चिदंबरम को धर्मेंद्र ने दिखाई असलियत, कहा-उनकी पीड़ा समझ में आती है

कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने लोकतंत्र सूचकांक में भारत के 10 स्थान लुढ़कने को लेकर गुरुवार को आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार में लोकतांत्रिक संस्थाओं को शक्तिहीन किया गया है और सत्ता में बैठे लोग असली 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' हैं. पूर्व वित्त मंत्री ने ट्वीट किया, भाजपा लोकतंत्र सूचकांक में 10 स्थान लुढ़क गया. 

चिदंबरम को धर्मेंद्र ने दिखाई असलियत, कहा-उनकी पीड़ा समझ में आती है

नई दिल्लीः कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने बुधवार को कहा कि सत्ता में बैठे लोग असली टुकड़े-टुकड़े गैंग हैं. उनके इस बयान पर भाजपा की ओर से जवाब आ गया है. केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पूर्व वित्त मंत्री के बयान पर पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि चिदंबरम साहब की पीड़ा देश के सामान्य़ लोगों को भी समझ आती है. उनका इशारा चिदंबरम के जेल जाने की ओर था.  

चिदंबरम ने यह कहा था...
कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने लोकतंत्र सूचकांक में भारत के 10 स्थान लुढ़कने को लेकर गुरुवार को आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार में लोकतांत्रिक संस्थाओं को शक्तिहीन किया गया है और सत्ता में बैठे लोग असली 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' हैं. पूर्व वित्त मंत्री ने ट्वीट किया, भाजपा लोकतंत्र सूचकांक में 10 स्थान लुढ़क गया.

पिछले दो साल के राजनीतिक घटनाक्रमों पर नजदीकी नजर रखने वाला कोई भी व्यक्ति यह जनता है कि लोकतंत्र को कुचला गया है और लोकतांत्रिक संस्थाओं को शक्तिहीन किया गया है. उन्होंने आरोप लगाया, 'जो लोग सत्ता में हैं वो असली टुकड़े-टुकड़े गैंग हैं. 

चिदंबरम ने कहा, 'भारत जिस दिशा में बढ़ रहा है उससे दुनिया सशंकित है. द इकोनॉमिस्ट इंटेलीजेंस यूनिट (ईआईयू) की ओर से 2019 के लिए लोकतंत्र सूचकांक की वैश्विक सूची में भारत 10 स्थान लुढ़क कर 51वें स्थान पर आ गया है. संस्था ने इस गिरावट की मुख्य वजह देश में 'नागरिक स्वतंत्रता का क्षरण' बताया है.

सूची के मुताबिक भारत का कुल अंक 2018 में 7.23 था जो अब घटकर 6.90 रह गया है. यह वैश्विक सूची 165 स्वतंत्र देशों और दो क्षेत्रों में लोकतंत्र की मौजूदा स्थिति का एक खाका पेश करती है. 

प्रधान ने किया पलटवार
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस टिप्पणी पर जवाब देते हुए कहा कि चिदंबरम साहब की मन की पीड़ा समझी जा सकती है. इसे देश का सामान्य व्यक्ति भी समझ सकता है. जो चिंदी चोरी करके जेल जाएं, लंबे समय कानून के कठघरे में खड़े रहें.

चिदंबरम साहब की विश्वसनीयता क्या है और उनके समय में देश में क्या क्या हुआ है, यह देश को अच्छी तरह से पता है. स्वाभाविक है उनके मन में नियम कानून का पालन करने वाले के प्रति पीड़ा रहेगी. 

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