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कर्नाटक में टीपू सुल्तान का जिन्न फिर आया बोतल से बाहर

कर्नाटक में टीपू सुल्तान के नाम पर एक बार फिर हंगामा शुरु हो गयाहै. इस बार भाजपा के एक विधायक ने ये बोला है कि उसने अनेक मंदिरों को लूटा था. अब ऐसे में राजनीतिक गलियारे में घमासान शुरू होना आम बात है.

कर्नाटक में टीपू सुल्तान का जिन्न फिर आया बोतल से बाहर
टीपू पर हिंदुओं का हत्यारा होने का आरोप

नई दिल्ली: कर्नाटक में टीपू सुल्तान पर विवाद एक एक बार फिर बढ़ गया है. भारतीय जनता पार्टी के विधायक अप्पाचु रंजन ने राज्य सरकार को चिट्ठी लिखकर स्कूलों की किताबों से मैसूर रियासत के 18वीं सदी के विवादिस्त शासक टीपू सुल्तान का नाम हटाने की मांग की है.

टीपू सुल्तान को बताया हिंदुओं का हत्यारा
भाजपा विधायक ने राज्य के शिक्षा मंत्री एस सुरेश कुमार को चिट्ठी लिखकर कहा है कि स्कूलों में टीपू सुल्तान से संबंधित पाठ में गलत सूचना है. बीजेपी विधायक के मुताबिक टीपू सुल्तान कोई स्वतंत्रता सेनानी नहीं था. बल्कि टीपू सुल्तान ने हजारों हिंदू और ईसाइयों का धर्मपरिवर्तन कराया था.

विधायक अप्पाचु रंजन ने कहा कि 'रिकॉर्ड उपलब्ध हैं कि उसने अनेक मंदिरों को भी लूटा था. इसलिए गलत सूचना नहीं फैलाई जानी चाहिए और केवल सच सामने आना चाहिए.'

पहले भी विवादों में रही है टीपू सुल्तान जयंती
कर्नाटक में टीपू सुल्तान को लेकर विवाद नया नहीं है. 2015 में कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने टीपू की जयंती समारोह किया था. जिसका भाजपा का कड़ा विरोध किया था. 2015 से कर्नाटक में राज्य सरकार हर साल टीपू सुल्तान की जयंती का कार्यक्रम कर रही थी. पिछले साल एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ने भी इसे बरकरार रखा था. लेकिन इस साल बीजेपी के सत्ता में आने के बाद टीपू के जयंती कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया.

नाराज हुई टीपू के वंशज
टीपू सुल्तान के वंशज आरोप लगा रहे है कि वोटबैंक की राजनीति के लिए टीपू सुल्तान को निशाना बनाया जा रहा है. टीपू के वंशज मोहम्मद सलीम आलम का कहना है कि वो इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखेंगे और जरूरत पड़ी तो मानहानि का केस भी दायर करेंगे.

कांग्रेस बीजेपी में पहले टीपू पर हो चुकी है तकरार
टीपू सुल्तान को लेकर कर्नाटक में बीजेपी और कांग्रेस कई बार आमने-सामने आ चुकी है. ऐसे में अब ये देखना दिलचस्प हो जाएगा कि राज्य में बीजेपी सरकार स्कूलों की किताबों से टीपू सुल्तान का नाम हटाती है या नहीं. और अगर बीजेपी सरकार ने ऐसा किया तो फिर देखना ये भी होगा कि कांग्रेस इस पर क्या रूख अपनाती है?