फिर उठी मांग, राजीव गांधी से छीना जाए 'भारत रत्न'

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से भारत रत्न वापस लेने की मांग एक बार फिर तेज हो गयी है. इस बार ये मांग केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने की. बता दें कि इससे पहले भी कई बार राजीव गांधी से भारत रत्न वापस लेने की मांग की जा चुकी है.

फिर उठी मांग, राजीव गांधी से छीना जाए 'भारत रत्न'

दिल्ली: केंद्रीय मंत्री और अकाली दल नेता हरसिमरत कौर बादल ने राजीव गांधी से देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न वापस लेने की मांग की है. उन्होंने इस सन्दर्भ में पीएम मोदी से अपील की. हरसिमरत कौर का यह बयान पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के उस बयान के जवाब में आया है कि जिसमें उन्होंने दावा किया था कि यदि तत्कालीन गृह मंत्री नरसिम्हा राव ने इंद्रकुमार गुजराल की सलाह मान ली होती तो सिख विरोधी दंगों को रोका जा सकता था.

मनमोहन सिंह के बयान के बाद उठा विवाद

पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने कुछ दिन पहले एक खुलासा करते हुए कहा था कि यदि तत्कालीन गृह मंत्री नरसिम्हा राव ने इंद्रकुमार गुजरात की सलाह मान ली होती तो सिख विरोधी दंगों को रोका जा सकता था. उन्होंने कहा, "जब 1984 की दुखद घटना हुई, तो उस शाम गुजराल जी तत्कालीन गृहमंत्री नरसिम्हा राव के पास गए और उन्हें बताया कि स्थिति इतनी विकट है कि सरकार द्वारा जल्द से जल्द सेना बुलानी आवश्यक है. अगर उस सलाह पर ध्यान दिया जाता तो 1984 में हुआ नरसंहार शायद टाला जा सकता था." एक कार्यक्रम में डॉ.मनमोहन सिंह ने ये बातें कहीं थीं.

सुखबीर बादल ने भी की भारत रत्न लेने की मांग

पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने भी राजीव गांधी से भारत रत्न वापस लेने की मांग की है. उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह के बयान से ये स्पष्ट हो गया है कि राजीव गांधी के इशारे पर ही 1984 में सिक्खों का सामूहिक नरसंहार किया गया था. यदि समय रहते प्रधानमंत्री के रूप में राजीव गांधी ने सेना को बुला लिया होता तो हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती थी.

'जब बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है' 

1984 में जब इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश भर में सिक्खों को मारा जा रहा था तब राजीव गांधी ने बेहद आपत्तिजनक और संवेदनहीन बयान दिया था. उन्होंने एक जनसभा में कहा था कि जब बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है. इस बयान की जब बहुत आलोचना भी की गयी थी क्योंकि देश के प्रधानमंत्री के रूप में इतना गैरजिम्मेदाराना बयान सभी पीड़ित सिक्खों के जख्मों पर नमक छिड़क रहा था.

पहले भी की जा चुकी है भारत रत्न छीनने की मांग

राजीव गांधी से पहले भी भारत रत्न छीनने की मांग की गयी है. दिल्ली विधानसभा में आम आदमी पार्टी की ओर से ये मांग की गयी थी. आप विधायक जरनैल सिंह ने सदन में एक प्रस्ताव भी रखा था लेकिन बाद में ये वापस भी ले लिया गया था. इस प्रस्ताव में राजीव गांधी को सिक्खों के कत्लेआम का जिम्मेदार माना गया था और भारत रत्न वापस लेने की माग की गयी थी. प्रस्ताव में कहा गया था कि दिल्ली सरकार को गृह मंत्रालय को कड़े शब्दों में लिखकर देना चाहिए कि राष्ट्रीय राजधानी के इतिहास के भयंकर जनसंहार के पीड़ितों के परिवार और उनके करीबी न्याय से वंचित हैं. भारत रत्न वापस लेकर उन्हें न्याय दिया जा सकता है.

हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने भी की थी यही मांग

हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने भी 17 दिसंबर को ट्वीट किया था कि राजीव गांधी के सभी अलंकार वापस ले लिए जाने चाहिए और उनके नाम से चल रही सभी योजनाओं और प्रकल्पों से राजीव गांधी का नाम मिटा देना चाहिए. जब तक उन सबको सजा न मिले जो इस नरसंहार में शामिल थे तब तक मृतकों को शांति नहीं मिलेगी. राजीव ने इस नरसंहार का यह कहकर समर्थन किया था कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है, उन्हें भी मरणोपरांत सजा दी जानी चाहिए.

1991 में राजीव को दिया गया था सर्वोच्च नागरिक सम्मान

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को सन् 1991 में मरणोपरांत भारत रत्न सम्मान से नवाजा गया था, जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी. तब भी कई सामाजिक संगठनों ने इसका विरोध किया था.