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पटना में बढ़ रहे डेंगू मरीज, सरकारी तंत्र के खिलाफ फूटा युवाओं का गुस्सा

बिहार सरकार की डेंगू मरीजों के लिए की जा रही व्यवस्थाएं कुछ इतनी ही है जितनी मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार के इलाज के लिए थी और पटना जलजमाव में लोगों को राहत पहुंचाने के लिए. 

पटना में बढ़ रहे डेंगू मरीज, सरकारी तंत्र के खिलाफ फूटा युवाओं का गुस्सा

पटना: बिहार की राजधानी पटना में पिछले दिनों बारिश के बाद हुए जलजमाव से शहर में डेंगू मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई. पटना में इस बीमारी के आंकड़े दिल्ली के मुकाबले आठ से दस गुणा तक ज्यादा हैं. आलम यह है कि पटना के बड़े से बड़े अस्पतालों में डेंगू के मरीजों के इलाज के लिए बेड की व्यवस्था तक नहीं है. भारी जलजमाव के बाद अब तक के सबसे ज्यादा 2200 केस आधिकारिक रूप से दर्ज किए गए हैं. इनमें से पांच लोगों की मौत हो गई है और पिछले दो दिनों में 191 नए मरीज सामने आए हैं. सरकारी रिपोर्ट की मानें तो सूबे की राजधानी में हर दिन औसतन 100 नए मरीजों की पहचान की जा रही है. 

सूबे के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) में शुक्रवार को 105 नए मरीज डेंगू टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए. यही हाल पटना के अन्य बड़े अस्पतालों का भी है. आईजीआईएमएस, पारस हॉस्पिटल, एम्स, एनएमसीएच और रूबन हॉस्पिटल में भी मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. नालंदा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में तो अब तक डेंगू के मरीजों के लिए इमरजेंसी की कोई व्यवस्था ही नहीं की गई है. वहीं पीएमसीएच में सरकारी और सस्ती व्यवस्था के लिए पहुंच रहे मरीजों को सही इलाज न मिल पाने की वजह से काफी परेशानी हो रही है. पीएमसीएच में 200 मरीजों के बेड की व्यवस्था है जबकि वहां हर दिन 400 लोगों का इलाज किया जा रहा है. 

कई नेता भी आ चुके हैं चपेट में 

 इस बीमारी के चपेट से नेता भी नहीं बच पाए हैं. भाजपा के दीघा विधायक संजीव चौरसिया के अलावा भाजपा के बांकीपुर विधायक नितिन नवीन भी डेंगू के शिकार हो गए हैं. मालूम हो कि साफ पानी में पनपने वाले एडीज मच्छरों की वजह से डेंगू के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं. इसको लेकर सरकार व्यवस्था को चाक-चौबंद करने में लगी हुई है. इसके बावजूद नए-नए केसों की बढ़ती संख्या के इलाज के लिए व्यवस्था पर्याप्त नहीं है. 

वरिष्ठ पत्रकार और वकील की भी हो चुकी है मौत

डेंगू की चपेट में आने से पटना शहर के कुछ प्रतिष्ठित लोगों की जान भी चली गई है. पटना हाई कोर्ट के वकील राजीव लोचन के अलावा वरिष्ठ पत्रकार रविरंजन सिन्हा की डेंगू से मौत हो गई है. 

गांधी मैदान में युवाओं ने की सरकार के खिलाफ नारेबाजी

पटना जलजमाव के बाद बिहार सरकार पर सरकारी व्यवस्था के लाचारीपन को लेकर लगातार घेराव किया जा रहा है. शुक्रवार को प्रदेश के अलग-अलग स्थानों से पटना पहुंचे युवाओं ने सरकारी तंत्र के खिलाफ प्रोटेस्ट मार्च किया. गांधी मैदान में काली पट्टी बांधे सैकड़ों युवा पहुंचे और उन्होंने जोर-शोर से नारेबाजी कर सरकार से इस लाचारी के लिए जवाब मांगा. इस दौरान पूरा मैदान 'बिहार सरकार जवाब दो' और 'हमारी क्या गलती' है से गूंजता रहा. इस प्रोटेस्ट मार्च में बिहार के कुछ पत्रकार भी शामिल रहे, जो मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार में पीड़ितों की मदद के लिए तैनात रहे थे. 

चमकी बुखार और जलजमाव के रहे हैं हीरो

मुजफ्परपुर चमकी बुखार के बाद बिहार में जलजमाव की भयावह तस्वीर देखने को मिली. सूबे की राजधानी में शिक्षण संस्थानों से लेकर तमाम काम हफ्तों प्रभावित रहे. इसी का गुस्सा शुक्रवार को पटना में देखने को मिला. दरअसल, मुजफ्फरपुर चमकी बुखार में लाचार सरकारी व्यवस्था से नाउम्मीदी के बाद बिहार की कई युवा टीमों ने मोर्चा संभाला और चमकी बुखार से पीड़ितों के घर-घर जा कर मदद पहुंचाई थी. इसके बाद पटना के भारी जलजमाव में फिर से उसी युवाओं और पत्रकारों की एक टोली ने जलजमाव से परेशान घर में कैद लोगों को न सिर्फ रेस्कयू किया बल्कि जरूरी सामाग्री भी पहुंचाई. 

बता दें कि पटना जलजमाव में फंसे लोगों को राहत पहुंचाने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों पूरी तरह फेल रहीं. यहां तक खाने के पैकेट की सामाग्री भी खाने लायक नहीं पहुंचाई गई. ऐसे में डेंगू पीड़ितों के लिए कितनी कोशिश की जा रही है उसकी पड़ताल भी अलग से की जा सकती है.