्रोन की खरीद को हरी झंडी दे दी है, जिसकी अनुमानित लागत करीब ₹30,000 करोड़ है.
कैसे होगी खरीदारी?
इस बड़ी खरीद का सबसे खास पहलू यह है कि ठेके को दो कंपटीटर भारतीय फर्मों के बीच 64:36 के अनुपात में बांटा जाएगा. इसका सीधा मतलब है कि भारत में MALE ड्रोन बनाने की दो अलग-अलग और स्वतंत्र विनिर्माण यूनिट्स स्थापित होंगी, जिससे प्रोडक्शन की स्पीड बढ़ेगी और भविष्य के आदेशों को तेजी से पूरा किया जा सकेगा. सेनाओं द्वारा जल्द ही भारतीय कंपनियों से एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट मांगा जाएगा, जिसके बाद व्यापक परीक्षण किए जाएंगे.
रक्षा मंत्रालय की क्या है प्लानिंग?
रक्षा मंत्रालय ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए विशिष्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं, जो स्वदेशीकरण पर जोर देते हैं. ₹30,000 करोड़ से अधिक के कुल ऑर्डर को दो सबसे कम बोली लगाने वाली फर्मों के बीच बांटा जाएगा. इसमें मुख्य ठेकेदार को 64 प्रतिशत और दूसरे को 36 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा.
ऐसे में, चयनित कंपनियों के लिए यह जरूरी होगा कि वे एयरफ्रेम और प्राथमिक घटकों का स्थानीय स्तर पर ही निर्माण करें. इंजनों को भी भारत में ही इकट्ठा करना और परीक्षण करना होगा. कम से कम 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री होना जरूरी है.
क्या है MALE ड्रोन की खासियत?
ये ड्रोन भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना तीनों के लिए 'फोर्स मल्टीप्लायर' का काम करेंगे, जिससे भारत की लड़ाकू क्षमता में बड़ा इजाफा होगा. ये MALE ड्रोन खुफिया (ISR), निगरानी, टोही मिशन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और सटीक हमला जैसे विभिन्न कार्य करने में सक्षम होंगे.
इतना ही नहीं, इन ड्रोन को 35,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर 30 घंटे से ज्यादा उड़ान भरने के लिए डिजाइन किया जाएगा, जिससे वे लंबी दूरी तक लगातार निगरानी कर सकें. वहीं, भारत अब तक इज़रायल जैसे विदेशी आपूर्तिकर्ताओं से MALE ड्रोन खरीदता रहा है. इस स्वदेशी कार्यक्रम की सफलता विदेशी निर्भरता को काफी कम कर देगी.
रक्षा निर्यात और भविष्य की संभावनाएं
यह परियोजना न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करेगी, बल्कि भारत को एक प्रमुख रक्षा निर्यातक के रूप में स्थापित करने में भी सहायता करेगी. वहीं, दोहरी विनिर्माण सुविधा स्थापित होने से उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, जिसका उपयोग भविष्य में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ड्रोन का निर्यात करने के लिए किया जा सकता है. DRDO के 'तपस बीएच-201' जैसे स्वदेशी ड्रोन कार्यक्रमों में सीखी गई तकनीक और सबक इस नई पहल में मददगार साबित होंगे.
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