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क्या ''मजहबी कट्टरपंथियों'' के हीरो बनना चाहते हैं कमलेश तिवारी के हत्यारोपी? देखिए 6 अहम सबूत

कमलेश तिवारी के हत्यारोपी गिरफ्तार तो कर लिए गए. पुलिस इन्हें पकड़ने के बाद लगातार अपनी पीठ थपथपाने में लगी है. लेकिन क्या सचमुच इन्हें पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद गिरफ्तार किया या फिर ये दोनों खुद ही गिरफ्तार होना चाहते थे. जिससे कि कौम के सामने शहादत की नजीर पेश की जा सके. हत्यारोपियों की मंशा से जुड़े ये हैं 6 अहम सबूत, जो बताते हैं कि कैसे इन शातिर कट्टरपंथियों ने खुद को कौम का शहीद साबित करने के लिए जाल रचा है- 

क्या ''मजहबी कट्टरपंथियों'' के हीरो बनना चाहते हैं कमलेश तिवारी के हत्यारोपी? देखिए 6 अहम सबूत
क्या जान बूझकर पुलिस के जाल में फंसे हत्यारोपी

नई दिल्ली: कमलेश तिवारी को गोली मारने के बाद बड़ी बर्बरता से गला रेतकर हत्या करने के आरोपी मोइनुद्दीन और अशफाक आखिरकार पुलिस की गिरफ्त में आ गए हैं. लेकिन सवाल ये है कि आखिर ये कैसे गिरफ्तार हुए और इनकी आगे की मंशा क्या है- 

1. विदेश भागने का पूरा मौका था हत्यारोपियों के पास
ऐसी खबर है कि कमलेश तिवारी के हत्यारोपी मोइनुद्दीन और अशफाक नेपाल पहुंच गए थे. लेकिन वो दोनों वहां रुके नहीं बल्कि वापस लौट आए. जांच एजेन्सियां अचरज में हैं कि आखिर उन्होंने ऐसा क्यों किया. वह दोनों बड़ी आसानी से नेपाल के जरिए कहीं और निकल सकते थे. या फिर किसी सुरक्षित ठिकाने पर छिपकर दिन बिता सकते थे.

लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया, बल्कि यह जानते हूए कि पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी के लिए पूरी तरह जाल बिछा रखा है. वह उसमें फंसने के लिए आ गए. क्या ये इस बात का सबूत नहीं है कि ये दोनों हत्यारे खुद ही गिरफ्तार होने की मंशा रखते थे. 

2. सूरत की मिठाई के साथ दुकान का बिल भी छोड़ना
कमलेश तिवारी की हत्या के पहले साजिशकर्ताओं ने बेहद सफाई से साजिश रची. लेकिन उसके बाद कई ऐसी गलतियां की गईं, जो जानबूझ कर की गईं. जैसे सूरत के मिठाई डिब्बे के साथ बिल भी छोड़ना. हत्यारे शायद चाहते थे कि पुलिस सूरत की उस दुकान तक पहुंचे. इसलिए उन्होंने मिठाई के डिब्बे के साथ दुकान का बिल भी छोड़ा. यह अनजाने में की गई मामूली गलती नहीं है. बल्कि जानबूझकर उठाया गया कदम है.

शायद वे चाहते थे कि पुलिस सूरत की उस मिठाई दुकान तक पहुंचे. इसमें ध्यान देने वाली बात यह है कि मिठाई दुकान की जिस सीसीटीवी फुटेज में मोइनुद्दीन और अशफाक का चेहरा दिखाई दे रहा है, उसमें भी उन्होंने खुद को छिपाने की कोई कोशिश नहीं की है. बल्कि भीड़ से अलग होकर पूरी तरह अपना चेहरा कैमरे में दिखाया है. जिससे उनकी तस्वीरें पुलिस के जरिए पूरे देश में फैल जाएं. खास बात यह है कि आरोपी मिठाई खरीदने के लिए किसी छोटी मोटी दुकान दुकान में नहीं गए. बल्कि सूरत की सबसे प्रसिद्ध और बड़ी दुकान में पहुंचे. क्योंकि शायद वह जानते थे कि यहां सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ है. जिसमें उनकी तस्वीरें दर्ज हो जाएंगी. 

3. लखनऊ के होटल में छोड़े सबूत
कमलेश तिवारी की हत्या के बाद जब आरोपी वापस लखनऊ के होटल ''खालसा इन'' में पहुंचे, तो उनके पास सबूत मिटाने का पर्याप्त समय था. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. मोइनुद्दीन और अशफाक दोनों ने हत्या में इस्तेमाल किए गए भगवा कपड़े वहीं छोड़ दिए. जिसे वह बड़े आराम से अपने साथ ले जाकर ठिकाने लगा सकते थे. जबकि वह जानते थे कि यह कपड़े उनके खिलाफ सबसे ठोस सबूत हैं.

यही नहीं होटल ''खालसा इन'' में रुकने के लिए इन दोनों ने अपनी ओरिजिनल आईडी का इस्तेमाल किया. जबकि आम तौर पर हत्या जैसी गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त होने वाले लोग फर्जी आईडी का सहारा लेते हैं. इससे यह साबित होता है कि हत्यारों ने अपनी पहचान छिपाने की कोई कोशिश नहीं की. बल्कि उनकी मंशा तो यही लगती है कि वह दोनों अपनी करतूत के लिए ज्यादा से ज्यादा प्रचार पाने की ख्वाहिश रखते थे. 

4. धड़ल्ले से मोबाइल फोन का इस्तेमाल
आज कल सड़कछाप मामूली गुंडा भी जानता है कि पुलिस फोन सर्विलांस के आधार पर बड़ी आसानी से किसी के भी लोकेशन का पता लगा लेती है. लेकिन हत्यारोपी इतने बेखौफ थे कि उन्होंने अपने मोबाइल फोन का इस्तेमाल जारी रखा. हालांकि उन्हें पुलिस की हर गतिविधि की जानकारी मिल रही थी.

लेकिन उन्होंने कोई सतर्कता नहीं बरती. बल्कि सूरत में अपने परिवार को फोन करके पैसों का इंतजाम करने के लिए भी कह दिया. जबकि वह अच्छी तरह जानते थे कि पुलिस उनके पूरे परिवार का फोन टैप कर रही है. 

5. कई जगहों से मिला समर्थन
कमलेश तिवारी की हत्या के बाद पुलिस के आंखमिचौली खेलते हुए दोनों हत्यारोपी कई जगहों पर रुके. जहां उन्हें कुछ मजहबी कट्टरपंथियों ने समर्थन भी दिया. जिसमें से नागपुर का एक शख्स सैयद आलिम अली भी शामिल है. जिससे आरोपियों ने हत्या के बाद बात की थी. आलिम अली को गिरफ्तार कर लिया गया. आलिम अली पिछले दो सालों से अपने कट्टरपंथी विचारों से मुस्लिम युवाओं को भड़काने के काम में लगा था. सोशल मीडियापर उसके 40 हजार फॉलोवर हैं. वह पहले भी कमलेश तिवारी को जान से मारने की धमकी दे चुका है.  

इसके अलावा खबर है कि हत्या के बाद दोनों आरोपी बरेली के मौलाना कैफी अली से मिलने आए थे. जिसने दोनों आरोपियों का बरेली एक अस्पताल में इलाज भी करवाया था. कैफी अली बरेली की दरगाह आला हजरत में मौलवी है. जो फिलहाल यूपी एटीएस की हिरासत में है. पुलिस ने पीलीभीत के शेरपुर गांव के रहने वाले फिरोज से भी पूछताछ की है, जो कि कमलेश तिवारी हत्याकांड के साजिशकर्ता राशिद के संबंध रखता है. खबर ये भी है कि बरेली में ही आरोपियों को स्मार्टफोन उपलब्ध कराया गया. 

लखनऊ से निकलने के बाद हत्यारोपियों ने जिस कार का इस्तेमाल किया, उसके ड्राईवर ने खुलासा किया कि इस कार को मालिक के एक रिश्तेदार ने गुजरात से 5 हजार रुपए में बुक करवाया था. इसी कार से हत्यारोपी मोइनुद्दीन और अशफाक लखीमपुर से शाहजहांपुर की तरफ निकले थे. सोमवार को इन दोनों की तस्वीरें बस स्टैण्ड के पास लगे सीसीटीवी कैमरे में दिखाई दी थीं. 

6. अदालत में सरेंडर करना चाहते थे
कमलेश तिवारी के हत्यारोपी अदालत में सरेंडर भी करना चाहते थे. इसके लिए उन्होंने ठाकुरगंज के एक वकील को फोन करके इच्छा जाहिर की थी. लेकिन वकील ने तत्काल पुलिस को इसकी सूचना दी. जिसके बाद उनकी ये ख्वाहिश असफल हो गई. शायद इसके पीछे आरोपियों का यह डर रहा हो कि अगर पुलिस उन्हें गिरफ्तार करती है तो उनकी जान को खतरा हो सकता है. इसीलिए उन्होंने अदालत में सरेंडर करने की बात सोची. लेकिन बाद में उन्होंने अपने प्लान में बदलाव कर दिया और जान का डर छोड़कर पुलिस को अपनी गिरफ्तारी का मौका दिया.